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भारत और फ्रांस की जोड़ी से अब बनेगी बात, आत्मनिर्भर बनने के लिए बनाया ठोस प्लान; चीन को झटका

फ्रांस की तरफ से रणनीतिक खनिज और धातु आपूर्ति के अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधि बेंजामिन गैलेज़ोट शामिल हुए, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व खान मंत्रालय में राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के संयुक्त सचिव कदम संदीप वसंत ने किया.

भारत और फ्रांस की जोड़ी से अब बनेगी बात, आत्मनिर्भर बनने के लिए बनाया ठोस प्लान; चीन को झटका
भारत अपनी क्लीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं के लिए लगातार कई देशों के साथ खनिज समझौते कर रहा है.
AFP

भारत और फ्रांस ने अब क्रिटिकल मिनरल्स की रेस में हाथ मिला लिया है. चीन के वैश्विक दबदबे को चुनौती देने और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए दोनों देशों ने नई दिल्ली में 'क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत-फ्रांस ज्वाइंट वर्किंग कमेटी'की पहली बैठक की है.

यह इसलिए बेहद अहम है क्योंकि बैटरियों, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सेमीकंडक्टर और रक्षा उपकरणों के लिए जरूरी लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर इस वक्त पूरी दुनिया में भू-राजनीतिक खींचतान मची हुई है.

तीसरे देशों में भी मिलकर काम करेंगे भारत-फ्रांस

फ्रांसीसी दूतावास की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, इस बैठक का मुख्य मकसद केवल अपने-अपने देशों तक सीमित रहना नहीं है. दोनों देशों ने रणनीतिक संसाधनों की खोज, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.

वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग को देखते हुए एक सुरक्षित और डाइवर्सिफाइड (विविध) सप्लाई चेन बनाना दोनों का लक्ष्य है. बैठक में दोनों पक्षों ने उन क्षेत्रों की पहचान की जहां वे न केवल भारत और फ्रांस में बल्कि दुनिया के उन तीसरे देशों में भी मिलकर काम कर सकते हैं जहां भारी मात्रा में खनिज भंडार मौजूद हैं.

इस बैठक में फ्रांस के भूवैज्ञानिक और खनन अनुसंधान ब्यूरो (BRGM) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के विशेषज्ञ भी शामिल हुए. दोनों एजेंसियों ने खनिज की खोज, संसाधन मैपिंग, निष्कर्षण से लेकर रीसाइक्लिंग तक की पूरी 'वैल्यू चेन' को मजबूत करने के लिए आपसी वैज्ञानिक सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई.

अपनी दो दिवसीय दिल्ली यात्रा के दौरान, फ्रांसीसी प्रतिनिधि बेंजामिन गैलेजोट ने भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर से भी मुलाकात की. इस मुलाकात में क्रिटिकल मिनरल सुरक्षा के रणनीतिक और सुरक्षा पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई.

इसके अलावा, उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक सत्र में भारतीय उद्योगपतियों से बातचीत कर दोनों देशों के बिजनेस सेक्टर के बीच कमर्शियल और टेक्नोलॉजिकल सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया.

इस ज्वाइंट वर्किंग कमेटी की नींव इसी साल फरवरी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान रखी गई थी. तब दोनों देशों के बीच 'क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग के लिए संयुक्त घोषणा पत्र' पर हस्ताक्षर किए गए थे. उसी का नतीजा है कि आज दोनों देश लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और ग्रेफाइट जैसे बेहद जरूरी खनिजों के मामले में चीन या किसी अन्य देश पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.

दोनों देशों का अपना-अपना मिशन

भारत ने घरेलू स्तर पर खोज को बढ़ावा देने, विदेशी खनिज साझेदारियां करने और प्रोसेसिंग क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 'राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन' शुरू किया है. 

भारत अपनी क्लीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं के लिए लगातार कई देशों के साथ खनिज समझौते कर रहा है. फ्रांस ने अपनी औद्योगिक मजबूती और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए दिसंबर 2022 में ही एक विशेष अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल का गठन किया था. ये सरकार के स्तर पर रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करता है.

बदलते दौर की नई दोस्ती

भारत और फ्रांस के संबंध हमेशा से रक्षा और नागरिक परमाणु सहयोग पर टिके रहे हैं, लेकिन अब यह साझेदारी उभरती हुई तकनीकों, एनर्जी ट्रांजिशन और सप्लाई चेन सिक्योरिटी जैसे नए और आधुनिक क्षेत्रों में पैर पसार चुकी है.

वैश्विक स्तर पर खनिजों को लेकर मची होड़ के बीच, यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में दोनों देशों की आर्थिक और औद्योगिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित करने में गेमचेंजर साबित होगी.

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