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बेल नियम जेल अपवाद, UAPA में भी लागू...उमर खालिद मामले में बड़ी बेंच की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट
- Monday May 18, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: पीयूष जयजान
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामलों में साफ किया कि “बेल नियम है और जेल अपवाद”, और लंबी हिरासत व ट्रायल में देरी की स्थिति में संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए जमानत दी जा सकती है.
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शादी के 8 साल बाद 3 बच्चों की मां को हुआ प्यार! प्रेमी के साथ रहने की जिद्द पर अड़ी, कोर्ट ने दिया गजब फैसला
- Saturday April 25, 2026
- Reported by: Dev Shrimali, Edited by: विश्वनाथ सैनी
MP की ग्वालियर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान एक महिला ने पति के साथ जाने से मना कर प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई. कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी मां को देते हुए तलाक प्रक्रिया तक मायके रहने और उसके बाद अपनी मर्जी से जीवन जीने की आजादी दी है.
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हाईकोर्ट ने कहा, 'रेप मूलभूत अधिकार का उल्लंघन', ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
- Thursday September 3, 2020
- Reported by: रतनदीप चौधरी, Translated by: आनंद नायक
हाईकोर्ट ने पीडि़ता के बयान पर भरोसा करते हुए निचली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, और आरोपी नसीरुद्दीन अली को नवंबर, 2009 में 20 वर्षीय महिला से रेप का दोषी पाया है. जस्टिस रुमी कुमारी फुकन की ओर से पारित आदेश में कोर्ट ने कहा कि रेप पीडि़ता के बयान को घटना की सही विवरण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, यदि रिकॉर्ड में आए अन्य सबूत भी इसकी पुष्टि करते हैं.
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बेल नियम जेल अपवाद, UAPA में भी लागू...उमर खालिद मामले में बड़ी बेंच की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामलों में साफ किया कि “बेल नियम है और जेल अपवाद”, और लंबी हिरासत व ट्रायल में देरी की स्थिति में संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए जमानत दी जा सकती है.
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MP की ग्वालियर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान एक महिला ने पति के साथ जाने से मना कर प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई. कोर्ट ने बच्चों की कस्टडी मां को देते हुए तलाक प्रक्रिया तक मायके रहने और उसके बाद अपनी मर्जी से जीवन जीने की आजादी दी है.
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हाईकोर्ट ने कहा, 'रेप मूलभूत अधिकार का उल्लंघन', ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
- Thursday September 3, 2020
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हाईकोर्ट ने पीडि़ता के बयान पर भरोसा करते हुए निचली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है, और आरोपी नसीरुद्दीन अली को नवंबर, 2009 में 20 वर्षीय महिला से रेप का दोषी पाया है. जस्टिस रुमी कुमारी फुकन की ओर से पारित आदेश में कोर्ट ने कहा कि रेप पीडि़ता के बयान को घटना की सही विवरण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है, यदि रिकॉर्ड में आए अन्य सबूत भी इसकी पुष्टि करते हैं.
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