- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी में तैनात सैनिकों की संख्या में 5000 से अधिक कटौती करने का ऐलान किया
- जर्मनी के रक्षा मंत्री ने अमेरिकी सैनिकों की कटौती को गंभीर लेकिन संयमित तरीके से देखने की बात कही
- ट्रंप का यह फैसला यूरोपीय सुरक्षा प्रतिबद्धता को कम करने और यूरोपीय सहयोगियों से नाराजगी के बीच आया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या में बड़ी कटौती करेगा. यह बयान जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ चल रहे विवाद के बीच आया है, क्योंकि ट्रंप यूरोपीय सुरक्षा के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता को कम करना चाहते हैं. पेंटागन ने शुक्रवार को पहले घोषणा की थी कि करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों को जर्मनी से वापस बुलाया जाएगा, लेकिन शनिवार को जब ट्रंप से इस फैसले की वजह पूछी गई, तो उन्होंने कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया.इसके बजाय उन्होंने कहा कि कटौती इससे कहीं ज्यादा होगी.
जर्मनी से कितने सैनिक हटाएगा अमेरिका?
फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम सैनिकों की संख्या में बहुत बड़ी कटौती करने जा रहे हैं और यह 5,000 से कहीं ज्यादा होगी” इससे पहले शनिवार को जर्मनी के रक्षा मंत्री ने इस खबर पर संयमित प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस फैसले को गंभीर लेकिन शांत तरीके से देख रहे हैं. इस फैसले को लेकर यूरोप और अमेरिका के बीच सुरक्षा नीति पर नई बहस और तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
REPORTER: "Why is the US removing troops from Germany?"
— Fox News (@FoxNews) May 2, 2026
PRESIDENT TRUMP: "We're going to cut way down, and we're cutting a lot further than 5,000." pic.twitter.com/7PK9g1Bgax
जर्मनी ने क्या कहा?
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कटौती की धमकी राष्ट्रपति ट्रंप वर्षों से देते आ रहे हैं और यह उनसे अपेक्षित भी था. उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों को अपनी रक्षा की ज्यादा जिम्मेदारी खुद उठानी होगी.हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षा सहयोग ट्रांस‑अटलांटिक साझेदारी के दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है.
पिस्टोरियस ने जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए (dpa) से कहा,“यूरोप में, और खासकर जर्मनी में, अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी हमारे हित में है और अमेरिका के हित में भी.” इस बीच, अमेरिका में इस प्रस्तावित सैन्य वापसी को लेकर दोनों दलों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) की ओर से विरोध देखने को मिला. डेमोक्रेट्स ने तुरंत इसकी आलोचना की, जबकि रिपब्लिकन नेताओं ने चिंता जताई कि इससे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ‘गलत संदेश' जाएगा. गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस हमले अब अपने पांचवे वर्ष में प्रवेश कर चुका है.
ट्रंप के इस फैसले के क्या मायने?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वह ईरान के खिलाफ इजरायल के साथ अपने अभियान में यूरोपीय सहयोगियों के साथ न आने को लेकर नाराज हैं.ट्रंप ने इस मुद्दे पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर जैसे नेताओं की खुलकर आलोचना की है. पिछले सप्ताह मर्ज ने ईरान में चल रहे युद्ध की आलोचना करते हुए कहा था कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका को “अपमानित” कर रहा है और वॉशिंगटन के पास इस संकट से निपटने के लिए कोई स्पष्ट रणनीति नहीं दिखती.
तनाव के एक और संकेत के तौर पर, ट्रंप ने यूरोपीय संघ पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका‑यूरोप व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है.इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि वे यूरोपीय संघ में बने कारों और ट्रकों पर अगले सप्ताह से 25 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. यह कदम खासकर जर्मनी के लिए बेहद नुकसानदेह माना जा रहा है, क्योंकि जर्मनी एक प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता देश है.यूरोपीय संघ के कम से कम एक सांसद ने इस टैरिफ बढ़ोतरी को “अस्वीकार्य” बताया और ट्रंप पर एक और अमेरिकी व्यापार प्रतिबद्धता तोड़ने का आरोप लगाया. इन फैसलों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका और यूरोप के बीच राजनीतिक और आर्थिक तनाव और गहराने की आशंका है.
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