
Coronavirus Pandemic: दुनिया में कोविड-19 से मौतों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है. कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या दो लाख 11 हजार के पार पहुंच गई है जबकि इस वायरस के संक्रमितों की संख्या 30 लाख के ऊपर है. विश्व महाशक्ति अमेरिका भी इस वायरस की महामारी का सामना कर रहा है, वहां अब तक 56 हजार से अधिक लोगों ने जान गंवाई है. कोरोना के इस महामारी के बीच कई बार ये सवाल उठे कि यह वायरस आखिरकार कहां से आया, इसकी जांच होनी चाहिए. अधिकतर देशों ने इसका जवाब 'अभी नहीं' में देते हुए फिलहाल कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के उपायों पर ही जोर दिया है. इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने फिर चीन पर निशाना साधा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) ने कहा कि वे मानते हैं कि कोरोना का प्रसार उसके स्रोत पर ही रोका जा सकता था. ऐसी स्थिति में ये वायरस पूरी दुनिया में नहीं फैलता और ऐसा ही करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में एक गंभीर जांच की जा रही है और चीन की ज़िम्मदारी तय करने के कई तरीके हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका इस पर भी विचार कर रहा है कि क्या चीन से, कोरोना के कारण हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई मांगी जा सकती है. जर्मनी के एक अखबार के अनुसार, जर्मनी कोराना वायरस के कारण हुए उस आर्थिक नुकसान को आंक कर कहा है कि इसकी भरपाई चीन को करनी चाहिए.
ऑस्ट्रेलिया इस वायरस के प्रसार को लेकर पूरी जांच चाहता है क्योंकि वहां अधिकतर लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस चीन के किसी मीट मार्केट से ही फैला. ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन ने पिछले ही हफ्ते इस मसले पर अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के नेताओं से बात की. चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि एक 'अंतरराष्ट्रीय गठबंधन' बनाकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को वेपन इंस्पेक्टर जैसी ताकत देनी चाहिए ताकि ऐसी भयावह महामारी फिर कभी न फैले. ऑस्ट्रेलिया में चीन के राजदूत ने यह भी कहा कि इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर असर पड़ेगा. चीन ने विश्व स्तर पर हुई इस पहल पर नाराजगी जताते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के कदमों का असर महामारी के खिलाफ 'लड़ाई' पर पड़ेगा.
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