
भारत ने आज रणनीतिक रूप से अहम वियतनाम के साथ तेल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और रक्षा संबंधों को मजबूत करने का निर्णय किया। वहीं वियतनाम ने विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में नौवहन की आजादी और सुरक्षा को बनाये रखने में भारत की और सक्रिय भूमिका का आह्वान किया।
विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज ने वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व को विभिन्न क्षेत्रों खासकर तेल क्षेत्र एवं रक्षा तथा व्यापार क्षेत्र में संबंधों को मजबूत बनाने की भारत की इच्छा से अवगत कराया। हालांकि इस कदम से चीन की नाराजगी बढ़ सकती है, जो सार्वजनिक रूप से भारत को संसाधन से भरपूर दक्षिण चीन सागर से अलग रहने को कहता आ रहा है।
वहीं भारत वियतनाम द्वारा पेशकश किए गए पांच नए ब्लॉक में इस बात का आकलन कर रहा है कि तेल की खोज कहां की जाए।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरद्दीन ने कहा, 'विदेश मंत्री ने उल्लेख किया है कि भारत वियतनाम के साथ पहले से ही मिलकर काम कर रहा है और (तेल क्षेत्र में) उसके साथ सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा वह इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है।'
उन्होंने कहा कि वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव नगुयेन फू थ्रांग की पिछले नवंबर में भारत यात्रा के दौरान वियतनाम की भारत को पांच तेल क्षेत्रों की जो पेशकश की गई थी, उस पर भी 'संक्षिप्त' रूप से विचार विमर्श किया गया।
वियतनाम ने कहा कि यह 21वीं सदी में मजबूत आसियान-भारत रणनीति सहयोग के निर्माण का समय है। वियतनाम के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री फाम बिन्ह मिन्ह ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इसी महीने म्यांमार में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कहा, 'भारत की रणनीतिक भागीदारी को इस बात से बल मिलता है कि आपकी पूर्व को देखो नीति और हमारी आसियान से बाहर की ओर देखने की नीति से मेल खाती है।'
उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ (आसियान) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत की पूर्व को देखो व 10 सदस्यीय आसियान समूह के साथ सहयोग बढाने की नीति की फिर से पुष्टि करने का स्वागत करता है।
गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर को लेकर बने गतिरोध के कारण चीन और वियतनाम के बीच रिश्ते कटुतापूर्ण हैं। दक्षिण चीन सागर हाइड्रोकार्बन का बड़ा स्रोत है।
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