- पुणे के दौंड में आयोजित SRPF ग्रुप-5 भर्ती परीक्षा में 85 सवाल एक निजी कोचिंग क्लास के सैंपल पेपर से मिले हैं
- परीक्षा शुरू होने से पहले ही टेलीग्राम ग्रुप्स पर असली प्रश्नपत्र के सवाल वायरल हो चुके थे
- एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार पर परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठाते हुए कठोर टिप्पणी की है
Maharashtra Police Bharti 2026: पुणे के दौंड में आयोजित राज्य रिजर्व पुलिस बल (SRPF) की ग्रुप-5 भर्ती परीक्षा में एक ऐसी धांधली का दावा किया गया है जिसने पूरे महकमे को हिलाकर रख दिया है. आरोप है कि इस मुख्य परीक्षा के 100 में से 85 सवाल एक निजी कोचिंग क्लास के सैंपल पेपर से हूबहू मिलते हैं. यह सनसनीखेज खुलासा होने के बाद उन हजारों युवाओं में आक्रोश है, जो ईमानदारी से मेहनत कर पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे. 85 प्रतिशत सवालों का एक ही एकेडमी के पर्चे से मिलना किसी इत्तेफाक के बजाय एक सुनियोजित लीक की ओर इशारा भी कर रहा है. अब इस मामले में सियासत भी गरमा गई है. इस पूरे मामले पर एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार को आड़े हाथों लिया है. सुले ने दो टूक कहा कि कोई भी परीक्षा का पेपर 'कॉपी-पेस्ट' एक्सरसाइज नहीं हो सकता.
एग्जाम से पहले ही टेलीग्राम पर वायरल हुए सवाल
इस विवाद की जड़ें और गहरी तब हो गईं जब यह खबर आई कि ये सवाल परीक्षा शुरू होने से पहले ही कई टेलीग्राम ग्रुप्स पर वायरल हो चुके थे. वायरल हो रहे वीडियो और दावों के मुताबिक, निजी कोचिंग संस्थान ने जो सैंपल पेपर अपने छात्रों को टेलीग्राम पर साझा किए थे, उनमें और असली परीक्षा के पर्चे में कोई अंतर नहीं बचा था. सवाल यह है कि आखिर कैसे एक प्राइवेट ट्यूटोरियल को उन सवालों की जानकारी मिल गई, जिन्हें राज्य के सुरक्षा बल की भर्ती के लिए तैयार किया गया था.
सुप्रिया सुले का हमला: 'कॉपी-पेस्ट नहीं हो सकता एग्जाम पेपर'
इस पूरे मामले पर एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार को आड़े हाथों लिया है. सुले ने दो टूक कहा कि कोई भी परीक्षा का पेपर 'कॉपी-पेस्ट' एक्सरसाइज नहीं हो सकता. उन्होंने सवाल उठाया कि जब 100 में से 85 सवाल पहले ही एक कोचिंग संस्थान के पास थे, तो परीक्षा की शुचिता कहां बची? सुले ने जोर देकर कहा, "हमारी अपेक्षा है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए. सरकार चाहे किसी भी दल की हो, नागरिकों और उनके भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी नैतिक जिम्मेदारी है."
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विजय वडेट्टीवार ने भी पूछा: 'क्या यह सिर्फ संयोग है?'
विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी इस मामले में सरकार पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस धांधली के सबूत पेश करते हुए पूछा कि आखिर एक प्राइवेट एकेडमी के पास सरकारी परीक्षा का 85% पेपर पहले कैसे पहुंच गया? वडेट्टीवार ने सवाल उठाया कि क्या यह कोचिंग माफिया और शासन के बीच किसी बड़ी सांठगांठ का नतीजा है? उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच की जाए और उन चेहरों को बेनकाब किया जाए जिनके आशीर्वाद से यह खेल चल रहा है.
खाकी की साख और कोचिंग माफिया का 'नेक्सस'
यह मामला सिर्फ सवालों के मिलने का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र पुलिस भर्ती की पारदर्शिता पर एक बड़े हमले का है. छात्रों का आरोप है कि कोचिंग माफिया और सिस्टम के बीच कोई गहरी सांठगांठ है, जिसके चलते गोपनीय पेपर को बाजार में नीलाम कर दिया गया. जब 100 में से 85 सवाल पहले ही कुछ खास लोगों के पास पहुंच चुके हों, तो फिर मेरिट लिस्ट का कोई आधार नहीं रह जाता. इस घटना ने न केवल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि लाखों उम्मीदवारों के भरोसे को भी चोट पहुंचाई है.
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