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अली खामेनेई की अंतिम विदाई पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ने लिया बदला लेने का संकल्प

मोजतबा खामेनेई की बातों से साफ है कि ईरान ने मन बना लिया है कि वो बदला लेगा. मगर कैसे? क्या वो अमेरिका से समझौते की जगह युद्ध लड़ेगा या समझौते के कुछ सालों बाद फिर से युद्ध छेडे़गा?

अली खामेनेई की अंतिम विदाई पर ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ने लिया बदला लेने का संकल्प
मोजतबा खामेनेई ने साफ किया है कि वो अपने पिता की मौत का बदला लेंगे.
  • मोजतबा ने ट्वीट्स में इमाम हुसैन के आदर्शों और इस्लामी क्रांति के हुसैनी सिद्धांतों पर जोर दिया
  • उन्होंने कहा कि ईरान की जनता हुसैन के रास्ते पर चलते हुए अपने शहीदों के खून का बदला लेना चाहती है
  • मोजतबा ने अमेरिका और अन्य दुश्मनों से बदला लेने का संकल्प व्यक्त किया, लेकिन युद्ध की रणनीति स्पष्ट नहीं की

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए आज प्रार्थना सभा का आयोजन किया. पिता के अंतिम संस्कार की तरह मोजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से प्रार्थना सभा में भी शामिल नहीं हुए. मगर इस मौके पर उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट कर सोशल मीडिया से लेकर पूरी दुनिया को चौंका दिया. मोजतबा लगभग एक घंटे तक लगातार ट्वीट करते रहे. इस दौरान उन्होंने अपने दिल की बात पूरी दुनिया को बता दी.

आज सबसे पहला ट्वीट हुआ, 'दुनिया भर के सत्य का रास्ता ढूंढने वालों के नेता शहीद इमाम सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और दफन के बाद इमाम सैयद मोजतबा खामेनेई का महत्वपूर्ण संदेश.'

फिर दूसरा संदेश आया, 'इमाम हुसैन की शांति के लिए दुआ; वे इमाम जिनके विद्रोह की जीवन-दायिनी पुकार ने पैगंबर के मिशन [बिअत] की जबरदस्त और गूंजती हुई आवाज को इतिहास की गहराइयों तक पहुंचाया और अंततः ईरान में इस्लामी क्रांति को जन्म दिया.'

अली खामेनेई को बताया हुसैन जैसा

तीसरे और आगे के संदेश में मोजतबा के एक्स अकाउंट ले लिखा गया, 'ईरान की इस्लामी क्रांति मूल रूप से हुसैनी थी, जो इमाम हुसैन (अ.स.) के नारों और सिद्धांतों पर बनी और फली-फूली थी. ईरान के शहीद नेता का विकास भी इन्हीं सिद्धांतों के साये में हुआ था. शहीद खामेनेई का चरित्र हुसैनी था; वे हुसैन (अ.स.) की तरह सोचते थे. शहीद खामेनेई ने हुसैन जैसा आचरण किया और इमाम हुसैन (अ.स.) की तरह ही जिहाद और प्रतिरोध में भाग लिया. शहीद खामेनेई ने इमाम हुसैन (अ.स.) के आदर्शों के अनुसार जीवन व्यतीत किया. शहीद खामेनेई ने हुसैनी विचारधारा के रास्ते पर अपना खून बहाकर शहादत हासिल की.'

'हमारा देश हुसैन के खून का बदला चाहता है'

मोजतबा ने आगे लिखा, 'हुसैन के मानने वालों में ऐसे लोग भी हैं जिनका खून, जब उनके रास्ते और उनके विचारों व आदर्शों के लिए अन्यायपूर्ण तरीके से बहाया जाता है, तो वह मुस्लिम समुदाय को कार्रवाई के लिए प्रेरित करता है; ताकि उनका समय आशूरा से और उनका स्थान कर्बला से जुड़ जाए. यह जीवन देने वाली वह पुकार है जो इमाम हुसैन की बेगुनाही और उनकी इस आवाज – "क्या मेरी मदद के लिए कोई है?" – को दोहराती है; यह एक ऐसी गूंज है जो पूरे ईरान और उसके बाद इराक व अन्य देशों में फैलती है और झूठ की नींव को हिलाकर रख देती है. शहीद नेता के अपराधी और शर्मनाक हत्यारे—जिनके नाम सबसे ऊंचे से लेकर सबसे निचले ओहदे तक पूरी तरह दर्ज हैं—बिस्तर पर शांति से मरने का अपना सपना कब्र तक ही ले जाएंगे. मैं #Iran और #Iraq में, खासकर #Tehran, #Qom, #Najaf, #Karbala और #Mashhad में, करोड़ों लोगों की उस ज़बरदस्त, दुश्मनों को पस्त करने वाली और ऐतिहासिक भीड़ के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं. हमारा देश हुसैन (अ.स.) के खून का बदला लेना चाहता है.'

'सभी शहीदों के खून का बदला लेंगे'

ईरान के सुप्रीम लीडर ने आगे लिखा, 'सालों से, ईरान की जनता ने हुसैन के रास्ते पर चलते हुए और हुसैन व उनके रास्ते के दुश्मनों से लड़ते हुए अपने बच्चों की कुर्बानी दी है; और आज वह उनके खून का, और हमारे दौर में हुसैन जैसे लोगों के खून का बदला लेना चाहती है. हमारे शहीद नेता के नाम: हे अन्यायपूर्ण ढंग से मारे गए नेता! हे ईश्वर के नेक सेवक! हम आपकी विरासत की रक्षा करने, आपके दिखाए सीधे रास्ते पर अडिग रहने, रास्ते की किसी भी मुश्किल से न डरने और अल्लाह के वादों व शुभ संदेशों से अपने दिल को जोड़े रखने का संकल्प लेते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आपने किया था. हम उन अपराधी और शर्मनाक हत्यारों से बदला लेकर आपके पवित्र खून और इन दो [हालिया] युद्धों के सभी शहीदों के खून का बदला लेने का संकल्प लेते हैं. हमारा देश इसी बदले की मांग कर रहा है, और यह निश्चित रूप से किया जाना चाहिए.'

क्या जारी रहेगा अमेरिका-ईरान युद्ध?

मोजतबा खामेनेई की बातों से साफ है कि ईरान ने मन बना लिया है कि वो बदला लेगा. मगर कैसे? क्या वो अमेरिका से समझौते की जगह युद्ध लड़ेगा या समझौते के कुछ सालों बाद फिर से युद्ध छेडे़गा? अभी तक ये बात साफ नहीं हो पाई है. हालांकि, अभी जब ट्रंप नाटो की बैठक के लिए तुर्की गए तो उन्होंने अपनी सुरक्षा का खास ख्याल रखा. उन्होंने खुद भी माना कि वो ईरान के किल लिस्ट में टॉप पर हैं. तो क्या ईरान ट्रंप और नेतन्याहू को सीधे युद्ध की जगह किसी खुफिया ऑपरेशन के तहत टारगेट करना चाहता है. इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे. मगर इतना तय है कि मिडिल ईस्ट में लगी आग अभी बरसों तक सुलगती रहेगी.

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