- गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन के गार्ड को यार्ड यान में बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली थी
- गार्ड रामाशीष दास ने कुर्सी न मिलने पर ट्रेन आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया और ट्रेन करीब 50 मिनट खड़ी रही
- गार्ड का कहना था कि बैठने की व्यवस्था नहीं होने पर ड्यूटी करना जोखिम भरा हो सकता है
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक अजब-गजब मामला सामने आया है. ट्रेन के गार्ड रामाशीष दास को यार्ड यान में बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली तो वह इतना ज्यादा नाराज हो गए कि उन्होंने ट्रेन को आगे बढ़ाने से ही इनकार कर दिया. इस वजह से वैशाली एक्सप्रेस गोरखपुर स्टेशन पर करीब 50 मिनट तक खड़ी रही. यात्री भी इस बीच जूझते रहे. ये मामला हैरान करने वाला है. हालांकि गाार्ड और रेलवे का मामले पर अलग-अलग तर्क है. घटना 17 अगस्त की है. गार्ड की शिकायत देवरिया पहुंचने पर सुनी गई. अधिकारियों ने गार्ड को समझाया और उनको आगे बैठने के लिए एक छोटा स्टूल उपलब्ध कराया, तब जाकर ट्रेन वहां से आगे बढ़ी और गार्ड ने बरौनी तक ड्यूटी की.
घटना के बाद रेलवे प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो गए कि आखिर इतनी बड़ी चूक क्यों हुई. रेलवे प्रशासन का कहना है कि, गार्ड ब्रेकवान में इनबिल्ट सीट थी. अगर सीट नहीं होती तो दिल्ली से गोरखपुर कैसे पहुंची.अलग से सीट देने का कोई प्रावधान नहीं है. गार्ड की जो मांग थी वह गलत थी इसके लिए उन्होंने जांच कर कार्रवाई के लिए ECR (पूर्व मध्य रेलवे) को रिकमेंडेशन भेजा है .
टूटी कुर्सी होने पर गार्ड ने रोकी ट्रेन
वैशाली एक्सप्रेस को दिल्ली से ललितपुर जाना था. ट्रेन 17 अगस्त की सुबह करीब 9:47 बजे गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंची थी. ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर खड़ी हो गई. यहां स्टॉफ का शिफ्टिंग शुरू हुआ.उसी दौरान गार्ड रामाशीष दास ने चार्ज लिया.गार्ड जैसे ही ट्रेन में पहुंचे तो उनको पता चला कि वहां मौजूद कुर्सी टूटी हुई है वह भड़क गए.. यार्ड यान में बैठने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से गार्ड रामाशीष ने ट्रेन आगे ले जाने से मना कर दिया. इसका खामिया वैशाली ही नहीं पीछे से आ रही लखनऊ-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस के यात्रियों को भी भुगतना पड़ा. लखनऊ-पाटलिपुत्र एक्सप्रेस भी लगभग एक घंटे विलंब से प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंची. वहीं गार्ड ने मामले की शिकायत स्टेशन प्रबंधक से करते हुए कुर्सी मुहैया कराने की मांग की. लेकिन उनकी परेशानी का तुरंत समाधान नहीं होने पर उन्होंने ट्रेन आगे ले जाने से ही इनकार कर दिया. हालांकि बाद में उनको छोटी टेबल उपलब्ध कराई गई.

क्या है गार्ड का तर्क?
गार्ड रामाशीष 8 महीने बाद रिटायर होने वाले हैं.उन्होंने मेमो में लिखा है कि, ट्रेन बिना कुर्सी के गोरखपुर पहुंची. उन्होंने जब चार्ज लिया है तो गार्ड यान में कुर्सी उपलब्ध नहीं थी. कुर्सी नहीं मिलने के चलते ट्रेन 50 मिनट खड़ी रही. देवरिया में एक छोटा टेबल दिया गया. गार्ड रामदास ने शिकायत में बताया कि उनके सेवानिवृत्ति में महज आठ माह बच्चे हैं, ऐसे में वे खड़े होकर कैसे ड्यूटी करें. जबकि, डायरी में हर गतिविधियां नोट करनी पड़ती हैं. नए एलएचबी ब्रेक वान में कुर्सी की भी व्यवस्था ट्रेनों में नए आधुनिक लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोच, पावरकार में अटैच ब्रेक वान लग रहे हैं.सबकी अलग-अलग डिजाइन होती है.ब्रेक वान में कुर्सी इनबिल्ट होती है. अलग से भी कुर्सी होती है.अटैच पावरकार में भी अधिकतम दो कुर्सियां होती हैं, जिनका उपयोग गार्ड करते रहते हैं.कुर्सी नहीं मिलने पर बाक्स पर बैठकर ड्यूटी निभाते हैं, नहीं तो खड़े रहना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर सुरक्षा सबसे पहले है. गार्ड ने कहा कि वे ये बात जानते थे कि ट्रेन देर से चलने पर सवाल उठ सकते हैं. लेकिन उनको लगा कि अगर उन्होंने ये मुद्दा उठाए बिना ही ट्रेन आगे बढ़ने दी तो यात्रा के दौरान कुछ भी अप्रिय घटना हो सकती है. अगर ऐसा होता तो इसकी जिम्मेदारी उनकी होती. यही सोचकर उन्होंने ट्रेन को आगे नहीं बढ़ने दिया.
रेलवे ने कही गार्ड पर कार्रवाई की बात
इस मामले पर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार का कहना है कि वैशाली एक्सप्रेस ईस्ट सेंट्रल रेलवे की ट्रेन है. इसका गोरखपुर में ठहराव सिर्फ पासिंग के तौर पर होता है. उन्होंने कहा कि गार्ड यान में इनबिल्ट चेयर होती है, लेकिन अलग से स्टूल मुहैया कराने का कोई प्रावाधन नहीं है. ट्रेन जब दिल्ली से रवाना हुई तो ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं दी गई थी.

अलग से कुर्सी देने का कोई प्रावधान नहीं
उन्होंने कहा कि कुर्सी नहीं होने पर गार्ड टूल बॉक्स पर बैठकर ड्यूटी करते हैं. वरना खड़ा भी रहना पड़ता है. गार्ड ने स्टेशन प्रबंधन से कुर्सी मांगने के साथ ही ट्रेन को सिग्नल देने से भी मना कर दिया. इसकी वजह से ट्रेन गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर काफी देर तक खड़ी रही और सभी यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. कुर्सी टूटी होती तो दिल्ली से गोरखपुर तक ड्यूटी करने वाले गार्ड भी इसकी शिकायत करते. गार्ड ने जो किया वह गलत है. मामले में आधिकारिक कार्रवाई की जाएगी.
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