- नोएडा सेक्टर 63 में मजदूर दीपक अपने परिवार के साथ तीन साल से एक अंधेरे कमरे में कम मजदूरी पर रह रहे थे
- मजदूरों की दिहाड़ी 540 से बढ़ाकर 550 रुपये की गई, जिसके विरोध में उन्होंने प्रदर्शन किया था
- प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने दीपक और अन्य मजदूरों को हिरासत में लिया और फैक्ट्री में काम करने से रोक दिया
नोएडा सेक्टर 63 में बड़ी कंपनियों की शानदार इमारतों के बीच एक तंग रास्ता वाजिदपुर गांव के अंदर जाता है.इन्ही रास्तों पर चलते हुए NDTV की टीम कई कमरों वाले एक पुराने से मकान के अंदर पहुंची.नोएडा पुलिस ने यहां रहने वाले दो मजदूरों को हिरासत में लिया है.इनमें से एक दीपक हैं.दो छोटे बच्चे और एक पत्नी के साथ बीते तीन साल से इस मकान के एक अंधेरे कमरे में रहते थे.डरी पत्नी और बच्चों से हम नहीं मिले, लेकिन दीपक के छोटे भाई सोनू से हमारी मुलाकात हुई.सोनू ने बताया कि उनका भाई और वो 540 रुपए दिहाड़ी पर एक फैक्ट्री में काम करते थे.13 अप्रैल को फैक्ट्री मालिक ने दिहाड़ी मजदूरी 540 से बढ़ाकर 550 कर दी थी.उसी को लेकर सबके मन में गुस्सा था कि चलो हम भी प्रदर्शन करके अपनी आवाज को उठाते हैं.
पुलिस के विदेशी हाथ होने के दावे पर क्या बोले मजदूर
प्रशासन के विदेशी हाथ होने के दावे पर जब सोनू से पूछा गया को उसने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए सब बातें हम लोगों को पता लगती रहती हैं.हरियाणा में तनख्वाह बढ़ने की बात भी उसी से पता चली.कई दिनों से फैक्ट्री मालिक से हम लोग बात करने की कोशिश कर रहे थे कि जब कई फैक्ट्रियों में मानदेय बढ़ रहा है तो हम लोगों का क्यों नहीं.इसी को लेकर लंच टाइम में सब बाहर निकले और रोड पर बैठ गए.

मजदूर इंसान नहीं है क्या, उसे गुस्सा नहीं आ सकता?
सोनू ने एनडीटीवी को बताया कि अब आप बताओ कमरे का किराया 5000 रुपए दे रहे हैं, तीन किलो गैस एक हजार रुपए में भरवा रहे हैं.इतनी सैलरी में क्या पत्नी बच्चे का गुजारा चल जाएगा? सोनू ने कहा कि उसका भाई दीपक 13 अप्रैल से धरने पर बैठा था. कंपनी के बाहर पुलिस आई और उसको और एक और मजदूर को पकड़ कर ले गई.उसके बाद से फोन स्विच आफ है और पत्नी बैठी रो रही है.14 अप्रैल को भी हम लोग फैक्ट्री में काम करने गए, हमें भगा दिया गया.आज भी जब सुबह पहुंचे तो पुलिस ने वहां से भगा दिया.जबकि एक और मजदूर को पुलिस ने पकड़ लिया. उनके बड़े भाई मुनेश ने बताया कि दीपक के साथ उसे भी पुलिस पकड़ ले गई है.
नोएडा में मजदूरों का आंदोलन और उस बीच छिपा आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. सैलरी, डीए, ओवरटाइम पर पैसे समेत तमाम मुद्दों को लेकर नोएडा में बवाल मचा हुआ है. इस बीच NDTV की टीम ने मजदूरों से बात की#Noida #WorkersProtest pic.twitter.com/EKuaaMDJUu
— NDTV India (@ndtvindia) April 15, 2026

मुनेश खुद सात साल से दिहाड़ी मजदूर हैं जबकि उनकी पत्नी भी गारमेंट फैक्ट्री में काम करती हैं.मुनेश ने बताया कि हर साल तनख्वाह बढ़ाने के नाम पर महज 10-20 रुपए मजदूरी बढ़ जाती है.क्या मजदूर इंसान नहीं है क्या, उसे गुस्सा नहीं आ सकता? किसी का गुजारा नोएडा जैसे शहर में इतने पैसे में हो सकता है? गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए.तेल के दाम बढ़ गए, रोज ऑटो से जाता हूं. दस रुपए की जगह अब वो बीस रुपए लेता है.पहले महीने का भाड़ा 600-700 का पड़ता था, अब भाड़ा 1200-1400 रुपये यानि दुगना हो गया है.

DA की तर्ज पर कुछ ज्यादा पैसे अलग से मिलें वरना...
श्रमिकों का मानदेय बढ़ाने का पोस्टर हर चौराहे पर इस तरह लगाया गया है. इसमें बताया गया है कि अकुशल के 13890, अर्धकुशल को 15059 और कुशल मजदूरों को 16868 महीने की तनख्वाह बढ़ाई गई है.जबकि हरियाणा में अब भी इससे ज्यादा है.उप्र सरकार के सामने बड़ी दिक्कत ये है कि मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने पर नोएडा ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि दूर दराज यानि सोनभद्र से लेकर बहराइच तक के शहरों के मजदूरों की तनख्वाह बढ़ेगी.जबकि टियर A शहर की तुलना टियर C या D शहर की मंहगाई से नहीं की जा सकती है.नोएडा इंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के मीडिया प्रमुख सुधीर श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकार दो तरह से इस समस्या को डील कर सकती है.नोएडा जैसे जगहों पर काम करने वाले मजूदरों को DA की तर्ज पर कुछ ज्यादा पैसे अलग से मिलें वरना ये समस्या बार बार खड़ी होती रहेगी.

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