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थैंक्यू योगी जी...19 साल बाद खुशी ने बोला पहला शब्द, सीएम से मुलाकात की ज़िद और बदल गई ज़िंदगी

कानपुर की 19 वर्षीय मूक-बधिर खुशी गुप्ता को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से कोक्लियर इम्प्लांट मिला. इलाज के बाद खुशी ने पहली बार बोला-‘थैंक्यू योगी जी’, अब उसका सपना पुलिस अफसर बनने का है.

थैंक्यू योगी जी...19 साल बाद खुशी ने बोला पहला शब्द, सीएम से मुलाकात की ज़िद और बदल गई ज़िंदगी
सीएम से मुलाकात की ज़िद और बदल गई ज़िंदगी
कानपुर:

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति संवेदनशील हो, तो चमत्कार भी संभव है. कानपुर की 19 वर्षीय खुशी गुप्ता के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. जन्म से जो बेटी न सुन सकती थी और न बोल सकती थी, आज उसकी दुनिया बदल चुकी है. 19 साल के लंबे सन्नाटे के बाद खुशी ने जब पहली बार अपनी जुबान खोली, तो उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे- थैंक्यू योगी जी.

जन्म से ही मूक-बधिर थी

यह कहानी सिर्फ एक इलाज की नहीं, बल्कि एक मूक-बधिर लड़की के साहस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता की मिसाल है. ग्वालटोली क्षेत्र की रहने वाली खुशी जन्म से ही मूक-बधिर थी. अपनी बात न कह पाने की तड़प उसे अक्सर परेशान करती थी, लेकिन उसके मन में एक उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसकी मदद जरूर करेंगे. इसी उम्मीद के सहारे, 20 नवंबर 2025 को खुशी बिना किसी को बताए घर से निकल पड़ी. वह कानपुर से लखनऊ तक का लगभग 90 किलोमीटर का सफर तय कर मुख्यमंत्री आवास तक जा पहुंची.

सीएम आवास के बाहर रोती हुई मिली

22 नवंबर को जब वह सीएम आवास के बाहर रोती हुई मिली, तो पुलिस उसे थाने ले गई. वहां खुशी ने इशारों और अपनी स्क्रैच आर्ट के जरिए पुलिस को समझाया कि वह बाबा जी (CM योगी) से मिलना चाहती है. खुशी के पिता कल्लू बताते हैं कि वे लोग बेटी के गायब होने से परेशान थे, तभी लखनऊ पुलिस का फोन आया. जब वे लखनऊ पहुंचे, तो पता चला कि खुशी की जिद मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है. 26 नवंबर 2025 को एक सरकारी गाड़ी खुशी और उसके परिवार को लेकर मुख्यमंत्री आवास पहुंची.

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सीएम योगी ने न सिर्फ खुशी से आत्मीयता से मुलाकात की, बल्कि उसकी पढ़ाई, कान की मशीन और परिवार के लिए आवास की व्यवस्था के कड़े निर्देश दिए. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया. सीएम के निर्देश पर खुशी का इलाज शुरू हुआ. शुरुआत में 5 दिसंबर को एक छोटा ऑपरेशन हुआ, लेकिन उससे लाभ नहीं मिला. इसके बाद मल्होत्रा अस्पताल के डॉ. रोहित मल्होत्रा ने जांच की और बताया कि खुशी को 'कोक्लियर इम्प्लांट' (Cochlear Implant) की जरूरत है, जिसका खर्च 6 से 7 लाख रुपए है. एक गरीब परिवार के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी, लेकिन सरकार ने इसका पूरा जिम्मा उठाया. 

खुशी का सफल ऑपरेशन किया गया

फाउंडेशन और दिव्यांगजन अधिकारी के सहयोग से 26 जनवरी 2026 को, गणतंत्र दिवस के दिन खुशी का सफल ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन सफल रहा और अब खुशी सुनने लगी है. वह धीरे-धीरे बोलने का प्रयास कर रही है. उसकी मां गीता भावुक होकर बताती हैं, पहले वह सिर्फ इशारों में बात करती थी. अब वह कहती है- 'मम्मी, मुझे ये खाना है.' हमें तो उम्मीद ही नहीं थी कि हमारी बेटी कभी बोल पाएगी. आज उसका भविष्य उज्ज्वल है और हम योगी जी के आभारी हैं.

खुशी को अभी स्पीच थेरेपी दी जा रही है

डॉक्टरों के मुताबिक, खुशी को अभी स्पीच थेरेपी दी जा रही है. तीन महीने में वह काफी हद तक बोलने लगेगी और एक साल के भीतर सामान्य बच्चों की तरह बातचीत कर सकेगी. खुशी अब नए सपनों के साथ आगे बढ़ रही है. उसका कहना है कि वह भविष्य में पुलिस अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है. अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए खुशी ने एक खास पेंटिंग बनाई है. इस पेंटिंग में उसने उस पल को उकेरा है जब सीएम योगी ने उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था. खुशी अब यह पेंटिंग खुद अपने पैरों पर चलकर और अपनी जुबान से शुक्रिया अदा करते हुए मुख्यमंत्री को दी है.

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