Ravish Kumar Blog On Education
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ऐसी लाइब्रेरी और अध्ययन कक्ष आपने किसी हिन्दी प्रदेश में देखी है?
- Friday November 15, 2019
- रवीश कुमार
हिन्दी प्रदेशों के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है बस उनमें निखार न आए इसका इंतज़ाम सिस्टम और समाज ने कर रखा है. सैंकड़ों किलोमीटर तक लाइब्रेरी नज़र नहीं आएगी. इसे बीते ज़माने का बताया जाता है. मैं अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में हूं. यहां यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले की लाइब्रेरी की रीडिंग रूम की तस्वीर दिखाना चाहता हूं.
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प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों की गुलामी जीकर आप भारत को विश्व गुरु नहीं बना सकते
- Monday April 22, 2019
- रवीश कुमार
अमेरिका में पिछले पांच साल में निजी मुनाफे पर चलने वाले 1200 कॉलेज बंद हो गए हैं. हर महीने 20 कालेज बंद होने का औसत निकलता है. निजी मुनाफे के लिए खुले कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन घटता जा रहा है. 2014 में जितना था उसका अब आधा हो गया है. यह होना था, इसकी वजह है. मुनाफे के लिए खोले गए इन निजी कालेजों का प्रदर्शन बहुत ख़राब हो रहा था.
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देश में किस हाल में है शिक्षा?
- Wednesday September 3, 2014
- Ravish Kumar
हम सब अपने−अपने शिक्षकों को तरह−तरह से याद करते हैं। कुछ श्रद्धा से तो कुछ बेहद तल्खी के साथ। शिक्षकों की भी दुनिया एकरस नहीं है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की अलग दास्तान हैं तो प्राइवेट स्कूलों की अलग। सरकारी स्कूलों में भी स्थायी और कांट्रेक्ट पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की कहानी अलग−अलग है।
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ऐसी लाइब्रेरी और अध्ययन कक्ष आपने किसी हिन्दी प्रदेश में देखी है?
- Friday November 15, 2019
- रवीश कुमार
हिन्दी प्रदेशों के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है बस उनमें निखार न आए इसका इंतज़ाम सिस्टम और समाज ने कर रखा है. सैंकड़ों किलोमीटर तक लाइब्रेरी नज़र नहीं आएगी. इसे बीते ज़माने का बताया जाता है. मैं अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में हूं. यहां यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले की लाइब्रेरी की रीडिंग रूम की तस्वीर दिखाना चाहता हूं.
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प्राइवेट स्कूल-कॉलेजों की गुलामी जीकर आप भारत को विश्व गुरु नहीं बना सकते
- Monday April 22, 2019
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अमेरिका में पिछले पांच साल में निजी मुनाफे पर चलने वाले 1200 कॉलेज बंद हो गए हैं. हर महीने 20 कालेज बंद होने का औसत निकलता है. निजी मुनाफे के लिए खुले कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन घटता जा रहा है. 2014 में जितना था उसका अब आधा हो गया है. यह होना था, इसकी वजह है. मुनाफे के लिए खोले गए इन निजी कालेजों का प्रदर्शन बहुत ख़राब हो रहा था.
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देश में किस हाल में है शिक्षा?
- Wednesday September 3, 2014
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हम सब अपने−अपने शिक्षकों को तरह−तरह से याद करते हैं। कुछ श्रद्धा से तो कुछ बेहद तल्खी के साथ। शिक्षकों की भी दुनिया एकरस नहीं है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की अलग दास्तान हैं तो प्राइवेट स्कूलों की अलग। सरकारी स्कूलों में भी स्थायी और कांट्रेक्ट पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की कहानी अलग−अलग है।
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