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रामानंद सागर का रामायण से भी पहले आया वो शो, जिसने बच्चों को डराया और रोमांचित भी किया, 8.3 है रेटिंग

आज भी 90s और 80s के बच्चे इस सीरियल का नाम सुनते ही उसके डरावने बैकग्राउंड म्यूजिक और पेड़ से उल्टा लटके बेताल को याद करने लगते हैं. उस दौर में यह शो सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं था. पूरा परिवार इसे साथ बैठकर देखता था. हम बात कर रहे हैं उस दौर के मशहूर टीवी सीरियल ‘विक्रम और बेताल’ की.

रामानंद सागर का रामायण से भी पहले आया वो शो, जिसने बच्चों को डराया और रोमांचित भी किया, 8.3 है रेटिंग
रामायण से भी पहले आया था रामानंद सागर का यह शो
नई दिल्ली:

जब भी रामानंद सागर का नाम लिया जाता है, लोगों के दिमाग में सबसे पहले ‘रामायण' की याद ताजा हो जाती है. 80 और 90 के दशक में इस शो ने घर-घर में अलग पहचान बनाई थी. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि रामानंद सागर ने एक ऐसा फैंटेसी शो भी बनाया था, जिसने बिना धार्मिक कहानी के भी दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की थी. आज भी 90s और 80s के बच्चे इस सीरियल का नाम सुनते ही उसके डरावने बैकग्राउंड म्यूजिक और पेड़ से उल्टा लटके बेताल को याद करने लगते हैं. उस दौर में यह शो सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं था. पूरा परिवार इसे साथ बैठकर देखता था. हम बात कर रहे हैं उस दौर के मशहूर टीवी सीरियल ‘विक्रम और बेताल' की.

हर एपिसोड में होता था नया ट्विस्ट

‘विक्रम और बेताल' की सबसे खास बात इसकी कहानी कहने का तरीका था. हर एपिसोड में राजा विक्रमादित्य बेताल को अपने कंधे पर उठाकर ले जाते और रास्ते में बेताल एक नई कहानी सुनाता. लेकिन कहानी खत्म होते ही वह ऐसा सवाल पूछ देता, जिसका जवाब देना राजा विक्रम के लिए मजबूरी बन जाता. जैसे ही विक्रम जवाब देते, बेताल फिर उड़कर उसी पेड़ पर पहुंच जाता और पूरा सिलसिला दोबारा शुरू हो जाता. यही पैटर्न शो को बेहद दिलचस्प बनाता था.

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सिर्फ 26 एपिसोड, लेकिन क्रेज जबरदस्त

इस धारावाहिक में कुल 26 एपिसोड थे, लेकिन इसका क्रेज इतना ज्यादा था कि लोग अगले एपिसोड का इंतजार करते रहते थे. उस समय न OTT था, न यूट्यूब और न ही सोशल मीडिया. इसके बावजूद शो ने घर-घर में अपनी अलग पहचान बना ली थी. ‘विक्रम और बेताल' सिर्फ डराने वाला शो नहीं था. इसकी कहानियों में सस्पेंस के साथ-साथ नैतिक संदेश और दिमाग घुमा देने वाले सवाल भी होते थे. यही वजह थी कि बच्चे जहां बेताल को देखकर रोमांचित होते थे, वहीं बड़े लोग उसकी कहानियों और सवालों में दिलचस्पी लेते थे. कम बजट और सीमित तकनीक के बावजूद शो का माहौल इतना दमदार बनाया गया था कि कई दर्शक इसे देखकर डर भी जाते थे.

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रामायण-महाभारत से बिल्कुल अलग थी दुनिया

रामानंद सागर के बाकी बड़े शोज जहां धार्मिक और पौराणिक कथाओं पर आधारित थे, वहीं ‘विक्रम और बेताल' पूरी तरह लोककथाओं और रहस्य से भरी दुनिया में ले जाता था. यही कारण था कि यह शो उनके दूसरे प्रोजेक्ट्स से बिल्कुल अलग नजर आता था. कहा जा सकता है कि यह शो अपने समय से काफी आगे था, क्योंकि इसमें हॉरर, फैंटेसी, सस्पेंस और माइंड गेम्स का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता था.
आज के दौर में जहां हाई-टेक VFX और करोड़ों के बजट वाले शोज बनते हैं, वहीं ‘विक्रम और बेताल' आज भी अपनी कहानी और प्रेजेंटेशन की वजह से याद किया जाता है. यही वजह है कि पुराने दर्शक आज भी इसे भारतीय टेलीविजन के सबसे आइकॉनिक फैंटेसी शोज में गिनते हैं.

लेखक के बारे में
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प्रियंका तिवारी
Consulting News Writer
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