Mumbai housing crisis: रोशनी, रौनक और रुतबा...मुंबई हमेशा से सपनों का शहर कहलाता रहा है, लेकिन इसी चमक के पीछे एक खामोश सी बेचैनी भी पल रही है. सवाल ये है कि क्या इस शहर में अब अकेले कमाने वाले युवाओं के लिए जगह कम होती जा रही है? सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने ऐसा मुद्दा छेड़ दिया है, जिसने रियल एस्टेट की पूरी तस्वीर पर नई बहस खड़ी कर दी. कहा जा रहा है कि स्टूडियो अपार्टमेंट की लॉन्चिंग तेजी से घट रही है और छोटे घर जैसे गायब होते जा रहे हैं. अगर सच में ऐसा है, तो क्या मुंबई ख्वाबों का शहर नहीं बल्कि एक एग्जिट सिटी बनता जा रहा है, जहां रहना हर दिन और मुश्किल होता जा रहा है?
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स्टूडियो अपार्टमेंट में भारी गिरावट (Sharp Fall in Studio Apartment Launch)
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी MMR में 2025 में स्टूडियो अपार्टमेंट लॉन्च घटकर सिर्फ 790 यूनिट रह गए. यह आंकड़ा पिछले पांच साल में सबसे कम बताया गया है. लिंक्डइन पर शेयर एक पोस्ट में दावा किया गया कि डेवलपर्स अब छोटे घर बनाना लगभग बंद कर रहे हैं, जिससे प्रॉपर्टी की सीढ़ी का निचला पायदान गायब होता जा रहा है. पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मुंबई अब सिंगल प्रोफेशनल्स के लिए मुश्किल शहर बनता जा रहा है.
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युवाओं के सामने तीन रास्ते (studio apartment launch 2025)
पोस्ट के मुताबिक युवाओं के पास तीन ही विकल्प बचते हैं. पहला, करोड़ों देकर माचिस के डिब्बे जैसा घर खरीदना. दूसरा, लंबी अवधि का होम लोन लेकर मॉर्गेज ट्रैप में फंस जाना. तीसरा, उम्रभर किराए पर रहना. किराए के मामले में भी मुश्किलें कम नहीं हैं. दावा किया गया कि सख्त TDS नियमों के चलते कई मकान मालिक किराया बाजार से बाहर हो रहे हैं, वहीं को लिविंग स्पेस पर 18 प्रतिशत GST का असर भी पड़ रहा है.
क्या मुंबई बन रहा है एग्जिट सिटी (Is Mumbai Becoming an Exit City)
पोस्ट में इसे हाउसिंग क्राइसिस नहीं बल्कि डेमोग्राफिक इविक्शन कहा गया. तर्क यह है कि अगर युवा वर्कफोर्स ही शहर छोड़ने लगे तो चमकते बिजनेस हब जैसे BKC में काम कौन करेगा. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस चिंता का समर्थन किया. कुछ यूजर्स ने कहा कि एंट्री लेवल हाउसिंग खत्म होने का मतलब है कि टैलेंट भी धीरे-धीरे शहर छोड़ देगा. मुंबई की महंगी प्रॉपर्टी कोई नई बात नहीं, लेकिन स्टूडियो अपार्टमेंट में गिरावट ने नई बहस छेड़ दी है. सवाल सिर्फ घर का नहीं, बल्कि शहर के भविष्य का है. अगर युवा पेशेवरों के लिए जगह कम होती गई, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.
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