- त्योहारों के सीजन में मिट्टी के दीयों और बर्तनों का व्यापार आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी बन चुका है.
- लोकल फॉर वोकल और इको फ्रेंडली जीवनशैली के कारण मिट्टी के उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है.
- इस व्यवसाय में प्रारंभिक निवेश 5000 से 15 हजार रुपये तक होता है और मुनाफा सौ से तीन सौ प्रतिशत तक हो सकता है.
भारत में दिवाली और त्योहारों के सीजन में मिट्टी के बर्तनों और दीयों का व्यापार केवल पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक बेहद फायदेमंद और हाई मुनाफे वाला सीजनल बिजनेस बन चुका है. लोकल फॉर वोकल और इको फ्रेंडली जीवनशैली के बढ़ते क्रेज ने इस स्वदेशी कारोबार की मांग को कई गुना बढ़ा दिया है. मात्र 5,000 रुपये से 15,000 रुपये की शुरुआती पूंजी लगाकर आप दिवाली के इस सीजन में 100 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक का तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं.
आधुनिकता और चकाचौंध के इस दौर में भी दिवाली के मौके पर मिट्टी के दीयों और पारंपरिक बर्तनों की अहमियत कम नहीं हुई है. बल्कि पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्वदेशी उत्पादों के प्रचार प्रसार ने इस पारंपरिक व्यवसाय को एक नया रूप दे दिया है. इसके साथ ही अब मिट्टी के दीये केवल सामान्य तेल वाले दीयों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि डिजाइनर, वैक्स यानी मोम से सजे और फैंसी टेराकोटा शोपीस के रूप में बाजार में धूम मचा रहे हैं. दिवाली के सीजन में यह धंधा बेहद कम समय में भारी रिटर्न देने वाला एक शॉर्ट टर्म बिजनेस मॉडल बनकर उभरा है. आइए समझते हैं इस कारोबार का पूरा गणित.
दिवाली में मिट्टी के इन उत्पादों की है भारी मांग
त्योहारी सीजन में केवल साधारण दीये ही नहीं बिकते, बल्कि मिट्टी से बने कई फैंसी और उपयोगी सामानों की भारी मांग रहती है.
- बाजार में साधारण दीयों के साथ साथ बहुरंगी, हैंड पेंटेड, लटकन वाले दीये और मैजिक दीये, जिसमें तेल का रिसाव नहीं होता है, उसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है.
- त्योहारी सीजन में शादियों, पार्टियों और घरेलू इस्तेमाल के लिए मिट्टी की हांडी, कुल्हड़, कड़ाही, पानी की बोतलें और जग की बिक्री तेजी से बढ़ती है.
- लक्ष्मी गणेश की मिट्टी की कलात्मक मूर्तियां, मिट्टी की गुल्लक और बच्चों के खेलने वाले पारंपरिक मिट्टी के घरौंदे और खिलौने दिवाली पूजा का अनिवार्य हिस्सा होते हैं, लिहाजा इसकी भी भारी मांग रहती है.
लागत और मुनाफे का सटीक गणित
मैन्युफैक्चरिंग स्तर पर शुरुआती निवेश
अगर आप छोटे स्तर पर खुद इसे बनाने का काम शुरू करते हैं, तो इलेक्ट्रिक चाक, अच्छी मिट्टी और पकाने की भट्टी के लिए 15,000 से 25,000 रुपये का शुरुआती निवेश काफी है.
रिटेल स्तर पर शुरुआती निवेश
अगर आप केवल थोक बाजार से खरीदकर खुदरा बेचना चाहते हैं, तो मात्र 5,000 से 10,000 रुपये की पूंजी में भी दुकान या स्टॉल लगाया जा सकता है.
मुनाफे की दर
- इस व्यापार में मुनाफा आमतौर पर 100 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक होता है.
- थोक बाजार में साधारण दीया 30 से 50 पैसे का पड़ता है, जिसे खुदरा बाजार में आसानी से 2 से 3 रुपये प्रति दीया बेचा जाता है.
- वहीं, डिजाइनर और वैक्स यानी मोम से भरे प्रीमियम दीये थोक में 2 से 3 रुपये के पढ़ते हैं, जो रिटेल मार्केट में 10 से 15 रुपये प्रति पीस बिकते हैं.
कारोबार को मुनाफेदार बनाने के आधुनिक तरीके
- अब मिट्टी के उत्पादों की बिक्री केवल सड़क किनारे ठेले या पटरी तक सीमित नहीं है. आधुनिक तरीके अपनाकर इससे सालभर और खासकर दिवाली पर तगड़ी कमाई की जा सकती है.
- अमेज़न, फ्लिपकार्ट और सोशल मीडिया जैसे Instagram या Facebook के जरिए नक्काशीदार दीयों, मिट्टी की बोतलों और कुकवेयर सेट को काफी अच्छे दामों पर ऑनलाइन बेचा जा रहा है.
- आज के समय में बड़ी कंपनियां दिवाली पर अपने कर्मचारियों को प्लास्टिक या चीनी बर्तनों के बजाय ईको फ्रेंडली मिट्टी के गिफ्ट हैंपर्स जैसे कुल्हड़ सेट, टेराकोटा शोपीस और फ्लोटिंग दीये देना पसंद कर रही हैं.
- साधारण दीयों पर ऐक्रेलिक पेंट, कुंदन वर्क, ग्लिटर या वैक्स भरकर उन्हें प्रीमियम दीयों में बदल दिया जाता है, जिससे उनकी ब्रांड वैल्यू और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं.
चुनौतियां और जरूरी सावधानियां
- मिट्टी के कच्चे उत्पादों को सुखाने के लिए तेज धूप की आवश्यकता होती है. त्योहार के समय बेमौसम बारिश होने पर कारीगरों का काफी नुकसान हो सकता है.
- मिट्टी के बर्तन बहुत नाजुक होते हैं. ट्रांसपोर्टेशन के दौरान इनके टूटने का खतरा रहता है, इसलिए इनकी पैकेजिंग और हैंडलिंग पर विशेष ध्यान देना पड़ता है.
- चीनी लाइट्स और दीयों से मुकाबला करने के लिए इकोफ्रेंडली और स्वदेशी मार्केटिंग का प्रभावी इस्तेमाल करना जरूरी है.
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