
उल्कापिंड की प्रतीकात्मक तस्वीर.
जयपुर:
राजस्थान की राजधानी जयपुर के भाकरोटा थाना क्षेत्र में एक खेत में जलता हुआ उल्कापिंड गिरने से सनसनी फैल गई. थानाधिकारी हेमेन्द्र शर्मा ने बताया कि थाना क्षेत्र के मुकुंदपुरा गांव में बंशीधर के खेत में तडके करीब चार बजे तेज धमाके के साथ गिरे इस उल्कापिंड से गांव में जाग हो गयी और लोग घरों से बाहर आ गये. घटना की जानकारी मिलते ही खेत में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पडी जिसे मौके पर पहुंची पुलिस ने हटाया. उन्होंने बताया कि लगभग पांच किलो वजनी काले रंग के इस उल्कापिंड के गिरने से जमीन पर गहरा गड्ढा बन गया और उल्कापिंड के छोटे-छोटे टुकडे हो गये. उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गयी है.
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के फिजिक्स के सेवानिवृत प्रोफेसर आर एन त्रिपाठी ने आकाश से गिरे इस पत्थर को उल्कापिंड होने का दावा करते हुये जिला प्रशासन से जांच के लिये इसको अहमदाबाद लेबोरेटरी में भिजवाने का सुझाव दिया है.
उन्होंने कहा कि उल्कापिंड सामान्यतया चुम्बकीय परिधि से गिरे रहते है और जो इस परिधि में नही आ पाते वह कई बार गिर जाते है.
मालूम हो कि खगोलशास्त्रियों का मानना है कि 6.6 करोड़ साल पहले 10 किलोमीटर व्यास का एक उल्का पिंड धरती से टकराया था. पिंड मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप से टकराया. माना जाता है कि टक्कर की वजह से पूरी धरती थर्रा उठी और एक झटके में विशालकाय डायनासोर खत्म हो गए. उस वक्त धरती पर मौजूद ज्यादातर पौधे और जीव-जंतु भी उस टक्कर की भेंट चढ़ गए.
इनपुट: भाषा
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के फिजिक्स के सेवानिवृत प्रोफेसर आर एन त्रिपाठी ने आकाश से गिरे इस पत्थर को उल्कापिंड होने का दावा करते हुये जिला प्रशासन से जांच के लिये इसको अहमदाबाद लेबोरेटरी में भिजवाने का सुझाव दिया है.
उन्होंने कहा कि उल्कापिंड सामान्यतया चुम्बकीय परिधि से गिरे रहते है और जो इस परिधि में नही आ पाते वह कई बार गिर जाते है.
मालूम हो कि खगोलशास्त्रियों का मानना है कि 6.6 करोड़ साल पहले 10 किलोमीटर व्यास का एक उल्का पिंड धरती से टकराया था. पिंड मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप से टकराया. माना जाता है कि टक्कर की वजह से पूरी धरती थर्रा उठी और एक झटके में विशालकाय डायनासोर खत्म हो गए. उस वक्त धरती पर मौजूद ज्यादातर पौधे और जीव-जंतु भी उस टक्कर की भेंट चढ़ गए.
इनपुट: भाषा