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इंसानों ने नशा करना कब शुरू किया? अनुमान से हजारों साल पहले- नए रिसर्च में खुलासा

अबतक माना जाता था कि इंसानों ने 13 हजार साल पहले सबसे पहले जौ उगाकर उससे बीयर बनाई और पहली बार नशा किया. लेकिन नई रिसर्च में यह बात गलत साबित हुई है.

इंसानों ने नशा करना कब शुरू किया? अनुमान से हजारों साल पहले- नए रिसर्च में खुलासा
25 हजार साल पहले के लोगों के दांतों में साबुत सुपारी चूसने के सबूत मिले
  • इंडोनेशियाई सुलावेसी द्वीप पर 25,000 से 16,000 साल पुराने दो लोगों के अवशेष मिले हैं जिसमें नशे के संकेत मिले
  • सुपारी कैफीन, शराब और निकोटीन के बाद चौथे नंबर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ड्रग्स है
  • शोध में पता चला है कि इंसानों ने नशे के लिए पौधों का उपयोग नवपाषाण क्रांति से हजारों साल पहले शुरू कर दिया था

दुनिया में सबसे पहले इंसानों ने नशा करना कब शुरू किया था? इसका जवाब एक नई रिसर्च में सामने आया है. इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर करीब 25,000 से 16,000 साल पुराने दो लोगों के अवशेष मिले हैं. इनसे पता चलता है कि इंसानों ने नशा या दिमाग पर असर डालने वाले ड्रग्स का इस्तेमाल पहले के अनुमान से हजारों साल पहले ही शुरू कर दिया था. यह नशीला पदार्थ भी ऐसा है जिसे आप जरूर जानते होंगे. यह रिपोर्ट सीएनएन ने छापी है.

सुपारी का नशा

सुपारी को आप भली भांति जानते होंगे. यह अरेका पाम के फल का बीज होती है. दुनिया में कैफीन, शराब और निकोटीन के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले दिमाग पर असर डालने वाले पदार्थों (ड्रग्स) में सुपारी चौथे नंबर पर मानी जाती है. रिपोर्ट के अनुसार आज करीब 10 में से 1 व्यक्ति, खासकर एशिया और प्रशांत क्षेत्र में, सुपारी चबाता है. इसके लिए सुपारी को तैयार करके उसमें बुझा हुआ चूना मिलाया जाता है. बुझा हुआ चूना कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड भी कहलाता है. यह एक केमिकल रिएक्शन शुरू करने के लिए जरूरी होता है, जिससे सुपारी में मौजूद दिमाग पर असर डालने वाला एरेकोलाइन खून में जल्दी पहुंचता है.

सुपारी चबाने से लोगों को हल्का नशा या खुशी जैसा महसूस होता है और वे ज्यादा सतर्क महसूस करते हैं. लेकिन सवाल यह है कि इंसानों ने पहली बार दिमाग पर असर डालने वाले पदार्थों का इस्तेमाल कब शुरू किया?

रिपोर्ट में क्या पता चला?

CNN की इस रिपोर्ट के अनुसार ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के ऑस्ट्रेलियन रिसर्च सेंटर फॉर ह्यूमन इवोल्यूशन में पुरातत्व के प्रोफेसर एडम ब्रम्म ने बताया, “पुरातत्वविद लंबे समय से मानते रहे हैं कि नशे या दिमाग पर असर डालने वाले पदार्थों के इस्तेमाल की सबसे पुरानी परंपराएं करीब 13,000 साल पहले शुरू हुईं. उस समय घूम-घूमकर शिकार और खाना जुटाने वाले लोग पौधों को उगाने लगे और एक जगह स्थायी रूप से रहकर किसान बन गए.”

इंसानों के इतिहास के इस दौर को नवपाषाण क्रांति (Neolithic Revolution) कहा जाता है. उस समय आज के इजरायल के इलाके में किसानों ने सबसे पहले जौ से बीयर बनाई थी. अब से पहले मिले सबूतों से यह पता चला था कि दक्षिण-पूर्व एशिया में लोग करीब 4,000 साल पहले से ही सुपारी चबाते थे. लेकिन ब्रम्म की टीम को अब ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि करीब 25,000 से 16,000 साल पहले भी उस समय के लोग पूरी सुपारी को चूसते थे.

यह इंसानों द्वारा नशीले या दिमाग पर असर डालने वाले पदार्थ के इस्तेमाल का अब तक का सबसे पुराना ज्ञात उदाहरण हो सकता है. यही परंपरा आगे चलकर सुपारी चबाने की उस परंपरा में बदल गई, जो आज भी बहुत लोकप्रिय है.

बुधवार को साइंस एडवांसेज जर्नल में एक नई स्टडी छपी है और एडम ब्रम्म उसके मुख्य लेखक हैं. ब्रम्म और उनके साथियों का मानना है कि पूरी सुपारी, सुपारी के तैयार किए गए रूप की तुलना में कम असरदार थी. फिर भी इसका इस्तेमाल दर्द कम करने वाली चीज के तौर पर किया जाता था. हालांकि, इससे ऐसी प्रक्रिया शुरू हो सकती थी, जो आगे चलकर और ज्यादा दर्द का कारण बनती थी. ब्रम्म ने कहा, “सुलावेसी से मिले नए सबूत बताते हैं कि दुनिया के कुछ हिस्सों में खाना जुटाकर जीवन चलाने वाले समुदाय बहुत पहले से ही पौधों से मिलने वाले नशीले या दिमाग पर असर डालने वाले पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे थे. वे इनके दिमाग पर असर डालने वाले गुणों के आदी भी हो रहे थे और लंबे समय तक इस्तेमाल करने के नकारात्मक असर झेल रहे थे.”

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