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132 साल बाद लाइब्रेरी को वापस की मैगजीन, लगने ही वाली थी 11.5 लाख की पेनाल्टी

अमेरिका के न्यू हैम्पशायर की एक लाइब्रेरी का मामला. यहां 1894 में ली गई एक मैगजीन आखिरकार 132 साल बाद वापस लौटा दी गई. यह सितंबर 1894 की द सेंचुरी इलस्ट्रेटेड की मंथली मैगजीन थी.

132 साल बाद लाइब्रेरी को वापस की मैगजीन, लगने ही वाली थी 11.5 लाख की पेनाल्टी
132 साल बाद लाइब्रेरी में जॉन ने वापस की किताब (फोटो- Concord Public Library/FB)
  • अमेरिका के न्यू हैम्पशायर की कॉनकॉर्ड पब्लिक लाइब्रेरी में 1894 की एक मैगजीन 132 साल बाद वापस लौटी
  • यदि इस मैगजीन पर जुर्माना लगाया जाता तो इसकी रकम 12000 डॉलर यानी करीब 11.5 रुपए होती
  • मैगजीन लौटाने वाले जॉन ने बताया कि यह दशकों से उनके घर में थी और उन्हें पता नहीं था कि यह कब कौन लेकर आया

अगर आप किसी लाइब्रेरी से कोई किताब या कोई मैगजीन लेंगे तो आप कितने दिनों में पढ़कर वापस कर देंगे? हद से हद एक महीना? लेकिन दुनिया में एक ऐसा भी मामला सामने आया है जिसमें हर रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यह मामला अमेरिका का है. अमेरिका के न्यू हैम्पशायर की एक लाइब्रेरी से 1894 में ली गई एक मैगजीन आखिरकार 132 साल बाद वापस लौटा दी गई. यानी मैगजीन लौटाने में 48,220 दिन लेट किया गया है.

बीबीसी की एक रिकॉर्ड के अनुसार कॉनकॉर्ड पब्लिक लाइब्रेरी ने बताया कि सितंबर 1894 की द सेंचुरी इलस्ट्रेटेड मंथली मैगजीन का एक एडिशन पिछले हफ्ते वापस किया गया. वह भी तब दिया गया जब लाइब्रेरी ने ऐलान किया कि किताबें और मैगजीन देर से लौटाने पर लगने वाले जुर्माने को कुछ समय के लिए माफ किया जाता है.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि अगर इस मैगजीन को इतने सालों बाद लौटाने पर अगर जुर्माना लगाया जाता तो इसे 12,055 डॉलर देने पड़ते. भारतीय करेंसी में यह रकम 11.5 लाख रुपए के आसपास बैठती है.

दशकों से घर में पड़ी थी मैगजीन

इस रिपोर्ट के अनुसार मैगजीन लौटाने वाले शख्स ने अपना नाम जॉन बताया है. उन्होंने कहा कि यह मैगजीन कई दशकों से उनके घर में पड़ी थी. हालांकि, उन्हें यह पता नहीं था कि आखिर यह उनके घर तक पहुंची कैसे. फिर जॉन ने स्थानीय अखबार में लाइब्रेरी की ओर से जुर्माना माफ करने की खबर पढ़ी. इसके बाद उन्होंने मैगजीन वापस करने का फैसला किया.

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कॉनकॉर्ड पब्लिक लाइब्रेरी ने फेसबुक पर लिखा, "जुर्माना माफ करने का ऐलान करने के बाद से हमने कई खुश चेहरे देखे हैं. हमें उम्मीद थी कि बहुत लंबे समय से लोगों के पास पड़ी किताबें वापस आएंगी, लेकिन 19वीं सदी के आखिर की कोई चीज वापस आएगी, इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी!"

एक साल तक नहीं लगेगा लेट फीस

बीबीसी की इस रिपोर्ट के अनुसार कॉनकॉर्ड पब्लिक लाइब्रेरी ने 1 सितंबर 2026 से देर से किताबें लौटाने पर लगने वाले जुर्माने के लिए एक साल की छूट शुरू की है. इस मुहीम के जरिए लाइब्रेरी यह देखने की कोशिश कर कि किताबों को देर से लौटाने पर किसी तरह का जुर्माने नहीं लगाने वाली लाइब्रेरी का क्या असर होता है.

अब इस मैगजीन का क्या होगा?

सोशल मीडिया पर लाइब्रेरी ने कहा कि यह मैगजीन अब दोबारा लोगों को पढ़ने के लिए नहीं दी जाएगी. संभवतः इसे कॉनकॉर्ड रूम में जगह मिल सकती है. यह लाइब्रेरी का वह हिस्सा है, जो स्थानीय इतिहास से जुड़ी चीजों के लिए बनाया गया है.

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