
कराची:
पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत के थरपारकर जिले में अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं, साफ पेयजल की कमी, कुपोषण और अन्य असाध्य बीमारियों के कारण पिछले चार महीनों में करीब 162 बच्चों की मौत हो गई। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्जुन कुमार द्वारा थरपारकर के उपायुक्त शहजाद सहीम को दी गई जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं के कारण इन बच्चों की मौत हुई और उनकी उम्र पांच साल से नीचे बताई जाती है।
उन्होंने बताया कि पिछले चार महीने में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं से ग्रस्त कम से कम 245 बच्चों को जिले के मीठी इलाके के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों से अन्य अस्पतालों में रिफर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार महीनों में करीब 39,795 बच्चों को अस्पतालों और क्लीनिकों में लाया गया जिनमें से 4,123 बच्चों को भर्ती किया गया।
बहुत से बच्चों की मौत अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में हुई
इसके अनुसार, उपचार के दौरान 162 बच्चों की मौत हो गई जबकि 245 अन्य बच्चों को प्रांत के अन्य अस्पातालों में रिफर कर दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सोनो खनगरानी ने दावा किया कि इन बच्चों में से 90 प्रतिशत से अधिक की कराची और हैदराबाद स्थित अस्पतालों में ले जाने के दौरान रास्ते में ही मौत हो गई।
थरपारकर में सूखे जैसे हालात
अधिकारियों ने बताया कि थरपारकर में सूखे जैसे हालात हैं, वहां साफ पेयजल की कमी, अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और दवाइयों की कमी के साथ चिकित्सकों और सहायक स्वास्थ्य कर्मियों की भी कमी है, जिसके कारण बच्चों और शिशुओं में मृत्यु दर अधिक है। थरपारकर में मिठी, डिप्लो, इस्लामकोट, छाछरो, नागरपाकर और अन्य इलाके सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
उन्होंने बताया कि पिछले चार महीने में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं से ग्रस्त कम से कम 245 बच्चों को जिले के मीठी इलाके के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों से अन्य अस्पतालों में रिफर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार महीनों में करीब 39,795 बच्चों को अस्पतालों और क्लीनिकों में लाया गया जिनमें से 4,123 बच्चों को भर्ती किया गया।
बहुत से बच्चों की मौत अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में हुई
इसके अनुसार, उपचार के दौरान 162 बच्चों की मौत हो गई जबकि 245 अन्य बच्चों को प्रांत के अन्य अस्पातालों में रिफर कर दिया गया। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सोनो खनगरानी ने दावा किया कि इन बच्चों में से 90 प्रतिशत से अधिक की कराची और हैदराबाद स्थित अस्पतालों में ले जाने के दौरान रास्ते में ही मौत हो गई।
थरपारकर में सूखे जैसे हालात
अधिकारियों ने बताया कि थरपारकर में सूखे जैसे हालात हैं, वहां साफ पेयजल की कमी, अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और दवाइयों की कमी के साथ चिकित्सकों और सहायक स्वास्थ्य कर्मियों की भी कमी है, जिसके कारण बच्चों और शिशुओं में मृत्यु दर अधिक है। थरपारकर में मिठी, डिप्लो, इस्लामकोट, छाछरो, नागरपाकर और अन्य इलाके सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं