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This Article is From Aug 13, 2013

चालीस सालों में पहली बार तिरुमाला जाने वाली बसों का परिचालन थमा

चालीस सालों में पहली बार तिरुमाला जाने वाली बसों का परिचालन थमा
आंध्र प्रदेश/ तिरुपति: चालीस सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब तिरुमाला पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर जाने वाली बसों का परिचालन बंद कर दिया गया। राज्य में बसों के चालक और परिवहन कर्मचारी मंगलवार को केन्द्र के आंध्र प्रदेश विभाजन के फैसले के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल में शामिल हो गए हैं।

तिरुपति तिरुमाला वेंकेटेश्वर मंदिर के लिए हर दिन चलने वाली आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (एपीएसआरटीसी) की 1,500 से ज्यादा बसें मंगलवार को बस अड्डे पर खड़ी रहीं। बसों के कर्मचारी सीमांध्र में सरकारी कर्मचारियों द्वारा जारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं।

पिछले 38 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि मंदिर जाने वाली बसें रोक दी गई हैं, जिससे तीर्थयात्रियों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे पहले भी एपीएसआरटीसी ने अपनी मांगों को लेकर हड़तालें की हैं, लेकिन हड़तालों में मंदिर जाने वाली बसों को हमेशा छूट दी जाती थी।

पहाड़ी मंदिर में दर्शन के लिए हर दिन 50,000 तीर्थयात्री एपीएसआरटीसी की बसों से यात्रा करते हैं। बसों की आवाजाही के कारण व्यस्त रहने वाली घाट सड़क मंगलवार सुबह सुनसान नजर आई। अधिकारियों ने बताया कि सड़क पर इक्का-दुक्का निजी वाहन ही दिखाई दे रहे थे। हड़ताल पर बैठे परिवहन कर्मचारियों ने निजी वाहनों की आवाजाही रोकने की धमकी दी है।

वहीं कुछ तीर्थयात्री मन्नत पूरी करने के लिए पहाड़ी मंदिर की पैदल यात्रा कर रहे हैं। तिरुपति और तिरुमाला मंदिर के बीच की दूरी लगभग नौ किलोमीटर है।

मंदिर का काम देखने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कुछ कर्मचारी भी पृथक तेलंगाना गठन का फैसला वापस लेने की मांग को लेकर हड़ताल में शामिल हो गए हैं।

तिरुमाला तिरुपति मंदिर दुनिया का सर्वाधिक संपन्न हिंदू मंदिर है, जहां हर दिन लगभग 50,000 तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं।

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