
बीजिंग:
भारत की ओर से सीमा पर यथास्थिति बहाल करने की मांग को नजरअंदाज करते हुए चीन ने बुधवार को अपने पहले के रुख को कायम रखा और कहा कि उसके सैनिकों ने लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का उल्लंघन नहीं किया है।
चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनइंग ने कहा, ‘‘मैं इस बात को दोहराना चाहती हूं कि चीन के सैनिक द्विपक्षीय समझौतों का कड़ाई के साथ पालन करते हुए काम कर रहे हैं और एलएसी पर अपनी ओर सामान्य गश्त लगा रहे हैं।’’ वह दोनों देशों की सेना के बीच मंगलवार को हुई फ्लैग मीटिंग और भारत की ओर से यथास्थिति बहाल करने की मांग को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थीं।
हुआ ने बीते 22 अप्रैल को दिए अपने बयान को दोहराया। इससे स्पष्ट होता है कि चीन इस रुख पर कायम है कि एलएसी का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है और बातचीत के जरिये समाधान निकाले जाने तक उसके सैनिक उसी स्थान पर बने रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा विवाद पर विचार-विमर्श व्यवस्था के तहत इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ‘संपर्क माध्यम’ खोले हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को एलएसी पर बनी सहमति पर अडिग रहना चाहिए।
हुआ ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों को सहमति का अनुपालन करना चाहिए जो दोनों के हित में है। दोनों पक्षों को सीमा मुद्दों का मौजूदा व्यवस्थाओं के तहत समाधान करने और द्विपक्षीय संबंधों के अनुकूल माहौल बनाने के मकसद से मिलकर काम करना चाहिए।’’
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद यह पहला मौका है जब चीन ने स्वीकार किया है कि इस मुद्दे पर दोनों देश चर्चा कर रहे हैं।
कल फ्लैग मीटिंग के बाद भारत ने चीन से कहा था कि लद्दाख की देपसांग घाटी में यथास्थिति बहाल की जाए। भारतीय सेना ने आरोप लगाया था कि चीन के सैनिक भारतीय सीमा में करीब 10 किलोमीटर अंदर घुस आए हैं।
यह घटना उस वक्त हुई है जब चीन के नए प्रधानमंत्री ली क्विंग के अगले महीने नई दिल्ली का दौरा करने की योजना है।
चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनइंग ने कहा, ‘‘मैं इस बात को दोहराना चाहती हूं कि चीन के सैनिक द्विपक्षीय समझौतों का कड़ाई के साथ पालन करते हुए काम कर रहे हैं और एलएसी पर अपनी ओर सामान्य गश्त लगा रहे हैं।’’ वह दोनों देशों की सेना के बीच मंगलवार को हुई फ्लैग मीटिंग और भारत की ओर से यथास्थिति बहाल करने की मांग को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थीं।
हुआ ने बीते 22 अप्रैल को दिए अपने बयान को दोहराया। इससे स्पष्ट होता है कि चीन इस रुख पर कायम है कि एलएसी का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है और बातचीत के जरिये समाधान निकाले जाने तक उसके सैनिक उसी स्थान पर बने रह सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा विवाद पर विचार-विमर्श व्यवस्था के तहत इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ‘संपर्क माध्यम’ खोले हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को एलएसी पर बनी सहमति पर अडिग रहना चाहिए।
हुआ ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों को सहमति का अनुपालन करना चाहिए जो दोनों के हित में है। दोनों पक्षों को सीमा मुद्दों का मौजूदा व्यवस्थाओं के तहत समाधान करने और द्विपक्षीय संबंधों के अनुकूल माहौल बनाने के मकसद से मिलकर काम करना चाहिए।’’
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद यह पहला मौका है जब चीन ने स्वीकार किया है कि इस मुद्दे पर दोनों देश चर्चा कर रहे हैं।
कल फ्लैग मीटिंग के बाद भारत ने चीन से कहा था कि लद्दाख की देपसांग घाटी में यथास्थिति बहाल की जाए। भारतीय सेना ने आरोप लगाया था कि चीन के सैनिक भारतीय सीमा में करीब 10 किलोमीटर अंदर घुस आए हैं।
यह घटना उस वक्त हुई है जब चीन के नए प्रधानमंत्री ली क्विंग के अगले महीने नई दिल्ली का दौरा करने की योजना है।
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