
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के एक गांव में दो लोगों को उनके परिवार ने ही 20 साल से बेड़ियों में बांध रखा है। इनका कहना है कि मानसिक रूप से बीमार इन दोनों को इलाज नहीं हो पा रहा है कि इसलिए ऐसा किया है।
सेवा धाम आश्रम संस्थान ने एनडीटीवी पर खबर देखने के बाद इन दोनों के इलाज का जिम्मा उठाने की बात की है। बुधवार को इनकी टीम दोनों को उज्जैन ले जाकर इलाज प्रारंभ करेगी।
गौरतलब है कि बरोदिया पिपरिया गांव के 65 साल के चूड़ामन कौरव और उनके 32 साल के बेटे बृजेश को उनके परिवार ने ही बेड़ियों में बांध रखा है। दलील है ये दोनों मानसिक रूप से बीमार हैं और उनके पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है।
2-3 हजार रुपये की मासिक आय वाले इस परिवार में सात लोग हैं। परिवार का कहना है कि एक हजार रुपये तो चूड़ामन और बृजेश की दवा में ही खर्च हो जाते हैं। उन्होंने इनका इलाज जबलपुर और ग्वालियर के कई अस्पतालों कराया, पर पैसों की कमी और किसी तरह की मदद नहीं मिलने से इलाज पूरा नहीं हो पाया।
स्थानीय प्रशासन को चूड़ामन और बृजेश के हालत की खबर तो है, पर अब तक उन्होंने इनके लिए कुछ नहीं किया। ऐसे में ये दोनों लोग जानवरों से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं