बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना हिंसा से बाज नहीं आ रही. बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) केच और पंजगुर में तीन बलूच लोगों की कथित हत्या की कड़ी निंदा की है. संगठन ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और उनसे जुड़े हथियारबंद समूहों पर बलूचों को जबरन गायब करने और बिना अदालत कार्रवाई के हत्याएं करने का आरोप लगाया है. यह जानकारी द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट में दी गई है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 55 साल के खुदा पीर मोहम्मद बलोच, जो हाजी अब्दुल्ला रशीद के बेटे थे और केच जिले के जमूरान इलाके के दंबानी स्याहगेसी गांव के एक जाने-माने किसान थे, उन्हें 2 मई की सुबह फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के जवानों ने कथित तौर पर हिरासत में लिया. BYC के अनुसार, सुबह करीब 4:30 बजे सुरक्षा बलों ने उनके घर पर छापा मारा, परिवार के लोगों के साथ मारपीट की और खुदा पीर मोहम्मद को उनके 25 साल के बेटे अब्दुल्ला बलोच के साथ उठा ले गए. अब्दुल्ला ड्राइवर का काम करते थे.
एक दूसरी घटना में, 26 साल के अयाज बलोच, जो पंजगुर के तास्प इलाके में सरकारी स्कूल में कर्मचारी थे, उन्हें 30 अप्रैल को नोकाबाद में उनके घर के पास गोली मार दी गई. BYC ने इस हमले के लिए कथित “राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड” को जिम्मेदार ठहराया. कमेटी का कहना है कि ये घटनाएं बलूच लोगों के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियान का हिस्सा हैं, जिसमें जबरन गायब करना, गैरकानूनी हिरासत और हिंसा शामिल है. संगठन ने कहा कि महिलाओं तक को निशाना बनाया जा रहा है.
BYC ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से दखल देने और बलूचिस्तान में बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति की जांच करने की मांग की है. संगठन ने यह सवाल भी उठाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले पर चुप क्यों है. BYC ने कहा कि बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन वहां के लोग आज भी दमन, असुरक्षा और राजनीतिक उपेक्षा झेल रहे हैं.
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