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अमेरिकी सैनिकों को मोबाइल डेटा से ट्रैक कर रहे दुश्मन, बना रहे टारगेट

अमेरिका अब खुद के जाल में ही फंसने लगा है. कभी तकनीक के दम पर ही अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश बना और अब यही तकनीक कई बार उसके लिए ही खतरा बन जा रही है.

अमेरिकी सैनिकों को मोबाइल डेटा से ट्रैक कर रहे दुश्मन, बना रहे टारगेट
अमेरिकी सैनिकों की लोकेशन लीक होने की रिपोर्ट आई है.
  • यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि युद्ध क्षेत्रों में अमेरिकी सैनिकों को लोकेशन डेटा के जरिए ट्रैक किया जा रहा है
  • लोकेशन डेटा आमतौर पर स्मार्टफोन से एकत्र होकर डेटा दलालों को बेचा जाता है, जो इसे पुनः विक्रय करते हैं
  • गूगल ने कहा कि Chrome ब्राउजर में सुरक्षा सबसे ज्यादा है, जबकि सांसद इसे सैनिकों के खिलाफ हथियार मानते हैं
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यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने खुलासा किया है कि सक्रिय युद्ध क्षेत्रों में तैनात अमेरिकी सैनिकों को कमर्शियल लोकेशन डेटा के जरिए ट्रैक और टारगेट किया जा रहा है. मिडिल ईस्ट और फारस की खाड़ी में तैनात सैनिकों को इस तरह से सर्विलांस और टारगेट किए जाने के कई खतरे सामने आए हैं. अमेरिकी सांसदों ने पेंटागन को चेतावनी दी है कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए विज्ञापन तकनीक उद्योग को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के रूप में देखा जाना चाहिए.

अमेरिकी सांसदों ने क्या कहा? 

ओरेगन के डेमोक्रेट अमेरिकी सीनेटर रॉन वायडेन की तरफ से रॉयटर्स को शेयर किए गए एक पत्र में, अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा कि उसे "युद्ध क्षेत्र में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने या उनकी निगरानी करने के लिए शत्रु की तरफ से कॉमर्शियल लोकेशन डेटा के दुरुपयोग से संबंधित कई खतरे की रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं." 14 अप्रैल को भेजे गए इस संदेश में कोई और विशिष्ट जानकारी नहीं दी गई, लेकिन सेंटकॉम के उत्तरदायित्व क्षेत्र में खाड़ी क्षेत्र शामिल है, जहां अमेरिकी सेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी सेना का सामना कर रही हैं.

एडटेक इंडस्ट्री बन रही खतरा

वायडेन और द्विदलीय सांसदों के एक ग्रुप ने गुरुवार को पेंटागन को भेजे गए एक पत्र में कहा कि यह खुलासा पहली आधिकारिक पुष्टि थी कि अमेरिकी सेना को एक सक्रिय युद्ध क्षेत्र में निशाना बनाया गया था. पत्र में चेतावनी दी गई है, "कॉमर्शियल लोकेशन डेटा का उपयोग अमेरिकी सैनिकों के इकट्ठा होने के लोकेशनों और उनकी जीवनशैली की पहचान करने के लिए किया जा सकता है, जिसका फायदा दुश्मन मिसाइलों, ड्रोन और सड़क किनारे बम जैसे हमलों से टारगेट करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भी उठा सकते हैं." वायडेन ने एक बयान में कहा कि अब समय आ गया है कि "विज्ञापन प्रौद्योगिकी उद्योग (Adtech Industry) को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानना ​​शुरू किया जाए."

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पेंटागन ने टिप्पणी के लिए भेजे गए संदेशों का जवाब नहीं दिया. सांसदों ने अपने पत्र में कहा कि कथित टारगेट के बारे में सैन्य अधिकारियों से अधिक जानकारी प्राप्त करने के उनके प्रयास असफल रहे.

लोकेशन डेटा बेच देती हैं कंपनियां

लोकेशन डेटा का व्यापक रूप से डिजिटल विज्ञापन में उपयोग किया जाता है, जो कई तकनीकी कंपनियों के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है. इस प्रकार का डेटा आमतौर पर स्मार्टफोन या अन्य उपकरणों से ऐप्स या सेवा प्रोवाइडर्स की तरफ एकत्र किया जाता है. फिर डेटा दलालों को बेच दिया जाता है, जो डेटा को संकलित और री-सेल करते हैं, कभी-कभी मध्यस्थों के जटिल नेटवर्क के माध्यम से.

हालांकि, लोगों की दैनिक गतिविधियों के विवरण को खुले बाजार में बेचने से उत्पन्न गोपनीयता के खतरे पर लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा होती रही है, लेकिन हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके संभावित खतरे को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं.

2016 में अमेरिका का लीक हुआ थे डेटा

वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा पहली बार प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में ही एक अमेरिकी रक्षा ठेकेदार कॉमर्शियल रूप से उपलब्ध लोकेशन डेटा का उपयोग करके अमेरिका में स्थित विशेष अभियान बलों के ठिकानों से सीरिया में एक संवेदनशील सैन्य चौकी तक उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम था. हाल ही में, वायर्ड और दो जर्मन समाचार आउटलेट्स के पत्रकारों ने एक डेटा ब्रोकर द्वारा एकत्र किए गए अरबों निर्देशांकों का उपयोग करते हुए जर्मनी में स्थित 11 अमेरिकी सैन्य और खुफिया ठिकानों पर तैनात लोगों की गतिविधियों का विस्तृत खुलासा किया.

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Photo Credit: Reuters

डिजिटल विज्ञापनदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले दो समूहों, इंटरएक्टिव एडवरटाइजिंग ब्यूरो और एसोसिएशन ऑफ नेशनल एडवरटाइजर्स ने टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया.

अमेरिकी सांसदों ने पेंटागन को लिखे पत्र में कहा कि सैन्य अधिकारियों को लोकेशन डेटा के व्यापार के बारे में जो जानकारी है, उसे देखते हुए उन्हें अपने कर्मियों की सुरक्षा के लिए तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए थी. उदाहरण के लिए सैन्य उपकरणों से जुड़ी विशिष्ट विज्ञापन आईडी को निष्क्रिय करना, फील्ड में तैनात स्मार्टफोन पर लोकेशन शेयरिंग को ऑटोमेटिक तरीके से बंद करना और कर्मचारियों को Google के Chrome वेब ब्राउजर से हटाकर अधिक गोपनीयता-केंद्रित विकल्पों की ओर निर्देशित करना.

गूगल का जवाब

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक उत्तरी कैरोलिना के रिपब्लिकन सांसद पैट हैरिगन भी थे, जो पूर्व में अमेरिकी सेना के विशेष बल अधिकारी रह चुके हैं. हैरिगन ने कहा कि Chrome जैसे ब्राउजर "यूजर का डेटा एकत्र करने और शेयर करने के लिए ही बनाए गए हैं" और हर दिन जब तक ये सरकारी उपकरणों पर मौजूद रहते हैं, "हम अपने दुश्मनों को अपने ही सैनिकों के खिलाफ एक हथियार सौंप रहे हैं." अल्फाबेट की Google ने एक बयान में कहा कि Chrome में "सबसे ज्यादा सुरक्षा" है. कंपनी ने आगे कहा कि वह "डेटा दलालों के खिलाफ मजबूत नियमों और सुरक्षा उपायों की लंबे समय से वकालत करती रही है."

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