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चीन विदेशियों पर कैसे रखता है नजर? लीक डेटाबेस ने खोले कई राज, कब क्या खाते हैं, यह भी जानता है ड्रैगन!

चीन के सीक्रेट डेटाबेस में चीन के आम लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले विदेशी लोगों के पसंदीदा स्थान, हॉस्पिटल जाने का समय, गैस के बिल, ट्रेन और फ्लाइट की जानकारी, यहां तक कि सीट नंबर तक दर्ज थे.

चीन विदेशियों पर कैसे रखता है नजर? लीक डेटाबेस ने खोले कई राज, कब क्या खाते हैं, यह भी जानता है ड्रैगन!
पुलिस असल में इस डेटाबेस का इस्तेमाल करती है या नहीं, और कैसे करती है, यह साफ नहीं है (AI से बनी तस्वीर)
  • चीन का सर्विलांस सिर्फ अपने नागरिकों तक सीमित नहीं, बल्कि वहां रहने वाले विदेशी लोगों पर भी नजर रखी जाती है
  • एक ऐसे सीक्रेट डेटाबेस का खुलासा हुआ है जिसमें विदेशी लोगों की हर निजी जानकारी दी गई थी,
  • सैकड़ों लोगों की निजी जानकारी वाला डेटाबेस लगभग बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट पर मौजूद था

यह तो दुनिया भर को पता था कि चीन अपने 140 करोड़ नागरिकों पर पहले से ही कैमरों, मोबाइल सिग्नलों और राष्ट्रीय पहचान रिकॉर्ड के विशाल नेटवर्क के जरिए नजर रखता है. लेकिन अब एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि यह सर्विलांस सिर्फ चीनी नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन में रहने वाले विदेशी लोग भी इसकी पहुंच से बाहर नहीं हैं. विदेशी पत्रकार के तौर पर कई साल चीन में काम कर चुके मार्क होफर अपना ज्यादातर समय इंटरनेट पर यह पता लगाने में बिताते हैं कि चीन अपने लोगों पर किस तरह नजर रखता है. लेकिन इस साल की शुरुआत में उन्हें एक ऐसा झटका लगा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. उन्हें एक वेबसाइट पर अपनी ही तस्वीर दिखाई दी. वहां उनका पासपोर्ट नंबर और वह मोबाइल नंबर भी मौजूद था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने चीन में रहने के दौरान किया था. यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापी है.

इस वेबसाइट का नाम 'डायनेमिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म फॉर ओवरसीज पर्सनल' था. मार्क होफर ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि यह सिस्टम उन्हें साइंस फिक्शन फिल्म 'माइनॉरिटी रिपोर्ट' की याद दिलाता है. यह प्लेटफॉर्म उत्तरी चीन के शहर झांगजियाकौ में रहने वाले विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया था. यह शहर स्कीइंग और 2022 के विंटर ओलंपिक की मेजबानी के लिए जाना जाता है.

साइबर सुरक्षा रिसर्चर्स की इस खोज से पता चला कि इस सिस्टम में झांगजियाकौ में रहने वाले 700 से ज्यादा विदेशियों और कुल मिलाकर लगभग 12 हजार रिकॉर्ड मौजूद थे. इनमें वांटेड लोगों, हांगकांग और ताइवान के निवासियों के अलावा 300 से ज्यादा विदेशी पत्रकारों के नाम भी शामिल थे. इनमें से कई पत्रकार ऐसे थे, जो कभी झांगजियाकौ गए ही नहीं थे.

मार्क होफर ने बताया कि यह कोई स्टूडेंट प्रोजेक्ट या शौकिया लोगों का बनाया गया डेमो नहीं लग रहा था. रिकॉर्ड देखकर साफ था कि सिस्टम में मौजूद जानकारी असली थी. उन्होंने यह भी देखा कि हाल के लॉग-इन रिकॉर्ड में झांगजियाकौ और उसके बाहर के कई पुलिस स्टेशनों के नाम दर्ज थे. जनवरी में यह जानकारी मिलने के बाद होफर ने जितना संभव हो सका, उतना डेटा डाउनलोड कर लिया. हालांकि मई तक पूरी वेबसाइट गायब हो चुकी थी.

न्यूयॉर्क टाइम्स को इस प्लेटफॉर्म और बीजिंग की कंपनी ओरिजिन डायनेमिक के बीच संबंधों के सबूत मिले. यह कंपनी पुलिस विभागों को रोबोट और निगरानी उपकरण बेचती है. सार्वजनिक डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, कंपनी ने 2023 में एक ऐसे ही सिस्टम का पेटेंट भी कराया था, जिसे उसने गैर-चीनी नागरिकों के लिए इन्फॉर्मेशन इंटरफेस बताया था.

हालांकि यह साफ नहीं है कि पुलिस इस डेटाबेस का इस्तेमाल कैसे करती थी, लेकिन इसके अस्तित्व से यह पता चलता है कि चीनी अधिकारी विदेशियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर नजर रखने के लिए कितनी दूर तक जा सकते हैं. सिस्टम में लोगों के पसंदीदा स्थान, अस्पताल जाने का समय, गैस के बिल, ट्रेन और फ्लाइट की जानकारी, यहां तक कि सीट नंबर तक दर्ज थे.

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वेबसाइट के लॉग-इन पेज पर यूजरनेम और पासवर्ड पहले से ही भरे हुए थे. यानी सैकड़ों लोगों की निजी जानकारी वाला डेटाबेस लगभग बिना किसी सुरक्षा के इंटरनेट पर मौजूद था. वेबसाइट के कुछ हिस्से अभी अधूरे भी थे और कई जगह खाली बॉक्स तथा डमी टेक्स्ट दिखाई दे रहे थे. यह सिस्टम सिर्फ कैमरों से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर नहीं था. इसमें थाइवू स्की रिजॉर्ट आने वाले सभी लोगों- चाहे वे चीनी हों या विदेशी- की तस्वीरें, नाम और पासपोर्ट विवरण भी शामिल थे.

किन देशों के नागरिकों पर खास नजर?

डेटाबेस ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के लोगों को फाइव आइज एलायंस नाम के एक ग्रूप में रखा था. इसके अलावा मिस्र, ईरान, इजरायल, मोरक्को, पाकिस्तान और सूडान जैसे देशों के लोगों के लिए "प्रमुख देश" नाम की अलग कैटेगरी बनाई गई थी.

हांगकांग और ताइवान के लोगों के लिए अलग-अलग फोल्डर बनाए गए थे. विदेशी छात्रों, विदेशी पार्टनर्स और प्रमुख व्यक्तियों नाम की एक कैटेगरी भी थी. चीन में आमतौर पर प्रमुख व्यक्ति शब्द का इस्तेमाल एक्टिविस्ट्स, वांटेंड लोगों या ऐसे लोगों के लिए किया जाता है, जिन्हें सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है. रिकॉर्ड में शामिल कई विदेशी छात्र पाकिस्तान और भारत के थे, जो झांगजियाकौ की हेबेई नॉर्थ यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे. उनकी फाइलों में सिर्फ नाम और पासपोर्ट नंबर ही नहीं, बल्कि उनका धर्म, वैवाहिक स्थिति, पढ़ाई का विषय और यहां तक कि कैंपस में आते समय कैमरों ने उन्हें किस समय रिकॉर्ड किया, इसकी भी पूरी जानकारी दर्ज थी.

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