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ईरान के साथ-साथ स्पेन से क्यों खफा हैं डोनाल्ड ट्रंप, क्यों दिए हैं व्यापार ठप करने के आदेश

ईरान के साथ पिछले महीने हुए शांति समझौते को खत्म बताने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पने के साथ व्यापारिक संबंधों को खत्म करने की बात कही है.

ईरान के साथ-साथ स्पेन से क्यों खफा हैं डोनाल्ड ट्रंप, क्यों दिए हैं व्यापार ठप करने के आदेश
नई दिल्ली:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान के साथ हुए युद्ध विराम समझौते के खत्म होने का ऐलान किया. उनकी यह घोषणा दोनों देशों की ओर से की गई सैन्य कार्रवाइयों के बीच आई है.तुर्की में चल रहे नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने यह टिप्पणी की. इसी सम्मेलन में उन्होंने स्पेन के साथ सभी तरह के व्यापार को रोक देने की बात कही. स्पने यूरोप के उन देशों में शामिल है, जो ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों का विरोध कर रहे हैं.   

स्पेन से नाराज क्यों हैं डोनाल्ड ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को स्पेन के साथ सभी तरह का व्यापार बंद करने का आदेश दिया है. ट्रंप ने कहा,''हम अब स्पेन के साथ कोई व्यापार नहीं करना चाहते, नाटो में स्पेन एक बहुत खराब पार्टनर है. वे न तो हिस्सा लेते हैं और न ही पैसे देते हैं.'' दरअसल स्पेन ने इस साल मार्च में कहा था कि वह ईरान के खिलाफ़ ऑपरेशन के लिए अपनी जमीन पर मौजूद जॉइंट मिलिट्री बेस का इस्तेमाल अमेरिका को नहीं करने देगा. उसने युद्ध में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस भी बंद कर दिया था.

नाटो के सम्मेलन में ट्रंप ने संगठन के दूसरे सदस्यों को भी खूब खरी-खोटी सुनाई.उन्होंने ब्रिटेन और इटली का खासतौर पर जिक्र किया. हालांकि नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे ने कहा कि ईरान में अमेरिकी ऑपरेशन के समर्थन में यूरोपीय एयरपोर्ट्स से पांच हजार विमानों ने उड़ान भरी थी. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप, अमेरिका के लिए ताकत दिखाने का एक बड़ा मंच है.

ट्रंप की टिप्पणी पर स्पने ने क्या कहा है

ट्रंप की टिप्पणियों पर स्पेन ने बहुत तवज्जो नहीं दी है, उसने इसे 'सामान्य कामकाज'की तरह बताया है.स्पेन के प्रधानमंत्री  प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है,''अमेरिका के साथ हमारे देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बहुत अच्छे हैं और हमारा इरादा इन्हें बदलने का नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को स्पेन ने सामान्य कामकाज की तरह बताया है. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईरान पर हमले को आपदा बताया था.

डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को स्पेन ने 'सामान्य कामकाज' की तरह बताया है. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईरान पर हमले को आपदा बताया था.

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद यह पहला मौका नहीं है, जब ट्रंप ने स्पेन को निशाना बनाया हो. इससे पहले मार्च में ही ट्रंप ने स्पेन को लेकर इसी तरह की बात कही थी. दरअसल स्पेन ने अपने यहां मौजूद दो संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध में करने से रोक दिया था. इसके बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था,''स्पेन का रवैया बेहद खराब रहा है. हम स्पेन के साथ सभी व्यापार संबंध तोड़ देंगे. हम स्पेन से कोई संबंध नहीं रखना चाहते.'' ट्रंप की नाराजगी की एक वजह यह भी रही कि स्पेन नाटो के कुछ उन देशों में शामिल है, जो 2035 अपने रक्षा खर्च को जीडीपी के दो फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी करने पर राजी नहीं हुए हैं. जबकि बहुत से देश इसके लिए सहमत हो गए थे. उन्होंने यह सहमति ऐसे समय दी थी,जब अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे थे. स्पेन ट्रंप के इस बयान का विरोधी रहा है. 

कितने पुराने हैं अमेरिका और स्पेन के संबंध

ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईरान पर अमेरिकी हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को आपदा बताया था. टीवी प्रसारित बयान में सांचेज ने कहा था,''हम ऐसी किसी भी चीज में भागीदार नहीं बनेंगे जो दुनिया के लिए हानिकारक हो.'' 

अमेरिका और स्पेन सदियों पुराने दोस्त हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्पेन के साथ राजनयिक संबंध 1783 में स्थापित किए थे. स्पेन यूरोपीय संघ में 1986 में शामिल हुआ था. वह यूरोपीय संघ की पांचवीं सबसे बड़ी और यूरोजोन की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. स्पेन 1982 में नाटो में शामिल हुआ था. अमेरिका और स्पेन ने रक्षा सहायता को लेकर एक समझौता किया था. इसके तहत स्पेन ने अपने सैन्य प्रतिष्ठानों में कुछ सुविधाओं का उपयोग करने की इजाजत अमेरिका को दी है. दोनों देशों ने 2012 और 2015 में इस समझौते में संशोधन कर दक्षिणी स्पेन के सैन्य ठिकानों पर अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों और उपकरणों की तैनाती की इजाजत दी थी. 

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