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रामपुर में आजम का कायदा कैसे खत्म हुआ? 10 साल में क्या से क्या हो गया

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रहे आजम खान की सियासत अब समाप्त होती दिख रही है. एक समय पूरे यूपी में आजम के नाम की तूती थी, लेकिन फर्जीवाड़ों की फेहरिस्त और कानूनी कार्रवाई से रामपुर के 'शेर' कहे जाने वाले आजम अब अपने शहर में सुस्त नजर आ रहे हैं.

रामपुर में आजम का कायदा कैसे खत्म हुआ? 10 साल में क्या से क्या हो गया
10 बार विधायक, दो बार सांसद, 4 बार मंत्री रह चुके यूपी के कद्दावर नेता आजम खान अब अपनी बची-खुची साख बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं.
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  • समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता रहे आजम खान का सियासी सफर अब अंतिम दौर पर है.
  • जिस रामपुर से आजम की राजनीति की शुरुआत हुई, वहां उनके ड्रीम प्रोजेक्ट पर बुलडोजर चलाने की तैयारी है.
  • 10 बार के विधायक, 4 बार मंत्री, दो बार सांसद रहे आजम के अर्श से फर्श तक पहुंचने की कहानी पढ़ें.
रामपुर/लखनऊ:

Azam Khan News: करीब 40 साल तक यूपी के रामपुर में एकछत्र राज करने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का दबदबा अब खत्म होता जा रहा  है. रामपुर से 10 बार विधायक चुने गए आजम खान दो बार सांसद भी बने. 1980 के दशक से आजम खान का दौर शुरू हुआ, पहली बार इसी साल रामपुर से आजम खान विधायक बने. फिर 1985, 1989, 1991, 1993, 2002, 2007, 2012, 2017 और आखिरी बार 2022 के विधानसभा चुनाव में भी आजम जीते. मुलायम सिंह के जमाने में आजम खान की तूती बोलती थी. बीते कुछ सालों में धीरे-धीरे आजम खान का न केवल यूपी की राजनीति से हाशिये पर गए, बल्कि रामपुर में भी उनका प्रभाव खत्म होते गया.

आजम खान की पत्नी ने पुलिस को बाहर निकाला

इन सब के बीच बुधवार की शाम खबर आई की रामपुर जिला प्रशासन ने यूनिवर्सिटी परिसर के 38 भवनों को अवैध घोषित कर इन्हें ध्वस्त करने का प्रशासनिक आदेश दिया है. जिससे रामपुर का सियासी पारा चढ़ गया है. इस बीच गुरुवार को आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक डॉक्टर तंजीन फातिमा जौहर यूनिवर्सिटी पहुंची जहां उन्होंने कहा कि उनके पास 15 दिन का समय है. इस दौरान उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को यूनिवर्सिटी से बाहर करवा दिया. उन्होंने परिसर के अंदर तैनात पुलिसकर्मियों से बाहर जाने को कहा. 

आम लोगों के लिए खुली जौहर यूनिवर्सिटी जाने वाली मुख्य सड़क

यहीं नहीं उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने आजम खान के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर से गुजरने वाली मुख्य सड़क को सार्वजनिक सड़क घोषित कर दिया है और विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ‘साइन बोर्ड' लगा दिया है कि यह सड़क आम जनता के आवागमन के लिए खुली है.यह तीन किलोमीटर लंबी, चार लेन वाली सीमेंट-कंक्रीट सड़क है, जिसका निर्माण अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में 2016-17 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने लगभग 17.16 करोड़ रुपये की लागत से कराया था.

कैसा था आजम का दबदबा? भैंस चोरी केस से समझिए

आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार में 4 बार कैबिनेट मंत्री और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं. यूपी की सियासत में आजम खान का कितना दबदबा था? इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि जब 2014 में आजम के फार्महाउस से 7 भैसों की चोरी हुई तो उसे खोजने के लिए पुलिस की कई टीम लगा दी गई थी. 

पुलिस ने 24 से 36 घंटे के भीतर कड़ी मशक्कत कर सभी भैंसों को ढूंढ निकाला था. बरामदगी के बाद जब भैंसों को थाने लाया गया तो उन्हें मच्छरों से बचाने के लिए कॉयल और पंखे चलाए गए और खाने में गुड़ और हरा चारा परोसा गया था. समझ सकते हैं जब आजम के भैसों का ऐसा रौला था तो नेता जी ऐसा दबदबा रहा होगा. 

आजम खान का कैसे शुरू हुआ बुरा वक्त?

लेकिन 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी और 2017 में यूपी में योगी की सरकार बनने के बाद आजम खाम का बुरा वक्त शुरू हुआ. एक-एक कर आजम खान से जुड़े कई केस सामने आए. वो फाइलें बंद थी, वो खुली, कोर्ट-कचहरी का चक्कर शुरू हुआ, फिर आजम की जेल की सजा हुई, उनके परिवार के कई लोग भी सजा की जद में आए. 

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पिता से लेकर पुत्र तक के दस्तावेज में झोल

भड़काऊ भाषण और फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जैसे मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई. कानून के तहत चुनाव लड़ने पर रोक लगने से उनका सीधा राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म हो गया. आजम खान ने अपने बेटे अब्दुल्ला आजम को कम उम्र में चुनाव लड़ाने के लिए कथित तौर पर दो जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड बनवाए. इस एक बड़ी चूक ने विरोधियों को कानूनी सबूत दे दिए, जिसके बाद उन पर एक के बाद एक कई मुकदमे दर्ज हुए.

रामपुर में आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का मुख्य द्वार.

रामपुर में आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का मुख्य द्वार.
Photo Credit: सोशल मीडिया

आजम के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर एक्शन

अभी आजम खान रामपुर जेल में बंद है. आजम खान के दबदबे पर चोट की हालिया कार्रवाई जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी है. आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी उनके पतन का बड़ा कारण बना. इस पर जमीन कब्जाने और सरकारी पैसे के दुरुपयोग के करीब 100 से अधिक मामले दर्ज हुए.

जौहर यूनिवर्सिटी के 38 कमरों को ढहाने का आदेश

हाल ही में रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी के अवैध बने 38 कमरों को ढहाने का आदेश भी जारी किया है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान ने की थी. वर्तमान में जेल में बंद आजम खान विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति तथा इसकी संचालक संस्था मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं.

आजम खान की गैर-मौजूदगी और कानूनी शिकंजे के कारण उनके करीबी सहयोगियों ने उनका साथ छोड़ दिया. रामपुर लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिससे रामपुर पर उनका नियंत्रण समाप्त होता गया.

2019 से बंद था रास्ता

अधिकारियों ने बताया कि सड़क विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार से दूसरे छोर तक 450 एकड़ के परिसर से होकर गुजरती है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 2019 में मुख्य द्वार बंद करने के बाद से प्रवेश प्रतिबंधित था, यहां तक कि पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भी प्रवेश करने से रोक दिया गया था.

PWD के कार्यकारी अभियंता किशन वीर सिंह ने कहा कि विभाग ने अब इस सड़क पर 'आम रास्ता' दर्शाने वाले बोर्ड लगा दिए हैं, जिससे आम लोगों को इस मार्ग पर बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने की अनुमति मिल गई है.

इंजीनियर किशन वीर सिंह ने से कहा, 'विश्वविद्यालय द्वार से चार लेन की सीमेंट-कंक्रीट सड़क को पीडब्ल्यूडी द्वारा 2016 में लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी. इसमें करीब 13.5 करोड़ रुपये के सिविल निर्माण कार्य कराए गए, जबकि शेष राशि करों और अन्य मदों पर खर्च की गई.'

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आजम खान के खिलाफ RDA के फैसले पर सपा और कांग्रेस ने क्या कहा?

आजम खान की यूनिवर्सिटी पर एक्शन से जुड़े RDA के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता फखरूल हसन ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार विकास के बजाय तोड़फोड़ की नीति अपना रही है. उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और सरकार शिक्षण संस्थानों को निशाना बना रही है.

वहीं, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर चुनिंदा विपक्षी नेताओं के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई कर रही है. उन्होंने सवाल किया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े उन लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिन पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे. रावत ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता इन घटनाक्रमों को देख रही है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देगी.

यह भी पढ़ें - आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर चलेगा बुलडोजर, 40 में से 38 भवनों को गिराने का नोटिस जारी

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