अमेरिका का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान B-52 बॉम्बर कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर एक सैन्य अभ्यास के दौरान क्रैश हो गया. इसमें पायलट समेत सवार सभी आठ सैन्यकर्मियों की मौत हो गई. प्लेन क्रैश का वीडियो सामने आया है, जिसमें वो पूरी तरह खाक हो गया. अमेरिका का बी-2 स्पिरिट (B-2 Spirit) को स्टील्थ बॉम्बर (Stealth Bomber) भी कहा जाता है. दुनिया में यह सबसे खतरनाक, एडवांस टेक्नोलॉजी वाले विमानों में से एक है. इसका तोड़ चीन, रूस जैसे देशों के पास भी नहीं है. इसकी बनावट किसी उड़ते हुए विशालकाय पक्षी के पंख (Flying Wing) जैसी है, जिसके कारण यह रडार की नजर में नहीं आता.
बी-2 बॉम्बर की कीमत कितनी है?
बी-2 स्पिरिट दुनिया का सबसे महंगा लड़ाकू विमान है.1990 के दशक में इसकी लागत 73.7 करोड़ डॉलर थी. रिसर्च, डेवलपमेंट, टेस्टिंग के बाद इसकी लागत 2.1 अरब डॉलर होती है. एक विमान की कीमत 19,800 करोड़ रुपये से भी अधिक है. इसकी स्टील्थ स्किन वाली सतह (रडार से बचने वाली स्पेशल कोटिंग) के लिए इसे विशेष एयर कंडीशनिंग हैंगर में रखना पड़ता है. इसके एक घंटे की उड़ान का खर्च करीब 1.3 लाख से 1.5 लाख डॉलर (सवा करोड़ रुपये) आता है.
बी-2 बॉम्बर की क्या ताकत है
बी-2 बॉम्बर की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टील्थ टेक्निक और लंबी दूरी से हमले की क्षमता है. इसकी अनोखी बनावट और स्पेशल राडार एब्जॉर्बिंग मैटेरियल्स (RAM) क्षमता होती है. यह दुश्मन के बड़े से बड़े एडवांस्ड राडार को भी चकमा दे सकता है. राडार स्क्रीन पर यह एक बड़ी चिड़िया जितना दिखता है.
बी-2 बॉम्बर की रेंज क्या है
बी-2 बॉम्बर बिना लैंडिंग के 11 हजार किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. हवा में ही ईंधन भरने के बाद इसकी रेंज 19 हजार किलोमीटर तक हो जाती है. यानी ये अमेरिका से उड़ान भरकर दुनिया के किसी भी कोने में हमला करके वापस लौट सकता है.

B-2 Bomber US air force Fighter Jet
विशालकाय बम गिरने की क्षमता
B2 बॉम्बर अपने साथ लगभग 40 हजार पाउंड (करीब 18 हजार किलो) वजन के बम, हथियार ले जा सकता है. इसमें पारंपरिक बमों से लेकर स्मार्ट गाइडेड मिसाइलें और परमाणु बम शामिल हैं. ईरान के बंकरों में मौजूद परमाणु ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए ऐसे ही बम गिराए गए थे.
परमाणु बम हमले में इस्तेमाल
B-2 बॉम्बर को स्ट्रैटेजिक पेनिट्रेशन यानी रणनीतिक भंडारों, बंकरों को ध्वस्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया था.दुश्मन के सबसे सुरक्षित और मजबूत सुरक्षा घेरे को तोड़कर यह तबाही मचा सकता है.
परमाणु ताकत का हिस्सा
यह अमेरिकी वायुसेना की परमाणु मारक क्षमता की बुनियाद है. यह B61 और B83 जैसे थर्मोन्यूक्लियर हाइड्रोजन बम ले जाने में सक्षम है. युद्ध की स्थिति में यह दुश्मन देश के कमांड सेंटरों और परमाणु ठिकानों को सीधे नष्ट कर सकता है. पनडुब्बी, बी-2 बॉम्बर या मिसाइल के जरिये परमाणु बम हमले करने में सक्षम है.
बंकरों को भेदने की ताकत
अमेरिका के सबसे भारी गैर परमाणु बम GBU-57 (Massive Ordnance Penetrator MOP) को ले जाने वाला एकमात्र विमान है. यह करीब 30 हजार पाउंड यानी 13 हजार 600 किलो का बम होता है. जमीन के सैकड़ों फीट नीचे छिपे कंकरीट के बंकरों को तबाह करने में इस्तेमाल होता है.
बी-2 बॉम्बर को पहले हमले का जिम्मा
बी-2 बॉम्बर को पहले हमले का हथियार यानी First Strike Weapon कहा जाता है. किसी भी युद्ध की शुरुआत में दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम जैसे मिसाइल डिफेंस और राडार स्टेशन को तबाह करने का काम ये करता है. फिर सामान्य लड़ाकू विमान मोर्चा संभालते हैं.
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अमेरिका के पास कितने बी-2 बॉम्बर हैं?
अमेरिकी सेना ऐसे 132 B-2 बॉम्बर विमान खरीदना चाहती थी, लेकिन शीत युद्ध (Cold War) खत्म होने और अत्यधिक लागत के कारण इसका उत्पादन रोक दिया गया था. कुल 21 B-2 बॉम्बर विमान ही अमेरिका के पास थे. साल 2008 में गुआम (Guam) में एक फाइटर जेट के बाद कैलीफोर्निया में 15 जून को एक B-2 बॉम्बर गिर गया. अभी यूएस एयरफोर्स के पास 19 B-2 बॉम्बर हैं. ये अमेरिका के मिसौरी में व्हाइटमैन एयरफोर्स बेस से उड़ान भरते हैं.
B-2 बॉम्बर का नया वर्जन
अमेरिका अब B-2 बॉम्बर के अपग्रेडेड और नए वर्जन B-21 रेडर (B-21 Raider) पर काम कर रहा है, जो आने वाले समय में इन बी-2 बॉम्बर्स की जगह लेगा. रूस और चीन की सैन्य तैयारियों के बीच अमेरिका ने ये कदम उठाया है. अमेरिका एफ-35 का नया वर्जन F-47 भी बना रहा है.
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