- मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और फर्रुखाबाद की मोनिका यादव ने हिमाचल प्रदेश के सोलन में शादी रचाई
- दोनों भाजपा से जुड़े युवा नेता हैं जिन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार सात फेरे लिए और विवाह किया
- शादी समारोह सीमित परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में सादगी से सम्पन्न हुआ, राजनीतिक तामझाम से दूर
Gaurav Chaudhary Monika Yadav: उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद खूबसूरत और दिलचस्प खबर सामने आई है. यूपी के दो अलग-अलग जिलों की कमान संभालने वाले दो युवा जनप्रतिनिधि अब असल जिंदगी में भी हमसफर बन गए हैं. मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका सिंह (यादव) ने विवाह रचा लिया है. दोनों ही नेता भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं.

UP Political Wedding: मेरठ जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और फर्रुखाबाद की मोनिका यादव ने रचाई शादी, हिमाचल में हुए सात फेरे
हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं में विवाह को दो आत्माओं का पवित्र बंधन और सात जन्मों का रिश्ता माना गया है. इसी पारंपरिक और धार्मिक रस्मों-रिवाजों का पालन करते हुए दोनों नेताओं ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के एक खूबसूरत रिसॉर्ट में सात फेरे लिए. शादी की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर आने के बाद से ही समर्थकों और राजनेताओं द्वारा जोड़े को बधाई देने का सिलसिला जारी है.

दो जिलों के पंचायत अध्यक्षों ने रचाया ब्याह: हिमाचल में शादी के बंधन में बंधे गौरव चौधरी और मोनिका यादव
सीमित मेहमान और परिवार का आशीर्वाद
राजनीतिक तामझाम से दूर, यह विवाह समारोह बेहद सादगी के साथ सीमित पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में संपन्न हुआ. शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन ने अपने-अपने माता-पिता के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया. इस निजी समारोह में दोनों पक्षों के बेहद करीबी लोग ही शामिल हुए.

meerut zila panchayat president gaurav chaudhary marries farrukhabad monika yadav
गौरव चौधरी के साथ उनके पिता चौधरी महकार सिंह, माता रेखा देवी, भाई नितिन चौधरी और भाभी निहारिका सिंह मौजूद रहे. मोनिका यादव की तरफ से उनके पिता व उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव और सचिन यादव ने विवाह की रस्में पूरी कराईं.

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और मोनिका यादव परिणय सूत्र में बंधे
हिमाचल के शांत वातावरण में शादी की रस्में पूरी करने के बाद, अब कयास लगाए जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही एक भव्य रिसेप्शन (प्रीतिभोज) का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं.

गौरव चौधरी-मोनिका यादव विवाह: सिमित परिजनों के बीच सोलन के रिसॉर्ट में संपन्न हुई शादी
जर्मनी का बड़ा बिजनेस एम्पायर छोड़ मेरठ लौटे गौरव चौधरी
मेरठ के कुसेड़ी गांव के रहने वाले गौरव चौधरी की कहानी बेहद दिलचस्प है. साल 2006 में वह 'बैचलर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस' की पढ़ाई करने जर्मनी गए थे. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वहीं सेटल हो गए और कड़ी मेहनत से वहां होटल्स, रियल एस्टेट और होलसेल स्टोर्स का एक बहुत बड़ा बिजनेस एम्पायर खड़ा किया. बिजनेस शिखर पर था, लेकिन साल 2021 में अचानक मातृभूमि और मेरठ की माटी की खुशबू उन्हें भारत खींच लाई. भारत लौटने के महज 4 महीने बाद ही उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और अपनी लोकप्रियता के दम पर निर्विरोध मेरठ के जिला पंचायत अध्यक्ष चुन लिए गए.

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मल्टीनेशनल कंपनी की HR हेड रही हैं मोनिका यादव, विरासत भी है दमदार
फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका सिंह (यादव) का बैकग्राउंड भी उतना ही शानदार है. वह एक बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखती हैं. मोनिका के दादा साल 1952 से लगातार विधायक और मंत्री रहे, वहीं उनके पिता नरेंद्र सिंह यादव सपा के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और 8 बार के विधायक रह चुके हैं. इस भारी-भरकम विरासत को आगे बढ़ाने से पहले मोनिका एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में बतौर एचआर हेड (HR Head) काम कर रही थीं. बाद में उन्होंने कॉर्पोरेट लाइफ छोड़ दादा और पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और फर्रुखाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं. मोनिका सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव और पॉपुलर हैं.

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मुख्यमंत्री आवास पर 'विकास मॉडल' की प्रेजेंटेशन के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
इस हाई-प्रोफाइल जोड़े की प्रेम कहानी की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से हुई थी. दरअसल, सीएम योगी ने जिलों के विकास मॉडल को लेकर एक विशेष प्रेजेंटेशन कार्यक्रम रखा था. चूंकि गौरव चौधरी जर्मनी से इंटरनेशनल बिजनेस का बड़ा अनुभव लेकर आए थे.

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और मोनिका यादव परिणय सूत्र में बंधे
मोनिका यादव के पास मल्टीनेशनल कंपनी का कॉर्पोरेट अनुभव था, इसलिए मुख्यमंत्री ने दोनों को उनकी इसी काबिलियत और विज़न की वजह से विशेष रूप से बुलाया था. यूपी के पंचायती राज विभाग के कार्यालय में इस मीटिंग के दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई. विकास के मुद्दों पर शुरू हुई यह बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ी, दोनों के विचार मिले और आखिरकार दोनों ने अपने परिवारों की सहमति से शादी के पवित्र बंधन में बंधने का फैसला कर लिया.
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