सोचिए, दो जुड़वा बहनें जो कुछ ही मिनट के गैप में, एक ही मां के गर्भ से पैदा हुईं… लेकिन उनके पिता अलग-अलग हों! यह सुनने में किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह एक सच्ची और बेहद चौंकाने वाली घटना है. ब्रिटेन में DNA टेस्ट की एक साधारण रिपोर्ट ने 49 साल पुरा राज खोल दिया और दोनों बहनों की जिंदगी बदल दी. एक क्लिक के बाद जो सच सामने आया, उसने न सिर्फ परिवार की कहानी को हिला दिया, बल्कि विज्ञान की एक बेहद दुर्लभ प्रक्रिया को भी उजागर कर दिया, जिसे समझना आसान नहीं है.
2022 में हुआ खुलासा- जुड़वा बहनों के पिता एक नहीं
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इन जुड़वा बहनों का नाम मिशेल ओसबोर्न और लविनिया ओसबोर्न है. सितंबर 2022 में लविनिया ने घर पर किए गए DNA टेस्ट के रिजल्ट वाला ईमेल खोला था. उस टेस्ट रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई- लविनिया और मिशेल, जो जुड़वा हैं लेकिन उनके पिता एक नहीं हैं. ध्यान रहे कि दोनों ठीक एक जैसे नहीं दिखती हैं यानी आइडेंटिकल ट्विन्स नहीं है.
वे दोनों बिना किसी मेडिकल सर्जरी के नेचुरली कंसीव हुईं, एक ही मां के गर्भ में साथ पली-बढ़ीं और कुछ ही मिनटों के अंतर में जन्म लिया- लेकिन वे सगी बहनें नहीं, बल्कि सौतेली बहनें (हाफ-सिस्टर्स) हैं.
आखिर पीछे का साइंस क्या है?
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 49 साल की मिशेल और लविनिया का अस्तित्व एक बेहद दुर्लभ जैविक प्रक्रिया की वजह से है, जिसे हेटरोपैटरनल सुपरफेकुंडेशन कहा जाता है. इस प्रक्रिया में एक महिला के शरीर से एक ही समय में एक से ज्यादा अंडे (एग) निकलते हैं, और ये अलग-अलग पुरुषों के शुक्राणुओं से फर्टिलाइज हो जाते हैं. फिर ये भ्रूण गर्भ में सुरक्षित रहते हैं और बच्चे बनते हैं.
यहां समझना जरूरी है कि हेटरोपैटरनल सुपरफेकुंडेशन एक बहुत ही दुर्लभ और समझने में कठिन प्रक्रिया है. यह तभी होती है जब कई असंभव जैसी घटनाएं एकदम सही समय पर हों.
- महिला के एक ही पीरियड साइकिल में एक से ज्यादा अंडे (एग) निकले
- उसी समय उसे एक से ज्यादा पुरुषों के साथ संबंध बने
- फिर अलग-अलग पुरुषों के स्पर्म अलग-अलग एग से फर्टिलाइज कर जाए और वे भ्रूण गर्भ में बच जाते हैं
इसी वजह से मिशेल और लविनिया जुड़वा होते हुए भी सौतेली बहनें हैं. दुनियाभर में ऐसे 20 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं. असली संख्या पता लगाना मुश्किल है, क्योंकि यह सच तभी सामने आता है जब दोनों जुड़वा डीएनए टेस्ट कराते हैं. आमतौर पर, जो जुड़वा एक जैसे नहीं होते (नॉन-आइडेंटिकल), वे मानते हैं कि अगर एक डीएनए टेस्ट कराएगा, तो दूसरे का रिजल्ट भी लगभग वैसा ही होगा, क्योंकि दोनों में मां और पिता के जीन लगभग बराबर होते हैं.
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