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पालकी पर स्नान शास्त्र के विरुद्ध, जगदगुरु रामभद्राचार्य शंकराचार्य विवाद में खुलकर बोले

प्रयागराज के माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान विवाद पर अब जगदगुरु रामभद्राचार्य का बयान सामने आया है. जगदगुरु ने पालकी से शंकराचार्य का स्नान करने जाने को सही नहीं बताया है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर रामभद्राचार्य का बयान
  • जगदगुरु रामभद्राचार्य ने पालकी पर स्नान करने जाने को सही नहीं बताया
  • माघ मेला प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा था नोटिस
  • अविमुक्तेश्वरानंद ने प्राधिकरण के सवाल का जवाब 8 पन्नों में अंग्रेजी में भेजा है
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नई दिल्ली:

माघ मेले में मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान नहीं करने देने को लेकर मामला कानूनी नोटिस तक पहुंचा हुआ है. प्रशासन ने जहां अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य होने को लेकर ही प्रमाण मांग लिया तो जवाब देते हुए शंकराचार्य ने इस नोटिस को ही उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर और असंवैधानिक बताया. उधर, तुलसी पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर ही सवाल उठा दिया. उन्होंने शंकराचार्य के रथ या पालकी पर चढ़कर स्नान करने जाने को सही नहीं बताया. 

जानिए क्या है पूरा मामला

मौनी अमावस्या स्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान करने पहुंचे थे. लेकिन उनको स्नान नहीं करने दिया गया. ये विवाद लीगल नोटिस पर पहुंच गया है. मेला प्राधिकरण तक ये पूछ डाला कि आप शंकराचार्य कैसे? अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्राधिकरण के सवाल का जवाब 8 पन्नों में अंग्रेजी में भेजा है. उन्होंने जवाब में मेला प्राधिकरण के आरोपों को पूर्ण रूप से नकार दिया है. इतना ही नहीं नोटिस को अधिकार क्षेत्र से बाहर, मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया है. जवाब में कहा गया है कि ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने जीवनकाल में ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था. यह भी कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर किसी भी न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं है.

मानहानि की कार्रवाई की चेतावनी 

आपको बता दें कि मेला प्राधिकरण ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का हवाला देते हुए प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा है कि वो कैसे खुद को शंकराचार्य बता रहे हैं. जिसका जवाब दिया गया है. अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब में कहा गया है कि इस नोटिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सामाजिक, वित्तीय और प्रतिष्ठात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचाया है. यदि मेला प्राधिकरण 24 घंटे के भीतर यह नोटिस वापस नहीं लेता, तो उनके खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट सहित अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी.

उधर, तुलसी पीठ की पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर ही सवाल उठा दिया है. अवमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के मुद्दे पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बयान सामने आया है.उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या व्यवस्था शास्त्रों के विरुद्ध कार्य करती है, उसे न सुख मिलता है, न शांति और न ही सद्गति मिलती है. उनको रथ या पालकी में चढ़कर स्नान करने बिलकुल नहीं जाना चाहिए था. 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वर अभी भी माघ मेला की सड़क पर प्रोटेस्ट में बैठे हैं. अपने कैंप के बाहर ही टेंट लगाकर बैठे हैं. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेने वाले धर्म में बाधा क्यों बन रहे हैं चाहे कितने ही लोग स्नान कर ले शंकराचार्य की स्नान के बिना पूर्णता नहीं है. जैसे यज्ञ में नारियल की आहुति के बिना पूरी नहीं होती है. 

अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा 

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस मसले पर योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरा है. प्रशासन की तरफ से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से प्रमाणपत्र मांगे जाने को लेकर अखिलेश ने सवाल उठाया है. सपा इस मामले पर खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में आ गई है. इससे दो दिन पहले अखिलेश यादव ने शंकराचार्य को फोन किया और प्रयागराज से लेकर वाराणसी तक के मुद्दों का जिक्र किया था. 

पढ़ें, सनातन धर्म के पहले शंकराचार्य कौन थे? जानें किसे मिलता है ये सर्वोच्च पद

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