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ट्रंप डील को बेताब, पुतिन को भी Indo-US रिश्तों से नहीं दिक्कत, दोनों क्यों चाहते मोदी से दोस्ती?

अमेरिका और रूस, दोनों महाशक्तियों के कुछ ही घंटे के अंदर भारत को लेकर बयान दिया है. व्लादिमीर पुतिन खुलकर भारत के पक्ष में बैटिंग करते नजर आए तो डोनाल्ड ट्रंप का अपना ही अंदाज दिखा.

ट्रंप डील को बेताब, पुतिन को भी Indo-US रिश्तों से नहीं दिक्कत, दोनों क्यों चाहते मोदी से दोस्ती?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक साथ भारत पर बयान दिया है (फोटो- NDTV इमेज)
  • पुतिन ने कहा कि अमेरिका कुछ मामलों में भारत पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा और यह इंटरनेशनल संबधों के लिए गलत है
  • डोनाल्ड ट्रंप ने PM मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताया, कहा अमेरिका- भारत के बीच जल्द ही व्यापार समझौता हो सकता है
  • एक ही साथ आए दोनों बयानों में छिपा मैसेज- दोनों के लिए भारत को साथ लेकर चलना जरूरी

कुछ ही घंटे के गैप में दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्ति भारत को लेकर बयान देती है. बयान में संकेत था, बड़ा मैसेज था... मैसेज यह कि भारत की दोस्ती वाली लिस्ट में बने रहे. यहां बात हो रही है रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की. पुतिन खुलकर भारत की कूटनीतिक शक्ति के लिए बैटिंग करते दिखे तो वहीं ट्रंप अपने चिर-परिचित अंदाज में अपनी सरकार की तारीफ करते हुए पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते दिखे, भारत के साथ जल्द से जल्द व्यापार समझौते की उम्मीद जताते दिखे. चलिए आपको बताते हैं कि दोनों नेताओं ने भारत को लेकर क्या कहा है और इससे क्या मैसेज निकल रहा.

व्लादिमीर पुतिन क्या बोले?

रूस के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और रूस के बीच एक बहुत खास और मजबूत रणनीतिक साझेदारी है. उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग इकनॉमिक फोरम में गुरुवार को कहा कि रूस भारत के साथ अपने संबंध लगातार बढ़ा रहा है और आगे भी बढ़ाता रहेगा. उन्होंने भारत को एक बहुत भरोसेमंद साथी बताया. पुतिन ने भारत-रूस की मजबूत दोस्ती पर मुहर लगाते हुए अमेरिका पर निशाना साधा.

पुतिन ने कहा कि अमेरिका कुछ मामलों में भारत पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है, जैसे रूस के साथ सहयोग करने के मुद्दे पर. लेकिन उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना सही नहीं है, क्योंकि भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है. अगर भारत पर दबाव डाला गया तो इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों को नुकसान होता है.

पुतिन ने यहां दोनों देशों की दोस्ती के कसीदे पढ़ें. उन्होंने कहा कि 1947 में जब सोवियत संघ ने भारत से राजनयिक संबंध बनाए थे, तब से रूस भारत के नए और आजाद देश के निर्माण में सहयोग करता रहा है. उन्होंने कहा कि भारत ने अपने लोगों की मेहनत और प्रतिभा से बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं और वह इससे खुश हैं.

उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के रिश्तों का रूस-भारत रिश्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता. पुतिन ने कहा कि वह खुश हैं कि भारत सभी देशों के साथ अपने संबंध बढ़ा रहा है. उन्होंने भारत को एक महान देश बताया, जिसकी आबादी 1.5 अरब है, एक बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि भारत अपने हितों के अनुसार उन देशों के साथ संबंध बढ़ाए जिन्हें वह जरूरी समझता है. पुतिन यहां भारत की आजाद विदेश नीति की तारीफ कर रहे थे.

ट्रंप ने क्या कहा?

अब आते हैं ट्रंप पर. ट्रंप का अंदाज थोड़ा अलग है. जब वे किसी दूसरे की तारीफ भी करते हैं तो उसमें अपनी खुद की तारीफ जुड़ी होती है. उन्होंने भारत और टैरिफ के मुद्दे पर अपना पुराना राग छेड़ा भी तो उसमें अलग से पीएम मोदी के साथ अपनी केमिस्ट्री को दोहराना नहीं भूले. डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना "अच्छा दोस्त" बताते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही व्यापार समझौता हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि भारत की टैरिफ व्यवस्था की लंबे समय से आलोचना करने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता आगे बढ़ रही है. ट्रंप ने कहा, "हम समझौता कर लेंगे, क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं. वह मेरे अच्छे दोस्त हैं. हमारी आपस में बहुत अच्छी बनती है और हम एक समझौता करेंगे. हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं."

पुतिन और ट्रंप के बयानों में क्या मैसेज छिपा है?

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रमुख विशेषज्ञ हर्ष पंत का कहना है कि अमेरिका और रूस, दोनों भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, “अमेरिका को पता है कि अगर उसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पावर बैलेंस बनाना है तो वह भारत के बिना नहीं कर पाएगा. इसीलिए अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी सिंगापुर में भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और संतुलन का एक महत्वपूर्ण आधार बताया था. भारत अमेरिका के लिए एक ऐसा पार्टनर है जिसके साथ बिना किसी संधि के भी अमेरिका की वर्ल्डव्यू के मोर्चे पर सोच मिलती है. अमेरिका भारत को नाराज नहीं कर सकता."

उन्होंने ट्रंप के व्यापार वाले मुद्दे पर भारत की आलोचना पर कहा कि यह ट्रंप की अपनी राजनीतिक मजबूरी है. इसका भारत-अमेरिका संबंध पर असर नहीं पड़ेगा. भारत की नजर अमेरिका के साथ एक ऐसा व्यापार समझौता करने पर है जो उसके हितों को साधता हो और वही बात सबसे अहम है.

पुतिन के बयान को लेकर हर्ष पंत ने कहा कि रूस आज के वक्त में पश्चिमी देशों से बिल्कुल कट चुका है. रूस के सामने आज यह सवाल खड़ा हो रहा है कि कहीं वह चीन का जूनियर पार्टनर तो बनकर नहीं रह जाएगा. अगर रूस को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता ( स्ट्रैटिजिक अटॉनमी) बनाए रखनी है तो उसे भारत के साथ अपने संबंध को मजबूत करना ही होगा.

अमेरिका और रूस, दोनों को पता है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थता है. इसकी 1.4 अरब की आबादी इसकी ताकत है. वित्त वर्ष 2026 (नवंबर 2025 तक) में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 43.81 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था. इसमें भारत का निर्यात 3.00 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि रूस से आयात 40.81 अरब अमेरिकी डॉलर रहा. यानी रूस हमें कहीं ज्यादा बेच रहा है. पुतिन और रूस के लिए यह फायदे का सौदा है और वह भारत से रिश्ते को लगातार और अधिक मजबूत करना चाहते हैं. भारत के लिए भी रूस भरोसेमंद साथी है, सस्ता तेल-गैस से लेकर हथियार बेचने वाला पार्टनर देश है. 

दूसरी तरफ अमेरिका के साथ स्थिति उलटी है. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत इसमें फायदे में रहता है. अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस (खरीदने से ज्यादा बेचना) 40 अरब डॉलर से उपर का है. ट्रंप इसी को बदलना चाहते हैं और व्यापार समझौता करना चाहते हैं. सच्चाई यह है कि अमेरिका मोती, हीरे से लेकर इलेक्ट्रिक मशीनरी और दवाईयों के लिए भारत पर निर्भर है.

पुतिन के शब्दों में भारत पर किसी तरह का दबाव इंटरनेशनल रिलेशन के लिए खतरा है. ट्रंप भी यह बात जानते हैं. ऐसे में दोनों महाशक्तियों की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारत के लिए दिया गया हर बयान पॉजिटिव नोट पर खत्म हो.

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