
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रेमी युगल हर साल वेलेंटाइन डे को कुछ खास अंदाज में मनाने की चाह रखते हैं लेकिन आम तौर पर लोग रोमांटिक डिनर जैसे कुछ पुराने तरीकों पर ही चलना पसंद करते हैं। इनके बीच ऐसी जोड़ियों की भी कमी नहीं है जो अपनी साथी को हेलीकॉप्टर यात्रा पर ले जाना चाहते हैं। एक ऑनलाइन वेबसाइट ने 3,000 लोगों के साथ एक सर्वे किया और उनके अनुसार ‘45 प्रतिशत लोगों ने अपने साथियों को रोमांटिक डिनर पर ले जाने का विकल्प चुना, 39 प्रतिशत ने उपहार देने की बात कही वहीं 18 प्रतिशत लोगों ने अपने ‘स्पेशल’ को हेलीकॉप्टर यात्रा पर ले जाने की इच्छा जाहिर की है।’
पैसा बहाना नहीं चाहते
सर्वेक्षण में यह बात निकलकर भी सामने आई कि अधिकतर लोगों का बजट 3000 से 5000 रूपये के बीच का है और चूंकि प्यार के लिए एक दिन काफी नहीं इसलिए वह इस अवसर पर आंख मूंदकर पैसा भी नहीं बहाना चाहते हैं। जहां 40 प्रतिशत भारतीयों का औसतन 3000 रुपए खर्च करने का विचार है, वहीं केवल 10 प्रतिशत लोग अपने साथी पर 5000 रूपये से अधिक खर्च करने को लेकर तैयार दिखे।
14 फरवरी को दुनिया भर में वेलेंटाइन डे मनाया जाता है
इसी बीच एक ऑनलाइन वैवाहिक वेबसाइट के कराये गये एक अन्य सर्वे के अनुसार 40 प्रतिशत भारतीय इस वेलेंटाइन डे पर अपने साथी के साथ ज्यादा समय व्यतीत करना चाहते हैं। इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि ‘इस दिन 43 प्रतिशत पुरुष प्यार पर अधिक समय खर्च करना चाहते हैं लेकिन केवल 28 प्रतिशत महिलाएं ही ऐसा चाहती हैं।’ दिलचस्प यह है कि छोटे शहरों में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक चला गया लेकिन महानगरों में ऐसे 30 प्रतिशत लोग ही मिले।
पैसा बहाना नहीं चाहते
सर्वेक्षण में यह बात निकलकर भी सामने आई कि अधिकतर लोगों का बजट 3000 से 5000 रूपये के बीच का है और चूंकि प्यार के लिए एक दिन काफी नहीं इसलिए वह इस अवसर पर आंख मूंदकर पैसा भी नहीं बहाना चाहते हैं। जहां 40 प्रतिशत भारतीयों का औसतन 3000 रुपए खर्च करने का विचार है, वहीं केवल 10 प्रतिशत लोग अपने साथी पर 5000 रूपये से अधिक खर्च करने को लेकर तैयार दिखे।

इसी बीच एक ऑनलाइन वैवाहिक वेबसाइट के कराये गये एक अन्य सर्वे के अनुसार 40 प्रतिशत भारतीय इस वेलेंटाइन डे पर अपने साथी के साथ ज्यादा समय व्यतीत करना चाहते हैं। इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि ‘इस दिन 43 प्रतिशत पुरुष प्यार पर अधिक समय खर्च करना चाहते हैं लेकिन केवल 28 प्रतिशत महिलाएं ही ऐसा चाहती हैं।’ दिलचस्प यह है कि छोटे शहरों में यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक चला गया लेकिन महानगरों में ऐसे 30 प्रतिशत लोग ही मिले।
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