उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव. (फाइल फोटो)
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को मतपत्र से कराए जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि उपचुनावों में मतदान ईवीएम के बजाय मत्रपत्र से कराने पर विचार किया जाए. इसके लिए वह जनवरी के दूसरे हफ्ते में विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे.
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सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि अखिलेश के साथ पार्टी पदाधिकारियों की हुई बैठक में लोकसभा के होने वाले उपचुनावों-गोरखपुर और फूलपुर में ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से मतदान कराने पर चर्चा की गई. बैठक में अखिलेश ने कहा कि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव के संबंध में जनता के मन में विश्वास होना चाहिए. ईवीएम के बारे में तमाम शंकाए हैं, अतः अब बैलेट पेपर से मतदान होना चाहिए.
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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ परंपराओं और विश्वसनीय तथा पारदर्शी व्यवस्था से ही जनता का भरोसा अर्जित होता है. ईवीएम मशीनों से जनता का विश्वास खंडित हुआ है. चुनावों में कई जगह ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं. मतदान में कुल मतदाता संख्या और पड़े हुए मतों में अंतर की भी शिकायतें मिलीं. यह स्थिति जनतंत्र के लिए खतरे का संकेत है.
VIDEO : निकाय चुनाव में हार पर बोली सपा, ईवीएम से चुनाव में हारे
सपा का दावा है कि प्रदेश में हाल ही में हुए निकाय चुनाव में जहां मतपत्रों से मतदान हुआ है वहां भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को कम वोट मिले थे. प्रवक्ता ने कहा कि सपा मानती है कि आज देश में जिस एकाधिकारी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है वह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ लक्षण नहीं है. इस संबंध में विपक्ष के बीच साझा विचार होना समय की आवश्यकता है. इसलिए अखिलेश ने विपक्ष के साथ मिलकर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र मतदान के लिए मत पत्र की मांग को बल देने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
(इनपुट : भाषा)
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सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया कि अखिलेश के साथ पार्टी पदाधिकारियों की हुई बैठक में लोकसभा के होने वाले उपचुनावों-गोरखपुर और फूलपुर में ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से मतदान कराने पर चर्चा की गई. बैठक में अखिलेश ने कहा कि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव के संबंध में जनता के मन में विश्वास होना चाहिए. ईवीएम के बारे में तमाम शंकाए हैं, अतः अब बैलेट पेपर से मतदान होना चाहिए.
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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ परंपराओं और विश्वसनीय तथा पारदर्शी व्यवस्था से ही जनता का भरोसा अर्जित होता है. ईवीएम मशीनों से जनता का विश्वास खंडित हुआ है. चुनावों में कई जगह ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं. मतदान में कुल मतदाता संख्या और पड़े हुए मतों में अंतर की भी शिकायतें मिलीं. यह स्थिति जनतंत्र के लिए खतरे का संकेत है.
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सपा का दावा है कि प्रदेश में हाल ही में हुए निकाय चुनाव में जहां मतपत्रों से मतदान हुआ है वहां भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को कम वोट मिले थे. प्रवक्ता ने कहा कि सपा मानती है कि आज देश में जिस एकाधिकारी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है वह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ लक्षण नहीं है. इस संबंध में विपक्ष के बीच साझा विचार होना समय की आवश्यकता है. इसलिए अखिलेश ने विपक्ष के साथ मिलकर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र मतदान के लिए मत पत्र की मांग को बल देने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
(इनपुट : भाषा)
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