Coronavirus Disease Covid 19
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कोविड होने के बाद आसानी से शिकार बना सकती हैं ये बीमारियां, सावधान रहना है जरूरी
- Monday May 1, 2023
- Edited by: Avdhesh Painuly
लाइफस्टाइल की गलतियों और लापरवाही से अब कुछ परेशानियां हैं जो लोगों में आमतौर पर और लंबे समय तक नजर आने लगी हैं, जिन्हें कोविड 19 के बाद के साइड इफेक्ट माना जा सकता है.
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कोरोना काल में 500 फीसदी तक बढ़े मानसिक रोगों के मामले, लोग डर से तैयार करवा रहे वसीयत
- Tuesday June 8, 2021
- Reported by: पूजा भारद्वाज, Edited by: राहुल सिंह
जानलेवा कोरोनावायरस (Coronavirus) ने खौफ और चिंता की एक नई महामारी को जन्म दिया है. लोग अपने प्राण खोने, प्रियजनों के हमेशा के लिए साथ छोड़ जाने, अकेले रह जाने और नौकरी/रोजगार आदि छिन जाने जैसे अंदेशों से दहशत में हैं. मानसिक रोग वाले मरीजों की संख्या पांच गुना बढ़ी है. लोग अनहोनी की आशंका में अपनी वसीयत तक तैयार करवा रहे हैं. कोरोना संकट के चलते हर आयु वर्ग पर मानसिक प्रभाव पड़ा है.
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COVID-19 सिर्फ फेफड़े की बीमारी नहीं, इससे खतरनाक तरीके से खून का थक्का भी जम सकता है : विशेषज्ञ
- Saturday May 8, 2021
- Reported by: भाषा
COVID-19 महज फेफड़े की बीमारी नहीं है जैसा कि पहले की अवधारणा थी, बल्कि इससे खतरनाक तरीके से खून का थक्का भी जम सकता है, जिसे तुरंत हटाने की जरूरत होगी ताकि कुछ मामलों में अंगों को बचाया जा सके. यह बात विशेषज्ञों ने कही है. वैश्विक स्तर पर किए गए शोध में बताया गया है कि अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के 14 से 28 फीसदी रोगियों में रक्त थक्का जमने की बात सामने आई है, जिसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) के नाम से जाना जाता है. वहीं दो से पांच फीसदी रोगियों में आर्टेरियल थ्रोम्बोसिस का मामला सामने आया.
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साल 2020 में अमेरिका में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बना कोविड-19: रिपोर्ट
- Thursday April 1, 2021
- Reported by: एएफपी, Translated by: सिद्धार्थ चौरसिया
सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. कोरोना वायरस के कारण करीब 3,75,000 लोगों की मौत हुई, जो 2020 में दिल की बीमारी और कैंसर से होने वाली मौत के बाद तीसरे स्थान पर है. अमेरिका में महामारी की शुरूआत के बाद से अब तक कोविड-19 के कारण 5,50,000 लोगों की मौत हो चुकी है. रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मौत के शीर्ष दस कारणों में पहले आत्महत्या भी एक वजह थी, जिसका स्थान अब कोविड-19 ने ले लिया है.
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कोरोनावायरस: संक्रमण के बाद महीनों तक रहता है बीमारी का असर
- Tuesday October 13, 2020
- Reported by: भाषा
कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मरीजों में कई सप्ताह एवं महीनों तक इसके लक्षण नजर आते हैं और विशेषज्ञों के लिए यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है कि मरीज कितने समय बाद पूरी तरह स्वस्थ महसूस करेंगे. जिन मरीजों में संक्रमण के मामूली लक्षण होते हैं, वे जल्द ही इस बीमारी से उबर जाते हैं, लेकिन बुजुर्ग और गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को कई बार स्वस्थ होने में तीन-चार महीने भी लग जाते हैं.
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Coronavirus: वहां की सरकार लोगों का भारत की तरह ख्याल नहीं रख पा रही है, मैं यहीं रहना चाहता हूं: अमेरिकी नागरिक जॉनी पियर्स
- Saturday July 11, 2020
- Written by: मानस मिश्रा
अमेरिका में कोरोना वायरस की वजह से फैल रहे संक्रमण की हालत किसी से भी छिपी नहीं है. वहीं भारत में भी कोरोना संक्रमण रोज नए रिकॉड तोड़ रहा है. फिर भी कई विशेषज्ञों और लोगों को लगता है कि भारत सरकार इस बीमारी से निपटने में ज्यादा अच्छा काम कर रही है. इसी तरह 75 साल के अमेरिकी नागरिक जॉनी पियर्स केरल के कोच्चि में पिछले 5 महीन से टिके हुए हैं और उन्होंने अब केरल हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि उनके टूरिस्ट वीजा को बिजनेस वीजा में बदल दिया जाए ताकि वह भारत में ज्यादा समय तक रह सकें.
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लंबे वक्त तक क्वारेंटीन रहे 700 जमातियों को स्पेशल ट्रेन से तमिलनाडु भेजा गया
- Saturday May 16, 2020
- Reported by: मुकेश सिंह सेंगर
अलग-अलग क्वारेंनटीन सेंटरों के करीब 700 जमातियों को एक विशेष ट्रेन के जरिये तमिलनाडु वापस भेजा जा रहा है. इन लोगों को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक विशेष ट्रेन लेकर जा रही है. बता दें कि मरकज़ का मामला सामने आने के बाद 2000 से ज्यादा लोगों को वहां से निकाला गया था जो या तो क़वारन्टीन सेंटरों में थे या फिर अस्पतालों में थे.
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कोरोना को मात देकर अपने घर लौटी डॉक्टर के साथ पड़ोसी ने की अभद्रता, घर पर लगाया ताला
- Saturday May 16, 2020
- Reported by: NDTV.com, Translated by: नितेश श्रीवास्तव
दिल्ली के वसंतकुंज में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. कोरोना संक्रमण का इलाज कर रहीं डॉक्टर, इसके चपेट में आ गई. इलाज कराने के बाद डॉक्टर जब घर पहुंची तो पड़ोसियों ने उनके साथ अभद्रता की. उन्हें घर के अंदर बंद कर दिया गया और सोसइटी छोडडने की धमकी भी दी गई. जानकारी के मुताबिक बुधवार को जब डॉक्टर अपना इलाज कराकर वापल लौटी तो उनके पड़ोसियों ने उन्हें कहीं और जाकर रहने के लिए कहा. इस दौरान उनके साथ गाली गलौज भी हुआ.
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एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया है : पीएम मोदी
- Tuesday May 12, 2020
- Reported by: अखिलेश शर्मा, Edited by: पवन पांडे
PM Modi Address Nation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नाम अपने संबोधन में प्रवासियों के संकट पर बोल सकते हैं, जो कि लॉकडाउन के दौरान नौकरी जाने की वजह से अपने घरों की ओर कूच कर रहे हैं. घर लौटने के लिए परेशान लोग पैदल, साइकिल या ट्रकों में लटक कर यहां तक कि ऑटोरिक्शा से आ रहे हैं. इनमें से कई लोगों की भूख, थकान या दुर्घटना में मौत हो गई है.
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इस वजह से सैकड़ों किमी का सफर तय करके भी प्रवासी मजदूर नहीं पहुंच पा रहे हैं अपने गांव
- Monday May 11, 2020
- Reported by: रवीश रंजन शुक्ला, Edited by: नितेश श्रीवास्तव
दरअसल बंगाल और छत्तीसगढ़ से आए श्रामिक भरतपुर के रास्ते मथुरा जाना चाहते थे जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस ने सीमा को सील कर रखा था. भरतपुर पुलिस श्रामिकों को जल्द से जल्द मथुरा भेजना चाहती थी और मथुरा पुलिस उन्हें अंदर नहीं दाखिल होने दे रही थी.
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कोविड होने के बाद आसानी से शिकार बना सकती हैं ये बीमारियां, सावधान रहना है जरूरी
- Monday May 1, 2023
- Edited by: Avdhesh Painuly
लाइफस्टाइल की गलतियों और लापरवाही से अब कुछ परेशानियां हैं जो लोगों में आमतौर पर और लंबे समय तक नजर आने लगी हैं, जिन्हें कोविड 19 के बाद के साइड इफेक्ट माना जा सकता है.
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कोरोना काल में 500 फीसदी तक बढ़े मानसिक रोगों के मामले, लोग डर से तैयार करवा रहे वसीयत
- Tuesday June 8, 2021
- Reported by: पूजा भारद्वाज, Edited by: राहुल सिंह
जानलेवा कोरोनावायरस (Coronavirus) ने खौफ और चिंता की एक नई महामारी को जन्म दिया है. लोग अपने प्राण खोने, प्रियजनों के हमेशा के लिए साथ छोड़ जाने, अकेले रह जाने और नौकरी/रोजगार आदि छिन जाने जैसे अंदेशों से दहशत में हैं. मानसिक रोग वाले मरीजों की संख्या पांच गुना बढ़ी है. लोग अनहोनी की आशंका में अपनी वसीयत तक तैयार करवा रहे हैं. कोरोना संकट के चलते हर आयु वर्ग पर मानसिक प्रभाव पड़ा है.
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COVID-19 सिर्फ फेफड़े की बीमारी नहीं, इससे खतरनाक तरीके से खून का थक्का भी जम सकता है : विशेषज्ञ
- Saturday May 8, 2021
- Reported by: भाषा
COVID-19 महज फेफड़े की बीमारी नहीं है जैसा कि पहले की अवधारणा थी, बल्कि इससे खतरनाक तरीके से खून का थक्का भी जम सकता है, जिसे तुरंत हटाने की जरूरत होगी ताकि कुछ मामलों में अंगों को बचाया जा सके. यह बात विशेषज्ञों ने कही है. वैश्विक स्तर पर किए गए शोध में बताया गया है कि अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के 14 से 28 फीसदी रोगियों में रक्त थक्का जमने की बात सामने आई है, जिसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) के नाम से जाना जाता है. वहीं दो से पांच फीसदी रोगियों में आर्टेरियल थ्रोम्बोसिस का मामला सामने आया.
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साल 2020 में अमेरिका में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बना कोविड-19: रिपोर्ट
- Thursday April 1, 2021
- Reported by: एएफपी, Translated by: सिद्धार्थ चौरसिया
सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. कोरोना वायरस के कारण करीब 3,75,000 लोगों की मौत हुई, जो 2020 में दिल की बीमारी और कैंसर से होने वाली मौत के बाद तीसरे स्थान पर है. अमेरिका में महामारी की शुरूआत के बाद से अब तक कोविड-19 के कारण 5,50,000 लोगों की मौत हो चुकी है. रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मौत के शीर्ष दस कारणों में पहले आत्महत्या भी एक वजह थी, जिसका स्थान अब कोविड-19 ने ले लिया है.
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कोरोनावायरस: संक्रमण के बाद महीनों तक रहता है बीमारी का असर
- Tuesday October 13, 2020
- Reported by: भाषा
कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मरीजों में कई सप्ताह एवं महीनों तक इसके लक्षण नजर आते हैं और विशेषज्ञों के लिए यह अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है कि मरीज कितने समय बाद पूरी तरह स्वस्थ महसूस करेंगे. जिन मरीजों में संक्रमण के मामूली लक्षण होते हैं, वे जल्द ही इस बीमारी से उबर जाते हैं, लेकिन बुजुर्ग और गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों को कई बार स्वस्थ होने में तीन-चार महीने भी लग जाते हैं.
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Coronavirus: वहां की सरकार लोगों का भारत की तरह ख्याल नहीं रख पा रही है, मैं यहीं रहना चाहता हूं: अमेरिकी नागरिक जॉनी पियर्स
- Saturday July 11, 2020
- Written by: मानस मिश्रा
अमेरिका में कोरोना वायरस की वजह से फैल रहे संक्रमण की हालत किसी से भी छिपी नहीं है. वहीं भारत में भी कोरोना संक्रमण रोज नए रिकॉड तोड़ रहा है. फिर भी कई विशेषज्ञों और लोगों को लगता है कि भारत सरकार इस बीमारी से निपटने में ज्यादा अच्छा काम कर रही है. इसी तरह 75 साल के अमेरिकी नागरिक जॉनी पियर्स केरल के कोच्चि में पिछले 5 महीन से टिके हुए हैं और उन्होंने अब केरल हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि उनके टूरिस्ट वीजा को बिजनेस वीजा में बदल दिया जाए ताकि वह भारत में ज्यादा समय तक रह सकें.
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लंबे वक्त तक क्वारेंटीन रहे 700 जमातियों को स्पेशल ट्रेन से तमिलनाडु भेजा गया
- Saturday May 16, 2020
- Reported by: मुकेश सिंह सेंगर
अलग-अलग क्वारेंनटीन सेंटरों के करीब 700 जमातियों को एक विशेष ट्रेन के जरिये तमिलनाडु वापस भेजा जा रहा है. इन लोगों को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक विशेष ट्रेन लेकर जा रही है. बता दें कि मरकज़ का मामला सामने आने के बाद 2000 से ज्यादा लोगों को वहां से निकाला गया था जो या तो क़वारन्टीन सेंटरों में थे या फिर अस्पतालों में थे.
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कोरोना को मात देकर अपने घर लौटी डॉक्टर के साथ पड़ोसी ने की अभद्रता, घर पर लगाया ताला
- Saturday May 16, 2020
- Reported by: NDTV.com, Translated by: नितेश श्रीवास्तव
दिल्ली के वसंतकुंज में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. कोरोना संक्रमण का इलाज कर रहीं डॉक्टर, इसके चपेट में आ गई. इलाज कराने के बाद डॉक्टर जब घर पहुंची तो पड़ोसियों ने उनके साथ अभद्रता की. उन्हें घर के अंदर बंद कर दिया गया और सोसइटी छोडडने की धमकी भी दी गई. जानकारी के मुताबिक बुधवार को जब डॉक्टर अपना इलाज कराकर वापल लौटी तो उनके पड़ोसियों ने उन्हें कहीं और जाकर रहने के लिए कहा. इस दौरान उनके साथ गाली गलौज भी हुआ.
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एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया है : पीएम मोदी
- Tuesday May 12, 2020
- Reported by: अखिलेश शर्मा, Edited by: पवन पांडे
PM Modi Address Nation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नाम अपने संबोधन में प्रवासियों के संकट पर बोल सकते हैं, जो कि लॉकडाउन के दौरान नौकरी जाने की वजह से अपने घरों की ओर कूच कर रहे हैं. घर लौटने के लिए परेशान लोग पैदल, साइकिल या ट्रकों में लटक कर यहां तक कि ऑटोरिक्शा से आ रहे हैं. इनमें से कई लोगों की भूख, थकान या दुर्घटना में मौत हो गई है.
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इस वजह से सैकड़ों किमी का सफर तय करके भी प्रवासी मजदूर नहीं पहुंच पा रहे हैं अपने गांव
- Monday May 11, 2020
- Reported by: रवीश रंजन शुक्ला, Edited by: नितेश श्रीवास्तव
दरअसल बंगाल और छत्तीसगढ़ से आए श्रामिक भरतपुर के रास्ते मथुरा जाना चाहते थे जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस ने सीमा को सील कर रखा था. भरतपुर पुलिस श्रामिकों को जल्द से जल्द मथुरा भेजना चाहती थी और मथुरा पुलिस उन्हें अंदर नहीं दाखिल होने दे रही थी.
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