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ट्रंप-पुतिन-नेतन्याहू 'खतरनाक शिकारी' और दुनिया 'डरपोक'! एमनेस्टी ने चीन को क्यों बताया पाक-साफ?

एमनेस्टी इंटरनेशनल की नई वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए महासचिव एग्रनेस कैलामार्ड ने कहा कि अगर हालात को संभाला नहीं गया तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था तबाह हो सकती है.

ट्रंप-पुतिन-नेतन्याहू 'खतरनाक शिकारी' और दुनिया 'डरपोक'! एमनेस्टी ने चीन को क्यों बताया पाक-साफ?

दुनिया के तीन शक्तिशाली नेता- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और इजरायल  के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू क्या शिकारियों (predator) की तरह बर्ताव कर रहे हैं? बड़े पैमाने पर विनाश और दमन का सहारा लेकर क्या ये आर्थिक और राजनीतिक प्रभुत्व हासिल करना चाहते हैं? क्या ये तीनों दुनिया पर नई शिकारी व्यवस्था थोपने की कोशिश कर रहे हैं? क्या दुनिया के अधिकांश देश इतने 'डरपोक' हो चुके हैं कि इन्हें रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं? कई लोग इससे असहमत हो सकते हैं, लेकिन वैश्विक मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का ऐसा ही मानना है. 

80 वर्ष पुरानी वैश्विक व्यवस्था खतरे में

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट जारी की है. इस मौके पर इस मानवाधिकार संस्था के महासचिव एग्रनेस कैलामार्ड ने ट्रंप, पुतिन और नेतन्याहू की बेहद कड़े शब्दों में आलोचना की. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हालात को संभाला नहीं गया तो दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्था तबाह हो सकती है. पिछले 80 वर्षों में जो बहुपक्षीय वैश्विक सिस्टम बना है, वह बिखर जाएगा. 

ट्रंप, पुतिन, नेतन्याहू विनाश-दमन के पुजारी

कैलामार्ड ने साल 2025 का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे साल ट्रंप, पुतिन और नेतन्याहू जैसे नेता बड़े पैमाने पर विनाश, दमन और हिंसा के जरिए आर्थिक और राजनीतिक प्रभुत्व हासिल करने की कोशिश करते रहें. ये नेता अपने वर्चस्व और लालच के रास्ते में आने वाली हर चीज को नष्ट कर रहे हैं. ये मानवाधिकारों की बुनियाद पर हमला कर रहे हैं. ये तीनों नेता नैतिक रूप से दिशाहीन ऐसे विजन को बढ़ावा दे रहे हैं, जहां कूटनीति के बजाय युद्ध हावी हो गया है.

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'शिकारियों के आगे डरपोक बनी दुनिया'

महासचिव कैलामार्ड ने इन नेताओं की हरकतों को लेकर दुनिया की चुप्पी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इन 'शिकारियों' का सामना करने के बजाय अधिकतर देशों की सरकारें खासकर यूरोपीय देश तुष्टिकरण का रास्ता अपना रहे हैं. उन्होंने 'कायर' शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कोई भी इनके द्वारा थोपे गए विनाश को रोकने के लिए आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. रिपोर्ट में जहां यूरोपीय देशों की आलोचना की गई है, वहीं स्पेन और स्लोवेनिया जैसे देशों की सराहना करते हुए कहा गया है कि इन्होंने गाजा में इजरायल की कार्रवाई को "नरसंहार" कहने का साहस दिखाया. 

'सत्ता का मनमाना इस्तेमाल कर रहे ट्रंप'

मिडिल ईस्ट संघर्ष और गाजा के हालात को कैलामार्ड ने "शिकारी वैश्विक व्यवस्था" का नया उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था नस्लवादी विचारधारा और अमानवीय विजन पर आधारित है. रिपोर्ट में इजरायल पर गाजा में नरसंहार और रंगभेद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने ट्रंप पर कानून के शासन को कमजोर करने और सत्ता के मनमाने इस्तेमाल का आरोप भी लगाया.

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चीन को 'शिकारी' सूची में शामिल नहीं किया

दिलचस्प बात यह है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की इस रिपोर्ट में चीन को "शिकारी" सूची में शामिल नहीं किया गया है. कहा गया है कि वह चुपचाप बहुत ही सावधानी और विवेक के साथ काम कर रहा है. हालांकि म्यांमार में सैन्य शासन का समर्थन करने और रूस की मदद करने में सीधे तौर पर शामिल होने को लेकर आलोचना की. 

एक इंटरव्यू में कैलामार्ड ने ट्रंप और पुतिन के वैश्विक विजन को नस्लीय और पितृसत्तात्मक करार दिया. ट्रंप पर कानून के शासन को कमजोर करने और सत्ता के मनमाने इस्तेमाल का आरोप लगाया. खासकर महिलाओं के यौन और प्रजनन अधिकारों को सीमित करने के मामले में उनकी तीखी आलोचना की. रूस में एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों के दमन और पारिवारिक मूल्यों के नाम पर की जा रही कार्रवाई को लेकर पुतिन को आड़े हाथ लिया.

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