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क्या RBI के MANI App से पहचाने जा सकते हैं नकली नोट? जानिए इस ऐप की असली हकीकत और फीचर्स

सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा होती है कि RBI ने नकली नोट पहचानने वाला ऐप जारी किया है. जानिए क्या है आरबीआई का MANI (Mobile Aided Note Identifier) ऐप की असली हकीकत, इसके बेहतरीन फीचर्स और दृष्टिबाधित लोगों के लिए इसके काम करने का आसान तरीका.

क्या RBI के MANI App से पहचाने जा सकते हैं नकली नोट? जानिए इस ऐप की असली हकीकत और फीचर्स
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए MANI (Mobile Aided Note Identifier) ऐप लॉन्च किया है.
@RBI

RBI launched MANI App: डिजिटल इंडिया के इस दौर में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए MANI (Mobile Aided Note Identifier) ऐप लॉन्च किया है. इसकी जानकारी आरबीआई ने सोशल मीडिया साइट X पर सोमवार यानी 13 जुलाई 2026 को एक वीडियो जारी कर दी. आम तौर पर इंटरनेट या सोशल मीडिया पर इसे "नकली नोट पहचानने वाला ऐप" समझ लिया गया, लेकिन इसकी असल हकीकत थोड़ी अलग है.

आइए विस्तार से जानते हैं कि यह ऐप असल में क्या काम करता है और दृष्टिबाधित (visually impaired) लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में ये कैसे मदद कर रहा है. दरअसल, MANI ऐप को खास तौर से दृष्टिबाधित लोगों की मदद के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे बिना किसी दूसरे की मदद के भारतीय करेंसी नोटों के मूल्य (Denomination) की पहचान कर सकें. यह ऐप वित्तीय स्वतंत्रता और सब को साथ लेकर चलने की सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

नकली नोटों की  पहचान नहीं करता है MANI App 

आरबीआई का MANI App खास तौर से दृष्टिबाधित लोगों की मदद के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे बिना किसी दूसरे की मदद के भारतीय करेंसी नोटों के मूल्य की पहचान कर सकें. ध्यान रखें कि यह ऐप केवल नोट के मूल्य जैसे ₹10, ₹50, ₹100, ₹500 की पहचान करता है. यह नोट असली है या नकली नोटों की जांच नहीं करता है. साथ ही, यह ऐप फटे पुराने या बहुत ज्यादा मुड़े हुए नोटों पर ठीक से काम नहीं कर पाता है. 

ये हैं MANI ऐप के 4 सबसे खास फीचर्स 

  • इस ऐप को एक बार डाउनलोड करने के बाद इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन या मोबाइल डेटा की जरूरत नहीं पड़ती. यह बिना नेटवर्क वाले दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से काम करता है.
  • यूजर को बस अपने फोन के रियर कैमरे के सामने नोट को रखना होता है और ऐप तुरंत उसकी पहचान कर लेता है.
  • यह ऐप केवल बोलकर ही नहीं, बल्कि अलग अलग वाइब्रेशन पैटर्न के जरिए भी नोट की वैल्यू बताता है, जो सुनने और देखने दोनों में अक्षम लोगों के लिए बेहद मददगार है.
  • यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी के साथ साथ कई क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है.

 जानिए- यह ऐप कैसे काम करता है?

MANI ऐप का इस्तेमाल करना बेहद ही आसान है. इसकी पूरी कार्यप्रणाली को 3 आसान चरणों में समझा जा सकता है, जो नीचे दिए गए हैं. 

नोट की तस्वीर लेना (Capturing the Note)

जैसे ही यूजर ऐप को ओपन करता है, मोबाइल का बैक कैमरा खुद-ब-खुद चालू हो जाता है. इसके बाद ऐप में मौजूद वॉइस कमांड या वाइब्रेशन के जरिए यूजर को संदेश मिलता है कि नोट को कैमरे के सामने कितनी दूरी और किस पोजीशन में रखना है.

इमेज प्रोसेसिंग (Offline Processing)

कैमरे के सामने नोट आते ही ऐप का इंटरनल मशीन लर्निंग एल्गोरिदम नोट के आकार, डिजाइन और उसके खास फीचर्स का तुरंत विश्लेषण करता है. यह पूरी प्रोसेसिंग पूरी तरह डिवाइस के अंदर ऑफलाइन होती है.

रिजल्ट की जानकारी देना (Delivering the Output)

नोट की पहचान होते ही ऐप तीन अलग-अलग तरीकों से यूजर तक नोट की सही जानकारी पहुंचाता है. 

  1. यह ऐप यूजर के जरिए चुनी गई भाषा में नोट का मूल्य जैसे "पांच सौ रुपये" बोलकर बताता है.
  2. आंशिक दृष्टि वाले लोगों के लिए स्क्रीन पर बड़े अक्षरों और चमकीले रंगों में नोट की वैल्यू लिख कर सामने आ जाती है.
  3. अलग-अलग नोटों के लिए फोन में खास वाइब्रेशन पल्स महसूस होती है, जिससे बिना आवाज सुने भी नोट को पहचाना जा सकता है.

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