AI मार डालेगा इंसानों को... हर ओर से आ रही आवाज, पूरी दुनिया में खौफ, मगर क्या अब इसे रोकना मुमकिन?
इतनी चेतावनियों के बाद भी AI का विकास बहुत तेज गति से हो रहा है. हर देश अपने स्तर पर AI को लेकर प्रयोग कर रहा है. इसमें हथियारों से लेकर जासूसी और दवाएं तक शामिल हैं. मगर अमेरिका और चीन के बीच AI की होड़ चरम पर चल रही है.
एआई को लेकर अब इसे बनाने वाले ही डरने लगे हैं. शनिवार की सुबह पोस्ट किए गए एक लेख में, एंथ्रोपिक (Anthropic) के चीफ एग्ज़ीक्यूटिव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को विकसित करने की होड़ को धीमा करने की बहुत जरूरत है.कुल मिलाकर उन्होंने माना कि AI एक दिन इंसानों का मार डालने वाला बन सकता है और ऐसा करने में उसे ज्यादा दिन नहीं लगेंगे.
सीईओ को क्या है डर
CEO डारियो अमोदेई ने दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों में से एक और उसके चैटबॉट 'क्लाउड' (Claude) के प्रमुख हैं. उन्होंने माना कि लोग AI पर से नियंत्रण खो सकते हैं, और इस टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों, बायोटेररिज्म और गंभीर आर्थिक उथल-पुथल के लिए किया जा सकता है. फिर CNN को दिए इंटरव्यू में, अमोदेई ने इंडस्ट्री के नेताओं से अपील की कि वे मिलकर काम करें ताकि गलत रास्तों और AI से मानवता को नुकसान पहुंचने की संभावना से बचा जा सके.
अचानक क्यों दिया बयान
अमोदेई का यह बयान एंथ्रोपिक के एक रिसर्चर के इस्तीफे के ठीक बाद आया. रिसर्चर ने चिंता जताई थी कि कंपनी और उसके कॉम्पिटिटर AI डेवलपमेंट को लेकर जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं. उसने बताया कि AI बनाने वाले लोगों का पक्का मानना है कि इस दशक के आखिर तक यह हम सबको खत्म कर सकता है. यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है. असल में, कई एग्जीक्यूटिव और सीनियर रिसर्चर प्रेस के सामने समझदारी भरी बातें करते हैं - लेकिन मैंने उन्हीं लोगों को निजी तौर पर डर जाहिर करते सुना है. किसी भी दूसरी इंसानी गतिविधि से इतना खतरा नहीं है, जितना एआई से.
अपने रिसर्चर की बात से सहमत
अमोदेई ने CNN से कहा कि वह कॉक्सन की बातों से असहमत होने के बजाय ज्यादा सहमत हैं. उन्होंने कहा कि AI इतनी तेज़ी से आगे बढ़ सकता है कि उसका एक समूह छह से 12 महीनों के अंदर पूरे इंटरनेट पर कब्जा कर सकता है, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है. हाल के महीनों में AI टेक्नोलॉजी में बहुत तेजी से तरक्की हुई है और यह खुद को बेहतर बनाने में सक्षम हो गई है; इस प्रक्रिया को "रिकर्सिव सेल्फ़-इम्प्रूवमेंट" (लगातार खुद को बेहतर बनाना) कहा जाता है. अगर इसे बिना रोक-टोक के छोड़ दिया गया, तो यह इन सिस्टम को समझने और उन पर नियंत्रण रखने की हमारी क्षमता से आगे निकल सकती है. इसलिए, अगर इसे आगे बढ़ाना भी है, तो बहुत सावधानी से करना होगा.
2014 में ही आ गई थी चेतावनी
ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा कि मैं डारियो की इस बात से सहमत हूं कि हमें नई सीमाओं की रफ्तार को नियंत्रित करने की जरूरत है. हाल के हफ्तों में OpenAI में हमारी चर्चाओं का यह एक मुख्य विषय रहा है. यह एक बहुत अच्छा विचार है और हम भी ऐसा ही करेंगे. हम जल्द ही इस बारे में और जानकारी साझा करेंगे. अब दुनिया में नहीं रहे महान भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने दिसंबर 2024 में BBC को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पूर्ण AI का विकास मानव जाति के अंत का कारण बन सकता है. उन्होंने कहा था, "हमने जो अभी तक AI के शुरुआती और बुनियादी रूप विकसित किए हैं, वे हमारे लिए काफी उपयोगी साबित हुए हैं. लेकिन मुझे लगता है कि पूर्ण AI का विकास मानव जाति के अंत का कारण बन सकता है. एक बार जब मनुष्य ऐसी बुद्धिमत्ता विकसित कर लेगा, तो यह अपने दम पर आगे बढ़ेगी और लगातार बढ़ती रफ्तार से खुद को री-डिजाइन (पुनर्गठित) करने लगेगी. मानव, जो धीमी जैविक विकास प्रक्रिया से बंधा हुआ है, इसकी गति से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा और पीछे छूट जाएगा यानी समाप्त हो जाएगा."
2023 में तकनीकि दिग्गजों ने की ्प्रोटोकॉल तय करने की मांग
दार्शनिक और लेखक निक बोस्ट्रोम ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Superintelligence' में उन्होंने "पेपरक्लिप मैक्सिमाइज़र" का उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी शक्तिशाली AI को केवल पेपरक्लिप बनाने का काम दिया जाए, तो वह अधिक से अधिक पेपरक्लिप बनाने के लिए पृथ्वी के सारे संसाधनों को नष्ट कर देगा, जिसमें इंसान भी शामिल हैं—भले ही उसका उद्देश्य इंसानों को नुकसान पहुंचाना न हो. एलन मस्क भी इस बारे में दुनिया को पहले ही चेता चुके हैं. एलन मस्क लंबे समय से AI के अनियंत्रित विकास का विरोध करते रहे हैं. साल 2023 में, उन्होंने और 1,000 से अधिक अन्य तकनीकी दिग्गजों ने एक खुले पत्र (Open Letter) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार होने तक बड़े AI प्रयोगों पर कम से कम 6 महीने की रोक लगाने की मांग की गई थी.
क्या AI पर अब रोक लगाना संभव है
इतनी चेतावनियों के बाद भी AI का विकास बहुत तेज गति से हो रहा है. हर देश अपने स्तर पर AI को लेकर प्रयोग कर रहा है. इसमें हथियारों से लेकर जासूसी और दवाएं तक शामिल हैं. मगर अमेरिका और चीन के बीच AI की होड़ चरम पर चल रही है. एक अपने सुपरपावर होने का रुतबा बनाए रखने के लिए एक से एक खतरनाक प्रयोग AI में कर रहा है तो दूसरी तरफ चीन खुद को सुपरपावर बनाने के लिए AI में खतरनाक रिसर्च कर रहा है. दोनों को पता है कि इस रेस में जो जितेगा, उसी का सिक्का आने वाले दशकों में दुनिया पर चलेगा. आज ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर मुहर लगा दी. ट्रंप ने इन बातों पर कहा कि कई ऐसी निगेटिव ताकते हैं जो टेक्नोलॉजी को लेकर डर पैदा कर रही हैं, लेकिन मैं बता दूं कि अमेरिका अभी AI में चीन से भी आगे है. मैं तो मानता हूं जो भी एआई की जंग जीतता है, वो जीत जाता है. राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि एआई इस्तेमाल को लेकर कुछ सेफगार्ड लाए जा सकते हैं.
यही बात तकनीकि दिग्गज भी कह रहे हैं कि सारी दुनिया मिलकर एक सेफगार्ड बनाए. पर सवाल है कि इसे मानेगा कौन? क्या खुद अमेरिका मानेगा? क्या चीन मानेगा? क्या दूसरे देश मानेंगे? क्योंकि सुपरपावर तो सभी को बनना है. परमाणु और जैविक हथियारों को लेकर पूरी दुनिया में तय नियम हैं. इसके चलते दुनिया में परमाणु हथियार कम हैं, मगर चोरी-छिपे तो कई देशों ने बना ही लिए. पाकिस्तान और उत्तर कोरिया को तो कुछ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों की तरफ से ही परमाणु हथियार की तकनीक देने के आरोप लगते रहे हैं. इसके साथ ही अमेरिका और रूस के पास दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या में परमाणु हथियार हैं. चीन भी लगातार अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाता जा रहा है और उसे रोकने वाला कोई नहीं तो फिर AI को डेवलप करने से कोई कैसे रोक देगा.
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