New Criminal Law 2024
- सब
- ख़बरें
-
नए आपराधिक कानून के तहत देशभर में अलग-अलग राज्यों में कब-कब दर्ज हुई पहली FIR, देखें लिस्ट
पहले आईपीएस, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट होते थे लेकिन अब इन धाराओं को खत्म कर दिया है और इनकी जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) ने ले ली है.
-
नए कानून में कितने दिन की रिमांड और हिरासत, जान लीजिए हर एक बात
अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों (New Criminal Law) से "सजा के बजाय न्याय" और "देरी के बजाय तुरंत सुनवाई" सुनिश्चित होगी. उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होने के तीन साल के भीतर "सर्वोच्च न्यायालय के स्तर तक" न्याय दिया जाएगा.
-
क्या है Zero FIR, नए कानूनों के तहत दर्ज करवाने का नियम और इसके फायदे भी जानें
नए कानून लागू होने के बाद अब कोई भी पीड़ित क्राइम होने की स्थिति में किसी भी थाने में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज करा सकेगा. 15 दिनों के भीतर इसे मूल जूरिडिक्शन, यानी जहां क्राइम हुआ है, उस एरिया में भेजना होगा.
-
नए आपराधिक कानून के तहत देशभर में अलग-अलग राज्यों में कब-कब दर्ज हुई पहली FIR, देखें लिस्ट
पहले आईपीएस, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस एक्ट होते थे लेकिन अब इन धाराओं को खत्म कर दिया है और इनकी जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) ने ले ली है.
-
नए कानून में कितने दिन की रिमांड और हिरासत, जान लीजिए हर एक बात
अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों (New Criminal Law) से "सजा के बजाय न्याय" और "देरी के बजाय तुरंत सुनवाई" सुनिश्चित होगी. उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होने के तीन साल के भीतर "सर्वोच्च न्यायालय के स्तर तक" न्याय दिया जाएगा.
-
क्या है Zero FIR, नए कानूनों के तहत दर्ज करवाने का नियम और इसके फायदे भी जानें
नए कानून लागू होने के बाद अब कोई भी पीड़ित क्राइम होने की स्थिति में किसी भी थाने में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज करा सकेगा. 15 दिनों के भीतर इसे मूल जूरिडिक्शन, यानी जहां क्राइम हुआ है, उस एरिया में भेजना होगा.