Vikram Aur Betaal All Episodes
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रामानंद सागर का रामायण से भी पहले आया वो शो, जिसने बच्चों को डराया और रोमांचित भी किया, 8.3 है रेटिंग
- Monday May 18, 2026
- Edited by: प्रियंका तिवारी
आज भी 90s और 80s के बच्चे इस सीरियल का नाम सुनते ही उसके डरावने बैकग्राउंड म्यूजिक और पेड़ से उल्टा लटके बेताल को याद करने लगते हैं. उस दौर में यह शो सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं था. पूरा परिवार इसे साथ बैठकर देखता था. हम बात कर रहे हैं उस दौर के मशहूर टीवी सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ की.
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ndtv.in
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थियेटर का उस्ताद था ये एक्टर, सपोर्टिंग रोल करते हुए की 150 से ज्यादा फिल्में, पर दूरदर्शन के एक सीरियल से छोड़ी ऐसी छाप की भूल नहीं पाए फैंस
- Tuesday April 9, 2024
- Edited by: रोज़ी पंवार
बॉलीवुड की दुनिया में एक स्टार ऐसा भी हुआ है जिसने तकरीबन 150 फिल्मों में काम किया. बतौर सपोर्टिंग एक्टर उनके काम को तारीफें भी मिलीं लेकिन एक मुकम्मल पहचान कभी नहीं बन सकी.
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ndtv.in
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साल 1985, दिन रविवार, समय शाम साढ़े चार बजे सूनी हो जाती थीं गलियां, जब आता था दूरदर्शन का यह धारावाहिक
- Sunday March 17, 2024
- Written by: नरेंद्र सैनी
दूरदर्शन के सुनहरी दिनों के तो क्या कहने. एक से एक बढ़कर एक कहानी आती थी. टीवी का पिटाना अपना विस्तार कर रहा था और ऐसी कहानियां पेश कर रहा था जिन्हें देखते हुए टीवी के आगे से उठना दूभर हो जाता था.
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रामानंद सागर का रामायण से भी पहले आया वो शो, जिसने बच्चों को डराया और रोमांचित भी किया, 8.3 है रेटिंग
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आज भी 90s और 80s के बच्चे इस सीरियल का नाम सुनते ही उसके डरावने बैकग्राउंड म्यूजिक और पेड़ से उल्टा लटके बेताल को याद करने लगते हैं. उस दौर में यह शो सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं था. पूरा परिवार इसे साथ बैठकर देखता था. हम बात कर रहे हैं उस दौर के मशहूर टीवी सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ की.
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थियेटर का उस्ताद था ये एक्टर, सपोर्टिंग रोल करते हुए की 150 से ज्यादा फिल्में, पर दूरदर्शन के एक सीरियल से छोड़ी ऐसी छाप की भूल नहीं पाए फैंस
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बॉलीवुड की दुनिया में एक स्टार ऐसा भी हुआ है जिसने तकरीबन 150 फिल्मों में काम किया. बतौर सपोर्टिंग एक्टर उनके काम को तारीफें भी मिलीं लेकिन एक मुकम्मल पहचान कभी नहीं बन सकी.
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साल 1985, दिन रविवार, समय शाम साढ़े चार बजे सूनी हो जाती थीं गलियां, जब आता था दूरदर्शन का यह धारावाहिक
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दूरदर्शन के सुनहरी दिनों के तो क्या कहने. एक से एक बढ़कर एक कहानी आती थी. टीवी का पिटाना अपना विस्तार कर रहा था और ऐसी कहानियां पेश कर रहा था जिन्हें देखते हुए टीवी के आगे से उठना दूभर हो जाता था.
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