दिल्ली के पटपड़गंज इलाके में रहनेवाले सुरेश जायसवाल गर्मी के पिछले सीजन तक बिजली के बिल से परेशान थे. इस बार की गर्मी में बिजली के बिल देखकर जब उनके पड़ोसियों के माथे पे पसीना आ रहा है, तो सुरेश जी टेंशन फ्री होकर एसी (AC) की हवा खा रहे हैं. पड़ोसियों का बिजली बिल 4,000 से 7,000 रुपये तक आ रहा है, जबकि घर में 3-4 एसी चलाने के बावजूद सुरेश जी का बिल 'जीरो' आ रहा है. है न कमाल की बात! करीब 6 महीने पहले जायसवाल के एक फैसले से ये कमाल संभव हुआ.
आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि ऐसा कैसे संभव है. इसका जवाब दिया है- दिल्ली में बिजली डिस्ट्रिब्यूशन करने वाली कंपनी BSES ने. इसने अपने X अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर इसका फॉर्मूला समझाया है. BSES का कहना है कि अगर दिल्ली के लोग, हाउसिंग सोसायटीज (RWAs) और कारोबारी अपनी छतों का सही इस्तेमाल करें, तो वे न सिर्फ अपना बिजली बिल पूरी तरह जीरो कर सकते हैं, बल्कि हर साल करीब 1 लाख रुपये तक की बचत और कमाई भी कर सकते हैं.
कैसे आपके घर की छत चमकाएगी किस्मत?
BSES के मुताबिक, इसका पूरा गुणा-गणित छिपा है रूफटॉप सोलर सिस्टम (Rooftop Solar System) में. जब आप अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाते हैं, तो सूरज की रोशनी से सीधे बिजली बनती है. इस बिजली से आप अपने घर के पंखे, लाइट, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और यहा तक कि भारी-भरकम एयर कंडीशनर (AC) भी चला सकते हैं.
अगर आपके घर की छत पर आपकी जरूरत के अनुसार, सही क्षमता का सोलर प्लांट लगा है और आप बिजली का इस्तेमाल समझदारी से करते हैं, तो आपका हर महीने का बिजली बिल 'जीरो' आ सकता है.
खास बात ये भी है कि सोलर पैनल की शुरुआती लागत महज 3 से 5 साल में वसूल हो जाती है, जबकि कम से कम मेंटेनेंस में भी 25 साल या उससे ज्यादा समय तक लगातार बिजली बनाते रहते हैं.
From Sunshine to Zero-Bill Possibilities
— BSES Delhi (@bsesdelhi) July 16, 2026
Every morning, the sun rises over Delhi. Now, it can do more than brighten our homes. It can power them, substantially reduce electricity bills and, in some cases, even bring them down to zero.
That means greater savings every month,… pic.twitter.com/AIst3nUh92
सरकार दे रही है 1.08 लाख तक की बंपर सब्सिडी
अकसर लोग शुरुआती खर्च देखकर सोलर पैनल लगवाने से कतराते हैं, लेकिन सरकार इसे बेहद किफायती बना रही है. 'PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' और 'दिल्ली सोलर पॉलिसी' के तहत योग्य आपको कुल 1,08,000 (1.08 लाख रुपये) तक की भारी सब्सिडी मिल रही है:
केंद्र सरकार की ओर से: 78,000 तक की वित्तीय सहायता.
दिल्ली सरकार की ओर से: 30,000 तक की अतिरिक्त सब्सिडी.
इसके अलावा आपको जनरेशन-बेस्ड इंसेंटिव (GBI) का लाभ भी मिलता है, जो आपकी बचत को और बढ़ा देता है.
बिजली बचाइए और BSES को बेच कर कमाइए
रूफटॉप सोलर का सबसे बड़ा फायदा है नेट मीटरिंग (Net Metering). मान लीजिए सर्दियों के दिनों में या जब आप घर से बाहर हैं, आपका सोलर पैनल जरूरत से ज्यादा बिजली बना रहा है, ऐसे में ये अतिरिक्त बिजली बेकार नहीं जाएगी, बल्कि ग्रिड के जरिए सीधे BSES को सप्लाई की जा सकती है.
BSES इस अतिरिक्त बिजली को आपसे खरीदेगा, जिससे आपके खाते में पैसे जुड़ेंगे. यानी आपकी खाली पड़ी छत, एक छोटा पावर प्लांट बन जाएगी, जो आपको कमा कर देगी.
Solar Is the New Currency
— BSES Delhi (@bsesdelhi) June 18, 2026
What if your roof could become one of your smartest investments?
With rooftop solar, every ray of sunshine can translate into long-term savings. Combine low-interest financing, attractive incentives and significantly lower electricity bills, and the… pic.twitter.com/3GjwCobllM
अगर आपके पास शुरुआत में निवेश करने के लिए एकमुश्त रकम नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं है. अब कई सारे बैंक और NBFC आसान दरों पर 'सोलर लोन' और EMI के विकल्प दे रहे हैं.
छत पर कितनी जगह चाहिए और कितनी बिजली बनेगी?
अगर आप अपनी छत पर 1 किलोवाट (kW) का सिस्टम लगाते हैं तो इससे आम तौर पर हर दिन लगभग 4 यूनिट बिजली बनेगी. इसके लिए छत पर लगभग 100 वर्ग फीट की ऐसी जगह चाहिए, जहां अच्छी धूत आती हो.
सोसायटियों को तो और ज्यादा फायदा है. RWAs और कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटीज अपनी कॉमन छतों पर सोलर लगाकर लिफ्ट, वाटर पंप और स्ट्रीट लाइट्स का भारी-भरकम खर्च 50% या उससे ज्यादा कम कर सकती हैं.
अप्लाई करने का आसान तरीका
अगर आप भी PM सूर्य घर योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसके लिए आवेदन का प्रोसेस बहुत ही आसान है.
- सबसे पहले आपको योजना के आधिकारिक पोर्टल PM Surya Ghar पर जाकर खुद को रजिस्टर करना होगा.
- यहां पोर्टल पर लिस्टेड और स्वीकृत (Approved) वेंडर्स में से किसी एक को चुन लेना होगा.
- इसके बाद अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करवाना होगा.
- डिस्कॉम (DISCOM) के जरिए नेट मीटरिंग की प्रक्रिया पूरी करे
इस तरह बिजली का उत्पादन शुरू कर सकते हैं और आपको भारी-भरकम बिल से मुक्ति मिल सकती है. जानकारों के अनुसार, एक बात का खयाल रखना होगा कि हमेशा DCR-प्रमाणित सोलर मॉड्यूल, स्वीकृत इनवर्टर और एमएनआरई (MNRE) के सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही उपकरण लगवाएं ताकि सब्सिडी मिलने में कोई दिक्कत न आए.
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