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'राजनीति का शौक है तो चुनाव लड़ो, औकात पता चल जाएगी', पाकिस्तानी मौलाना ने मुनीर को ल्यारी से ललकारा

कराची के ल्यारी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना की विदेश और सुरक्षा नीतियों के दोहरेपन को बेनकाब किया.

'राजनीति का शौक है तो चुनाव लड़ो, औकात पता चल जाएगी', पाकिस्तानी मौलाना ने मुनीर को ल्यारी से ललकारा
मौलाना ने पहले कहा था कि अगर भारत मुरीदके और बहावलपुर में अपने दुश्मनों को निशाना बनाता है तो मुनीर को क्यों आपत्ति है.
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पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर को चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी है. पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को सीधा ललकारते हुए फजलुर रहमान ने कहा कि अगर राजनीति करने का इतना ही शौक है, तो वर्दी उतारकर चुनाव के मैदान में उतरें, जनता औकात बता देगी.

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में मौलाना फजलुर रहमान ने सेना की तरफ से नागरिकों से उग्रवाद के खिलाफ हथियार उठाने और सशस्त्र समूह (लश्कर) बनाने की अपील को साफ तौर पर खारिज कर दिया.

'तनख्वाह तुम लेते हो, तो लड़ाई हम क्यों लड़ें?'

कराची के ल्यारी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना ने सीधे सेना की नीयत पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करने की जिम्मेदारी राज्य की संस्थाओं की है, न कि आम नागरिकों की.

उन्होंने कहा, "तुम मुझ पर अपने खून का अहसान क्यों जताते हो? तुम हमारे खून-पसीने की कमाई और टैक्स के पैसों से अपनी तनख्वाहें लेते हो और फिर हमसे कहते हो कि हम लश्कर बनाएं और उग्रवादियों से लड़ें? मैंने सरकार से कोई तनख्वाह नहीं ली है. मैं कोई लश्कर नहीं बनाऊंगा."

उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि आम लोगों को उग्रवादियों के सामने धकेलना देश को तबाही की ओर ले जाएगा. मौलाना ने कहा, "तुम तो चले जाओगे, लेकिन मेरे देश को पीढ़ियों के लिए जाती दुश्मनी, खून-खराबे और लूटपाट के दलदल में धकेल रहे हो."

'वर्दी उतार कर चुनाव लड़ो'

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का नाम लिए बिना उन पर कड़ा प्रहार करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने चुनौती दी कि अगर वे राजनीतिक प्रभाव ही चलाना चाहते हैं, तो खुलकर सामने आएं.

उन्होंने कहा, "अगर तुम्हें राजनीति ही करनी है, तो अपनी वर्दी उतारो और चुनाव में आओ. फिर समझ आ जाएगा कि जनता वर्दी वालों को कितने वोट देती है."

पाकिस्तानी राजनीति में सेना के दखल पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "यह आपका विशेषाधिकार बन चुका है कि जिसे चाहो सरकार सौंप दो और जिससे चाहो छीन लो."

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब आसिम मुनीर ने पाकिस्तानी नागरिकों से अपील की थी कि वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सेना के साथ खड़े हों. मुनीर का कहना था कि जनता के सहयोग के बिना सशस्त्र बल अकेले आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकते. लेकिन मौलाना ने इस अपील को सिरे से नकारते हुए साफ कहा कि आम नागरिकों से कबीलाई या निजी सेनाएं बनवाना आने वाली पीढ़ियों के लिए गृह युद्ध जैसा माहौल तैयार करने जैसा है.

कौन हैं मौलाना फजलुर रहमान?

मौलाना फज़लुर रहमान की जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के पास पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 10 सीटें हैं. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थन वाले 75 निर्दलीय सांसदों के ब्लॉक के बाद, मौलाना की पार्टी संसद में सबसे बड़ी विपक्षी ताकत है. यही वजह है कि उनके इस तीखे और विस्फोटक बयान ने पाकिस्तानी हुकूमत और सैन्य मुख्यालय (GHQ) की नींद उड़ा दी है.

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