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मारिया एस्पिनोसा UN महासचिव की रेस में सबसे आगे, कौन बनेगा अगला यूएन चीफ?

कौन हैं मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा जो संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए रेस में आगे चल रही हैं? और कौन-कौन है इस रेस में? अगले यूएन चीफ का कैसे होगा चयन? जानें सब कुछ...

मारिया एस्पिनोसा UN महासचिव की रेस में सबसे आगे, कौन बनेगा अगला यूएन चीफ?
यूएन चीफ की रेस में चार महिलाओं समेत छह शख्स
AFP
  • यूएन के महासचिव की रेस में छह शख्स. सबसे आगे मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा. कैरोलिना रोड्रिग्स भी जुड़ीं.
  • चिली की पूर्व राष्ट्रपति, IAEA महानिदेशक समेत कोस्टारिका की पूर्व उपराष्ट्रपति भी रेस में शामिल.
  • मौजूदा यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इसी साल खत्म हो रहा है.

दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन संयुक्त राष्ट्र महासंघ में अगले महासचिव के चयन की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है. मौजूदा महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल इस साल के अंत में समाप्त हो रहा है और 1 जनवरी 2027 से संयुक्त राष्ट्र को नया नेतृत्व मिलने वाला है. इसी कड़ी में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अगले महासचिव पद की उम्मीदवार मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा के साथ पांचवां इंटरएक्टिव डायलॉग आयोजित किया. यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दुनिया इस समय कई बड़े संकटों का सामना कर रही है.

यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अनिश्चितता, खाद्य सुरक्षा और तेजी से बढ़ती डिजिटल चुनौतियों के बीच संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में अगला महासचिव संगठन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.

Maria Fernanda Espinosa

मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा
Photo Credit: AFP

कौन हैं मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा?

मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा इक्वाडोर की अनुभवी राजनयिक और राजनीतिज्ञ हैं. वह पहले  इक्वाडोर की विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री रह चुकी हैं. इसके अलावा वह संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. मई 2026 में एंटिगा और बारबुडा ने उनके नाम का आधिकारिक समर्थन किया था.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित संवाद के दौरान उन्होंने सदस्य देशों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दिए. उनसे नेतृत्व क्षमता, अनुभव, संयुक्त राष्ट्र सुधार और संगठन के तीन प्रमुख स्तंभों, शांति एवं सुरक्षा, मानवाधिकार और विकास से जुड़े मुद्दों पर सवाल पूछे गए.

दुनिया को भाषण नहीं, नतीजे चाहिए

अपने विजन डॉक्युमेंट में एस्पिनोसा ने कहा कि आज दुनिया को केवल बहुपक्षीय सहयोग के आदर्शों की दोहराव वाली बातें नहीं चाहिएं, बल्कि वास्तविक परिणाम चाहिए.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसा संगठन बनना होगा जो संकटों को पहले ही पहचान सके, अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सके, बेहतर तरीके से सेवाएं दे सके और वैश्विक स्तर पर लोगों का भरोसा फिर से जीत सके.

एस्पिनोसा के मुताबिक उनका विजन पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है. पहला, शांति और सुरक्षा को मजबूत करना. दूसरा, विकास को गति देना. तीसरा, डिजिटल और ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देना. चौथा, योजना बनाने और उन्हें लागू करने के बीच समय की दूरी कम करना. और पांचवां, संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को फिर से मजबूत बनाना.

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई विस्तृत कार्ययोजना नहीं है क्योंकि राजनीतिक और वित्तीय नेतृत्व की जिम्मेदारी सदस्य देशों की होती है. लेकिन महासचिव अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर संगठन की साख बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

Director General of International Atomic Energy Agency (IAEA)

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के महानिदेशक राफेल एम ग्रॉसी
Photo Credit: AFP

महासचिव पद के लिए कौन-कौन हैं दावेदार?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए एस्पिनोसा का मुकाबला पांच अन्य दावेदारों से हैं जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं. इस साल अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो दिनों तक चार अन्य प्रमुख उम्मीदवारों के साथ भी बातचीत की थी. हालांकि अब एक और नया नाम इस लिस्ट से सोमवार को ही जुड़ा है, वो हैं- गुयाना की 52 वर्षीय पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिना रोड्रिग्स. इस रेस में एस्पिनोसा के साथ पहले से चार अन्य उम्मीदवार मौजूद हैं. ये हैं-

1. चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बैचलेट. इन्हें ब्राजील और मैक्सिको का समर्थन हासिल है.
2. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल एम ग्रॉसी. इनके नाम का प्रस्ताव अर्जेंटीना ने दिया है.
3. सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल. इन्हें पूर्वी अफ्रीकी देश बुरुंडी का समर्थन मिला है.
4. कोस्टारिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और अर्थशास्त्री रेबेका ग्रिनस्पैन. इन्हें उनके ही देश ने नामित किया है.

इन सभी उम्मीदवारों का अनुभव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीति और वैश्विक संस्थाओं में रहा है. इसलिए इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है.

UN General Assembly

संयुक्त राष्ट्र संघ
Photo Credit: AFP

महासचिव का चुनाव कैसे होता है?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चयन केवल मतदान से नहीं होता. पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है. सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, चीन, रूस, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस इस इस प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाते हैं क्योंकि उनके पास वीटो शक्ति होती है. इन्हें बिग फाइव के नाम से भी जाना जाता है. सुरक्षा परिषद की सिफारिश के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा अंतिम मंजूरी देती है. इसलिए महासचिव बनने के लिए केवल वैश्विक समर्थन ही नहीं, बल्कि इन बिग फाइव ताकतों की सहमति भी जरूरी होती है.

UN Flag

Photo Credit: AFP

क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई थी. इसका उद्देश्य युद्ध रोकना, शांति बनाए रखना और देशों के बीच सहयोग बढ़ाना था. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े संकटों के दौरान संगठन की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं.

यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों के दौर में संयुक्त राष्ट्र के सामने चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं.

ऐसे में अगले महासचिव को न केवल देशों के बीच संवाद बढ़ाना होगा बल्कि संगठन में सुधार और उसकी साख बहाल करने की चुनौती भी संभालनी होगी.

UN Headquarters at New York

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय
Photo Credit: AFP

भारत के लिए क्या मायने?

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुधार और सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है. इसलिए भारत की नजर भी इस चुनाव पर रहेगी. नया महासचिव विकासशील देशों की आवाज, ग्लोबल साउथ, जलवायु, शांति स्थापना अभियानों और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर किस तरह का रुख अपनाता है, इसका असर भारत सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है.

ऐसे में आने वाले महीनों में उम्मीदवारों के साथ संवाद और अन्य कूटनीतिक गतिविधियां तेज होंगी. इसके बाद सुरक्षा परिषद के भीतर विचार-विमर्श शुरू होगा और फिर दुनिया को संयुक्त राष्ट्र का 10वां महासचिव मिलेगा.

ये भी पढ़ें: महासचिव का चुनाव होगी संयुक्त राष्ट्र की अगली बड़ी परीक्षा, क्या होंगी उम्मीदें

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