Viral News: चीन के साइंटिस्ट्स ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी खोज ली है, जिससे मंगल ग्रह की हवा से रॉकेट का फ्यूल बनाया जा सकेगा. मंगलवार को साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा करते हुए कहा, 'मंगल की हवा में 95 परसेंट से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड है. साइंटिस्ट ने इसी बात का ध्यान रखते हुए हेफेई की एक सरकारी लैब में खास कैटेलिस्ट बनाया है, जो इसे मेथनॉल में बदल देता है.'
कैसे बनता है यह फ्यूल?
साइंटिस्ट ने दावा किया है कि उन्होंने स्पंज जैसे क्रिस्टल पर कॉपर और सोडियम को मिलाकर यह कैटेलिस्ट बनाया है. यह मंगल ही हवा और वहां की बर्फ से मिलने वाले हाइड्रोजन को मिलाकर मेथनॉल बनाता है. लैब टेस्टिंग के बाद किए गए दावे के मुताबिक, एक किलो कैटेलिस्ट ने लगातार 12 घंटे तक हर घंटे 245 ग्राम मेथनॉल बनाया. इसमें पोटैशियम और सीजियम के मुकाबले सोडियम ने बहुत बेहतरीन नतीजे दिए.
मीथेन के बजाय मेथनॉल ही क्यों?
एक तरफ जहां नासा और स्पेसएक्स मंगल पर मीथेन बनाने पर फोकस कर रही हैं, वहीं चीन के साइंटिस्ट ने मेथनॉल को चुना है. रिसर्च टीम के मुताबिक, इसकी वजह बहुत सीधी है. मीथेन को रखने के लिए बहुत ज्यादा ठंडक चाहिए, जबकि मेथनॉल नॉर्मल टेंप्रेचर पर भी पानी की तरह रहता है. इसीलिए इसे स्टोर करना काफी आसान है. दावे के मुताबिक, इस मेथनॉल से रोवर चलाने, बिजली बनाने, हीटर चलाने और घर बनाने की सामग्री जुटाने का काम भी आसानी से हो जाएगा.
आगे क्या दिक्कतें हैं?
रिसर्च टीम के वैज्ञानिक झांग झे का कहना है कि यह तकनीक काम तो कर रही है, लेकिन अभी इसे असल में लागू करने से पहले कई मुश्किलें पार करनी होंगी. मंगल ग्रह की हवा बहुत पतली है. उस हवा को कैसे इकट्ठा किया जाएगा और उसे कैसे कंप्रेस करके रखा जाएगा, इस पर अभी काफी काम होना बाकी है.
यह भी पढ़ें | दवा कंपनी के CEO ने कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट में दी Kia Sonet कार, बोले- ये तुम्हारी मेहनत का फल
यह भी पढ़ें | गर्लफ्रेंड की इंगेजमेंट रिंग बनाने के लिए महीनों तक नदी में सोना खोजता रहा शख्स, इंटरनेट पर वायरल हुई कहानी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं