PM-AASHA योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने, कृषि बाजार को मजबूत बनाने और उपभोक्ताओं के लिए खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रखने के बीच एक संतुलन बनाने वाली योजना है. यानी यह किसानों की आय सुरक्षित करने वाली सरकार की पहल है. प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) यह केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है, जिसे साल 2018 में शुरू किया गया था. इस योजना का मुख्य उद्देश्य MSP को प्रभावी ढंग से लागू करना है. जिससे बाजार में फसल के दाम गिरने के बाद भी किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके. साथ ही कम दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर न हो.
केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए PM-AASHA के तहत 7,200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो 2025-26 के 6,941.36 करोड़ रुपये से ज्यादा हैं. 2024-25 में इस योजना के तहत वास्तविक खर्च 5,437.99 करोड़ रुपये रहा था.
PM-AASHA क्या है और क्यों है जरूरी
PM-AASHA एक ऐसा सिस्टम है जिसके जरिए सरकार यह पक्का करना चाहती है कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले. इसमें चार मुख्य भाग हैं प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS), प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड (PSF), प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) और मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS). हालांकि इसमें कौन सा तरीका अपनाया जाए, यह फसल और बाजार की मौजूदा स्थितियों पर निर्भर करता है.
🔰Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan (PM-AASHA)
— PIB India (@PIB_India) August 21, 2026
▪️Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan (#PMAASHA) is the Government's flagship price-support framework for remunerative prices for farmers
▪️It includes various schemes to strengthen the implementation of the… pic.twitter.com/VbLbVDz5iK
प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) क्या है
प्राइस सपोर्ट स्कीम यानी PSS तरीका तब अपनाया जाता है जब बाजार में फसल के दाम MSP से नीचे गिरता है. ऐसे में NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियां दाल, तिलहन और खोपरा सीधे किसानों से MSP पर खरीदते हैं. इसके अलावा अरहर, उड़द और मसूर के फसल में राज्य के कुल उत्पादन की 100 फीसदी तक खरीद की जा सकती है.
प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) क्या है
प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम कीमत में कमी की भरपाई करने वाली योजना है, इसके तहत किसानों को अपनी उपज किसी सरकारी एजेंसी को फिजिकल रूप से बेचने की जरूरत नहीं होती है. बल्कि योग्य किसानों को MSP और नोटिफाइड बाजार में असल बाजार में चल रही कीमत के बीच का अंतर मिलता है. यह भुगतान MSP वैल्यू के 15 प्रतिशत तक की सीमा के अधीन होता है. इसका भुगतान सीधे किसान के बैंक अकाउंट में दिया जाता है. यह तरीका मुख्य रूप से तिलहन फसल के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका मकसद बड़े पैमाने पर फिजिकल खरीद और स्टोरेज की जरूरत के बिना MSP सुरक्षा देना है.
प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड क्या है
प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड कीमतों में स्थिरता लाने वाला फंड है जो जरूरी कृषि उत्पादों की कीमतों में तेजी से होने वाले उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए बनाया गया है. इसके तहत दाल, प्याज और आलू जैसी जरूरी चीजों का बफर स्टॉक बनाकर रखा जाता है. बाद में कीमतों में आई कमी या बढ़ती कीमतों के समय इन स्टॉक को जारी किया जा सकता है ताकि कीमतों में तेजी को रोका जा सके.
प्राइस स्टेबलाइज़ेशन फंड' को PM-AASHA के साथ मिला दिया गया है, लेकिन इसे अब भी 'उपभोक्ता मामलों के विभाग' (Department of Consumer Affairs) द्वारा ही मैनेज किया जाता है.
मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) क्या है
मार्केट इंटरवेंशन स्कीम उन फसलों के लिए है जो जल्दी खराब होने वाली होती है, यह कृषि और बागवानी फसलों के लिए है जिन पर MSP लागू नहीं होता है. इसमें टमाटर, प्याज और आलू जैसी फसलें शामिल हो सकती हैं, जब बाजार में इनकी कीमतें तेजी से गिरती हैं. तब यह स्कीम लागू की जाती है, जब कीमतें पिछले सामान्य सीजन की दरों की तुलना में कम से कम 10 प्रतिशत गिर जाती हैं.
यह काम NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियों के जरिए किए जाते हैं, और केंद्र व राज्य सरकारें इसकी लागत आपस में बांटती हैं. यह स्कीम खासकर तब बहुत काम की होती है जब बहुत ज्यादा पैदावार होती है और बाजार में बहुत ज्यादा सप्लाई होने से कीमतें बहुत गिर सकती हैं.
बता दें, खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आधार ऑथेंटिकेशन, e-NAM, e-Samriddhi और e-Samyukti जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं.
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