विज्ञापन

मुनरो डॉक्ट्रिन का ट्रंप संस्करण वेनेजुएला पहुंचा, 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने दिखाई वैश्विक ताकत

अमेरिका की वेनेजुएला में सैन्‍य कार्रवाई इस बात का भी संकेत है कि अमेरिका शायद एक बार फिर अपने पुराने तरीकों की ओर लौट रहा है, जहां वह सत्ता परिवर्तन की राजनीति का शिल्पकार रहा है.

मुनरो डॉक्ट्रिन का ट्रंप संस्करण वेनेजुएला पहुंचा, 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने दिखाई वैश्विक ताकत
  • अमेरिका ने ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया है.
  • यह कार्रवाई मुनरो डॉक्ट्रिन के उस नए संस्करण का हिस्सा मानी जा रही है, जिसे अब 'ट्रंप कोरोलरी' कहा जा रहा है.
  • यह संदेश सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं है. यह निकारागुआ जैसे अन्य लैटिन अमेरिकी देशों के लिए भी चेतावनी है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

2026 में आपका स्वागत है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक बार फिर लौट आया है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के ये शब्द 'अमेरिका वापस आ गया है', दरअसल उस सैन्य कार्रवाई के प्रभाव को पूरी तरह बयान करते हैं, जिसे 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम दिया गया. इस ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के समाजवादी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया गया. यह कार्रवाई न सिर्फ सुर्खियों में छा गई, बल्कि इसने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीति में दबदबे वाली भूमिका निभाने को तैयार है, खासकर लैटिन अमेरिका में अपने प्रभाव को दोबारा स्थापित करने के लिए.

यह घटनाक्रम इस बात का भी संकेत है कि अमेरिका शायद एक बार फिर अपने पुराने तरीकों की ओर लौट रहा है, जहां वह सत्ता परिवर्तन की राजनीति का शिल्पकार रहा है. वेनेजुएला में हुई यह कार्रवाई मुनरो डॉक्ट्रिन के उस नए संस्करण का हिस्सा मानी जा रही है, जिसे अब 'ट्रंप कोरोलरी' कहा जा रहा है. यानी एक स्वाभाविक परिणाम.

Latest and Breaking News on NDTV

कैसे अंजाम दिया गया ऑपरेशन

यह सैन्य ऑपरेशन बेहद साहसिक और अभूतपूर्व था. अमेरिकी नौसेना, वायुसेना, थलसेना, मरीन कॉर्प्स और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी यानी सीआईए की संयुक्त भागीदारी में यह अभियान चलाया गया. 3 जनवरी 2026 की तड़के, वेनेजुएला के खिलाफ यह कार्रवाई शुरू हुई. अमेरिका के 20 अलग-अलग सैन्य ठिकानों से करीब 150 सैन्य विमानों ने उड़ान भरी और एक साथ वेनेजुएला के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए गए.

सबसे पहले राजधानी कराकास में बिजली बंद की गई. शहर अंधेरे में डूब गया. इसके बाद स्थानीय समयानुसार रात 2 बजकर 1 मिनट पर अमेरिकी स्पेशल फोर्स मादुरो के आवासीय परिसर में दाखिल हुए. इस ऑपरेशन में एक गोपनीय सूत्र की अहम भूमिका रही, जिसने मादुरो की सटीक लोकेशन अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंचाई. कुछ ही मिनटों के भीतर मादुरो को गिरफ्तार कर लिया गया. सबसे अहम बात यह रही कि इस पूरे अभियान में अमेरिका की ओर से किसी भी सैनिक की जान नहीं गई.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: PTI

वेनेजुएला नहीं था आसान लक्ष्य

इस सैन्य सफलता को हल्के में नहीं लिया जा सकता. वेनेजुएला इराक से लगभग दोगुना बड़ा देश है. यहां करीब 2 करोड़ 80 लाख की आबादी रहती है. देश के पास 1 लाख 30 हजार से अधिक सक्रिय सैन्यकर्मी हैं, जबकि करीब 3 लाख अर्धसैनिक बल भी मौजूद हैं. वेनेजुएला की सैन्य ताकत में 229 सैन्य विमान, 34 नौसैनिक जहाज, 172 टैंक और करीब 8,800 बख्तरबंद वाहन शामिल हैं.

ऐसे देश में बिना किसी जानमाल के नुकसान के घुसकर राष्ट्रपति को पकड़ लेना अमेरिका की सैन्य योजना, तकनीकी क्षमता और खुफिया नेटवर्क की ताकत को दर्शाता है. हालांकि यह भी सच है कि अगस्त 2025 से ही अमेरिका ने वेनेजुएला के तट के पास अपने युद्धपोत और सैन्य विमान तैनात कर दिए थे. संकेत पहले से मिल रहे थे कि कोई बड़ी कार्रवाई होने वाली है.

Latest and Breaking News on NDTV

अमेरिकी हमले के पीछे असली वजह

वेनेजुएला पर हमले के पीछे कई कारण काम कर रहे थे, लेकिन सबसे बड़ा कारण है तेल. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जो 300 अरब बैरल से भी अधिक आंका जाता है. हाल ही में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात को बिना किसी झिझक के स्वीकार किया कि अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर है.

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी तेल कंपनियां वेनेजुएला जाएंगी, अरबों डॉलर का निवेश करेंगी, वहां के जर्जर तेल बुनियादी ढांचे को ठीक करेंगी और मुनाफा कमाएंगी. उन्होंने यहां तक कहा कि वेनेजुएला के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी अमेरिकी तेल कंपनियों के सहयोग और खर्च से ही होगी. इससे यह साफ हो गया कि यह कार्रवाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक हितों से भी गहराई से जुड़ी हुई है.

Latest and Breaking News on NDTV

तानाशाही, समाजवाद और ट्रंप की वैचारिक लड़ाई

दूसरा बड़ा कारण निकोलस मादुरो की तानाशाही और समाजवादी राजनीति है. वेनेजुएला में 2018 और 2024 में हुए चुनावों को व्यापक रूप से फर्जी माना गया है. यहां तक कि 2013 के चुनाव, जिनके जरिए मादुरो सत्ता में आए थे, उनकी वैधता पर भी सवाल उठते रहे हैं.

मादुरो, पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज के वैचारिक उत्तराधिकारी हैं, जिन्होंने 1999 से 2013 तक वेनेजुएला पर शासन किया. शावेज और मादुरो दोनों ही अमेरिका विरोधी राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं. ऐसे में ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई मुनरो डॉक्ट्रिन के आधुनिक और आक्रामक संस्करण के रूप में देखी जा रही है, जिसे व्हाइट हाउस ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बताया है.

यह संदेश सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं है. यह निकारागुआ जैसे अन्य लैटिन अमेरिकी देशों के लिए भी चेतावनी है. हालांकि निकारागुआ के राष्ट्रपति डैनियल ओर्तेगा के लिए राहत की बात यह है कि उनके देश में तेल संसाधन नहीं हैं.

लैटिन अमेरिका और दुनिया की प्रतिक्रिया

इस सैन्य कार्रवाई का असर तुरंत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर दिखाई देने लगा. अमेरिका के भीतर इसे ट्रंप समर्थकों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में पेश किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे अमेरिका में रहने वाले लैटिनो समुदाय के बीच रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक लाभ मिल सकता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह एक स्पष्ट शक्ति प्रदर्शन है. हालांकि स्पेन, इटली, जर्मनी और यहां तक कि अमेरिका के भीतर कई सीनेटरों ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. इसके बावजूद यह संदेश साफ है कि वॉशिंगटन, लैंगली और पेंटागन अब विदेशी धरती पर भी बड़े और सटीक ऑपरेशन करने को तैयार हैं.

चीन और रूस, जो पिछले एक दशक से मादुरो के करीबी सहयोगी रहे हैं और वेनेजुएला को सैन्य और आर्थिक सहायता देते रहे हैं, अब कराकास की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

भारत के लिए क्या मायने रखता है

भारत ने मादुरो सरकार के साथ उच्चस्तरीय संपर्क जरूर बनाए रखे, लेकिन दोनों देशों के रिश्ते मुख्य रूप से तेल व्यापार तक सीमित रहे. यह भी इस बात से जाहिर होता है कि मादुरो की कभी भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई.

2007 से 2019 के बीच भारत ने वेनेजुएला से भारी मात्रा में तेल आयात किया. ओएनजीसी विदेश जैसी भारतीय कंपनियों ने वहां के तेल क्षेत्रों में अरबों डॉलर का निवेश भी किया. लेकिन 2019 और 2020 में अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद भारत का तेल आयात तेजी से घट गया. अब जब अमेरिका वेनेजुएला के तेल उत्पादन पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, तो भारतीय कंपनियों को पश्चिमी कंपनियों के बाद ही अवसर मिलने की संभावना है.

वेनेजुएला का भविष्य, अनिश्चित और धुंधला

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका तब तक वेनेजुएला को 'चलाएगा' जब तक वहां सुरक्षित, उचित और न्यायसंगत सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता. लेकिन इस बयान के बावजूद यह याद रखना जरूरी है कि वेनेजुएला में अभी तक सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है. वहां की सत्तारूढ़ पार्टी यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी ऑफ वेनेजुएला अब भी सत्ता में मजबूती से जमी हुई है.

उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने मादुरो की गिरफ्तारी को अवैध बताया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया है. दूसरी ओर, वेनेजुएला का विपक्ष भी इस मौके का फायदा उठाने की स्थिति में नहीं दिख रहा. विपक्ष बुरी तरह बंटा हुआ है और कई नेता प्रभाव जमाने की होड़ में लगे हैं.

यहां तक कि हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मारिया कोरिना मचाडो को भी ट्रंप ने यह कहकर खारिज कर दिया कि उन्हें वेनेजुएला की जनता का समर्थन और सम्मान हासिल नहीं है.

तेल का अभिशाप और वेनेजुएला के आम लोगों की पीड़ा

वेनेजुएला की कहानी संसाधनों के अभिशाप की सबसे बड़ी मिसाल बनती जा रही है. दशकों से इस देश के तेल संसाधनों का दोहन भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया और अब यह विदेशी ताकतों के हाथों में जाने का खतरा झेल रहा है. इसका सबसे बड़ा खामियाजा वेनेजुएला की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.

आज यह देश बढ़ती हिंसा, आसमान छूती महंगाई, जरूरी वस्तुओं की भारी कमी और रोजगार के अभाव से जूझ रहा है. विडंबना यह है कि जिस देश के पास दुनिया की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने लायक तेल है, वहां की जनता बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है.

आने वाला समय बताएगा कि अमेरिका की यह कार्रवाई वेनेजुएला को स्थिरता और समृद्धि की ओर ले जाएगी या फिर यह देश और अधिक अराजकता और हिंसा के दलदल में फंस जाएगा. लेकिन इतना तय है कि 2026 की यह शुरुआत वैश्विक राजनीति में लंबे समय तक याद रखी जाएगी.

डिस्क्लेमर: लेखक हरि सेशाई ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में विजिटिंग फेलो और कॉन्सिलियम ग्रुप के सह-संस्थापक हैं. इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com