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अमेरिकी पायलट ने मदद के लिए कहे थे ये तीन शब्द, सुनते ही पेंटागन और CIA का चकरा गया था सिर; जानें पूरी कहानी

उच्च पहाड़ों में छिपे वेपन्स ऑफिसर को CIA की मदद से ट्रैक कर अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने सुरक्षित निकाला. ट्रंप ने बचाव मिशन को ऐतिहासिक बताया, दोनों पायलट सुरक्षित लौटे और कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ.

अमेरिकी पायलट ने मदद के लिए कहे थे ये तीन शब्द, सुनते ही पेंटागन और CIA का चकरा गया था सिर; जानें पूरी कहानी
  • अमेरिकी वेपन ऑफिसर ने ईरान में गिराए गए विमान के बाद रेडियो पर 'ईश्वर महान हैं' का संदेश भेजा था
  • वेपन्स सिस्टम ऑफिसर पहाड़ों में छिपकर अपनी जान बचाते हुए सात हजार फीट ऊंची चोटी तक पहुंच गया था
  • सीआईए ने अपनी विशेष क्षमताओं से उसकी लोकेशन ट्रैक कर व्हाइट हाउस और पेंटागन को बताया था.
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ईरान के आसमान में जब अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया गया तो किसी ने नहीं सोचा था कि पहाड़ों में छिपे एक एयरमैन का महज तीन शब्दों का संदेश वॉशिंगटन में हड़कंप मचा देगा. दुश्मन की सरजमीं पर मौत से जूझ रहे इस अमेरिकी वेपन ऑफिसर ने जब रेडियो पर अपना पहला संदेश भेजा तब अमेरिकी प्रशासन एक पल के लिए ठिठक गया. उसे लगा कि कहीं यह ईरान का बिछाया हुआ कोई जाल तो नहीं?

ईरान के दक्षिण-पश्चिमी पहाड़ों से आए इस संदेश ने सबको हैरान कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप ने 'एक्सियोस' को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि जब वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ने रेडियो पर संपर्क किया, तो उसने कुछ ऐसा कहा जो बेहद असामान्य था. ट्रंप के अनुसार, उस अधिकारी ने कहा, "Power be to God" (ईश्वर की जय हो).

ट्रंप ने बताया कि शुरुआत में यह सुनकर अधिकारी चौंक गए थे क्योंकि उन्हें लगा कि यह किसी मुस्लिम व्यक्ति का संबोधन हो सकता है. हालांकि, बाद में अधिकारी के करीबियों ने साफ किया कि वह काफी धार्मिक व्यक्ति है और संकट की घड़ी में ऐसा कहना उसके स्वभाव का हिस्सा था. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी पुष्टि की कि एयरमैन के असली शब्द "God is good" (ईश्वर महान हैं) थे.

 7,000 फीट की ऊंचाई पर लुका-छिपी

विमान गिरने के बाद पायलट को तो तुरंत बचा लिया गया था, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर लापता था. उसके पास केवल एक रेडियो, एक ट्रैकिंग बीकन और एक हैंडगन थी. एक तरफ ईरानी सेना उसे ढूंढ रही थी, तो दूसरी तरफ अमेरिकी रेस्क्यू फोर्स उसकी लोकेशन ट्रेस करने में जुटा था. वह एयरमैन पहाड़ियों की दरारों में छिपकर और लगातार अपनी जगह बदलकर अपनी जान बचाता रहा.

ईरानी सेना से एक कदम आगे रहने के लिए वेपन ऑफिसर 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी तक चढ़ गया. करीब 24 घंटों तक अमेरिका को भी उसकी सटीक लोकेशन का पता नहीं था.

आखिरकार, सीआईए (CIA) ने अपनी 'विशेष क्षमताओं' का इस्तेमाल करते हुए उसे ट्रैक किया और उसकी लोकेशन व्हाइट हाउस और पेंटागन के साथ शेयर की.

दुश्मन के इलाके में जाकर किया ऐतिहासिक रेस्क्यू ऑपरेशन

शनिवार की रात को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज की एक टीम को ईरानी सीमा के भीतर उतारा गया. ट्रंप ने इस मिशन को ऐतिहासिक बताते हुए 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि यह सैन्य इतिहास में पहली बार था जब दो अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके के काफी भीतर से अलग-अलग ऑपरेशनों में सुरक्षित निकाला गया.

इस पूरे बचाव कार्य के दौरान अमेरिकी टीम का कोई भी सदस्य हताहत नहीं हुआ. हालांकि एयरमैन को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वह अब खतरे से बाहर है. ट्रंप ने उसे 'बहादुर योद्धा' बताते हुए कहा कि वह जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा.

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