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ईरान नहीं झुका तो मेरे पास ट्रंप कार्ड... वार्ता विफल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का पोस्ट

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली पोस्ट आ गई है. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक न्यूज वेबसाइट की लिंक शेयर की है, जिसमें लिखा है कि अगर ईरान नहीं झुका तो उनके पास ट्रंप कार्ड है.

ईरान नहीं झुका तो मेरे पास ट्रंप कार्ड... वार्ता विफल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का पोस्ट
  • ट्रंप ने इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका बातचीत विफल होने के बाद नाकाबंदी की रणनीति अपनाने की संभावना जताई है
  • ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था को दबाने के लिए नेवल ब्लॉकेड का संकेत दिया है
  • यूएसएस जेराल्ड फोर्ड कैरियर फारस की खाड़ी में पहुंच गया है और अमेरिका होर्मुज पर कड़ी निगरानी कर सकती है
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इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के साथ बातचीत फेल होने के बाद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान आ गया है. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान नहीं झुकता है तो उनके पास ट्रंप कार्ड है. ट्रंप ने एक न्यूज वेबसाइट की लिंक शेयर की है, जिसमें उनका ट्रंप कार्ड 'नेवल ब्लॉकेड' को बताया गया है. इसमें कहा गया है कि जिस तरह से ट्रंप ने वेनेजुएला में नाकाबंदी कर उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया था, वैसा ही ईरान के साथ भी कर सकते हैं.

ट्रंप ने यह पोस्ट तब शेयर की है, जब इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका की बातचीत फेल हो गई है. इससे माना जा रहा है कि ट्रंप अब ईरान की 'नाकाबंदी' कर सकते हैं और उस पर समझौते के लिए दबाव बना सकते हैं.

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ईरान की नाकाबंदी कर देंगे ट्रंप?

ट्रंप ने जो खबर शेयर की है, उसके मुताबिक ईरान के साथ डील नहीं होने पर ट्रंप अपनी 'ब्लॉकेड स्ट्रेटजी' यानी 'नाकेबंदी की रणनीति' को अपना सकते हैं, ताकि पहले से ही लड़खड़ा रही ईरानी अर्थव्यवस्था का दम घोंटा जा सके. साथ ही चीन और भारत के लिए तेल के अहम रास्ते को काटकर उन पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाया जा सके. 

इसमें कहा गया है कि अमेरिका का जंगी जहाज यूएसएस जेराल्ड फोर्ड कैरियर फारस की खाड़ी में पहुंच गया है और अब यह यूएसएस अब्राहम लिंकन और नेवी के दूसरे बड़े जहाजों के साथ शामिल हो गया है. यूएसएस जेराल्ड फोर्ड कैरियर की मदद से ही अमेरिका ने वेनेजुएला की नाकाबंदी की थी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप आसानी से होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पकड़ को नाकेबंदी के जरिए कमजोर कर सकते हैं.

लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट की राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रेबेका ग्रांट ने कहा कि 'अगर ईरान अड़ियल रवैया अपनाता है, तो यकीनन अमेरिकी नौसेना पानी के ऊपर जबरदस्त निगरानी का इंतजाम कर सकती है और उस स्ट्रेट से अंदर-बाहर जाने वाली हर चीज पर नजर रख सकती है. अगर आप खार्ग द्वीप या होर्मुज से गुजरना चाहते हैं, तो आपको अमेरिकी नौसेना से इजाजत लेनी होगी.'

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और क्या-क्या कर सकते हैं ट्रंप?

इस्लामाबाद में पीस टॉक शुरू होने से पहले भी ट्रंप ने कहा था कि जहाजों में हथियार भरे जा रहे हैं. दो हफ्तों का सीजफायर भी कुछ ही दिन में खत्म हो जाएगा. ऐसे में ट्रंप सरकार ने पहले से ही कई विकल्प तैयार कर लिए हैं. 

अमेरिका के रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने न्यूयॉर्क पोस्ट के एक कॉलम में लिखा था, 'अगर युद्ध फिर से शुरू होता और हम ईरान की बची हुई संपत्तियों को काफी हद तक कमजोर कर देते हैं तो अमेरिकी सेना खार्ग पर कब्जा करने या उसे तबाह करने का विकल्प चुन सकती है. इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना नाकेबंदी कर सकती है, जिससे तेहरान की एक्सपरोर्ट लाइफलाइन बंद हो जाएगी.'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर हम खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लेते हैं तो इससे ईरान के तेल और उसकी अर्थव्यवस्था पर हमारी पूरी पकड़ हो जाएगी. यही वह सबसे बड़ा दबाव होगा जिसकी हमें उसके परमाणु भंडार को जब्त करने और उसकी एनरिचमेंट फैसेलिटी को खत्म करने के लिए जरूरत होगी.'

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