यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में अब राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक की नियुक्ति राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के अंकों की मेरिट के आधार पर होगी. राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को इस सिलसिले में प्रस्तावित संशोधन को मंजूरी दे दी. राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 में पांचवें संशोधन को मंजूरी दे दी गई. इसके तहत राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक की नियुक्ति के लिए विभिन्न कक्षाओं की परीक्षा में प्राप्त अंकों के बजाय राज्य लोक सेवा आयोग की लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा.
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परीक्षा के अंकों की मेरिट के आधार पर चयन से शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शी व्यवस्था के तहत अधिक मेधावी, योग्य एवं उपयुक्त शिक्षकों का चयन किया जा सकेगा, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार एवं छात्रों के शिक्षण के लिए अधिक उपयुक्त शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे.
VIDEO : यूपी में शिक्षा मित्रों का सत्याग्रह
मंत्रिमण्डल की बैठक में लिए गए एक और निर्णय के तहत बिजली चोरी की सूचना देने वाले को प्राप्त जुर्माने का 10 प्रतिशत तथा वहां छापामार कार्रवाई करने वाले प्रवर्तन दल को भी प्रोत्साहन राशि के रूप में प्राप्त शुल्क का 10 प्रतिशत देने की व्यवस्था की जाएगी. सरकार का मानना है कि बिजली चोरी की प्रभावी रोकथाम से प्रदेश में सुचारु विद्युत व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने तथा राजस्व प्राप्ति में सहायता मिलेगी.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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परीक्षा के अंकों की मेरिट के आधार पर चयन से शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शी व्यवस्था के तहत अधिक मेधावी, योग्य एवं उपयुक्त शिक्षकों का चयन किया जा सकेगा, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार एवं छात्रों के शिक्षण के लिए अधिक उपयुक्त शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे.
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मंत्रिमण्डल की बैठक में लिए गए एक और निर्णय के तहत बिजली चोरी की सूचना देने वाले को प्राप्त जुर्माने का 10 प्रतिशत तथा वहां छापामार कार्रवाई करने वाले प्रवर्तन दल को भी प्रोत्साहन राशि के रूप में प्राप्त शुल्क का 10 प्रतिशत देने की व्यवस्था की जाएगी. सरकार का मानना है कि बिजली चोरी की प्रभावी रोकथाम से प्रदेश में सुचारु विद्युत व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने तथा राजस्व प्राप्ति में सहायता मिलेगी.
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