Allahabad High Court Comment
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42 साल बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिला इंसाफ, 100 साल का बुजुर्ग हत्या केस से बरी
- Thursday February 5, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: अभिषेक पारीक
यह मामला वर्ष 1982 का है, जिसमें सेशन कोर्ट, हमीरपुर ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 1984 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसी फैसले के खिलाफ अगस्त 1984 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की गई थी.
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कमाने और खुद में सक्षम महिला अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
- Friday December 12, 2025
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: समरजीत सिंह
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी किसी भी प्रकार की सहानुभूति का पात्र नहीं है और याचिकाकर्ता से भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार नहीं है. साथ ही कोर्ट ने नोएडा फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को रद्द करते हुए याची पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया.
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रेप मामलों पर हाई कोर्ट की विवादित टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की तैयारी
- Monday December 8, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अभिषेक पारीक
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोई भी ऐसी टिप्पणी या प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए जो पीड़िता को डरा दे या उसे शिकायत वापस लेने की दिशा में धकेल दे.
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जाति बताने वाले सरकारी दस्तावेज और निशान मिटायें... हाई कोर्ट ने क्यों की ऐसी टिप्पणी, पढ़ें
- Saturday September 20, 2025
- Reported by: arun aggarwal, Edited by: समरजीत सिंह
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता प्रवीण छेत्री की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि जातिगत महिमामंडन 'राष्ट्र-विरोधी' है.
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रेप की कोशिश और तैयारी में फर्क... इलाहाबाद HC की टिप्पणी की क्यों हो रही है आलोचना?
- Friday March 21, 2025
- Edited by: Sachin Jha Shekhar
कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इसे गलत फैसला भी बताया है. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों दे दी जजों को ट्रेनिंग लेने की सलाह? जानें पूरा मामला
- Friday September 6, 2024
- Reported by: NDTV इंडिया, Edited by: बिक्रम कुमार सिंह
कोर्ट ने पाया कि सिविल कोर्ट के फैसले में न तो वादी के दावे और न ही प्रतिवादों को ठीक से संबोधित किया गया जिससे निष्कर्ष निरर्थक प्रतीत होते है. कोर्ट ने कहा कि फैसले के अनुसार प्रस्तुत तर्कों पर उचित विचार किए बिना प्रतिवादी के मुकदमे को खारिज कर दिया गया. (दीपक गंभीर की रिपोर्ट)
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मथुरा के पुराने मंदिरों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
- Thursday August 29, 2024
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: सूर्यकांत पाठक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के मंदिरों में वकीलों को रिसीवर बनाए जाने वाली अवमानना याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि मथुरा के मंदिरों में प्रबंधकीय विवाद के कारण वकीलों को रिसीवर नियुक्त करने से सिविल वादों का निस्तारण करने में रुचि नहीं ली जा रही. कोर्ट ने कहा कि मथुरा के मंदिरों में वकीलों में रिसीवर बनने की होड़ मची हुई है. कोर्ट ने कहा वेद शास्त्र का ज्ञान रखने वाले श्रद्धालु को मंदिरों का प्रशासन व प्रबंधन सौंपा जाना चाहिए, इससे वकीलों को दूर रखा जाए.
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“लिव इन रिलेशनशिप” जीवन का हिस्सा बन गए हैं और पुलिस अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्य हैं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
- Friday October 29, 2021
- Reported by: भाषा
अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी इन याचिकाकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने को बाध्य हैं. अदालत ने आदेश दिया कि ऐसी स्थिति में जब याचिकाकर्ता संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर अपनी जान और स्वतंत्रता को किसी तरह के खतरे की शिकायत करें तो पुलिस अधिकारी कानून के तहत अपेक्षित अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे.
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42 साल बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिला इंसाफ, 100 साल का बुजुर्ग हत्या केस से बरी
- Thursday February 5, 2026
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: अभिषेक पारीक
यह मामला वर्ष 1982 का है, जिसमें सेशन कोर्ट, हमीरपुर ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 1984 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसी फैसले के खिलाफ अगस्त 1984 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की गई थी.
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कमाने और खुद में सक्षम महिला अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
- Friday December 12, 2025
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: समरजीत सिंह
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी किसी भी प्रकार की सहानुभूति का पात्र नहीं है और याचिकाकर्ता से भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार नहीं है. साथ ही कोर्ट ने नोएडा फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को रद्द करते हुए याची पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया.
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रेप मामलों पर हाई कोर्ट की विवादित टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की तैयारी
- Monday December 8, 2025
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: अभिषेक पारीक
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोई भी ऐसी टिप्पणी या प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए जो पीड़िता को डरा दे या उसे शिकायत वापस लेने की दिशा में धकेल दे.
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जाति बताने वाले सरकारी दस्तावेज और निशान मिटायें... हाई कोर्ट ने क्यों की ऐसी टिप्पणी, पढ़ें
- Saturday September 20, 2025
- Reported by: arun aggarwal, Edited by: समरजीत सिंह
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता प्रवीण छेत्री की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि जातिगत महिमामंडन 'राष्ट्र-विरोधी' है.
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रेप की कोशिश और तैयारी में फर्क... इलाहाबाद HC की टिप्पणी की क्यों हो रही है आलोचना?
- Friday March 21, 2025
- Edited by: Sachin Jha Shekhar
कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इसे गलत फैसला भी बताया है. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा.
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों दे दी जजों को ट्रेनिंग लेने की सलाह? जानें पूरा मामला
- Friday September 6, 2024
- Reported by: NDTV इंडिया, Edited by: बिक्रम कुमार सिंह
कोर्ट ने पाया कि सिविल कोर्ट के फैसले में न तो वादी के दावे और न ही प्रतिवादों को ठीक से संबोधित किया गया जिससे निष्कर्ष निरर्थक प्रतीत होते है. कोर्ट ने कहा कि फैसले के अनुसार प्रस्तुत तर्कों पर उचित विचार किए बिना प्रतिवादी के मुकदमे को खारिज कर दिया गया. (दीपक गंभीर की रिपोर्ट)
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मथुरा के पुराने मंदिरों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
- Thursday August 29, 2024
- Reported by: Deepak Gambhir, Edited by: सूर्यकांत पाठक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के मंदिरों में वकीलों को रिसीवर बनाए जाने वाली अवमानना याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि मथुरा के मंदिरों में प्रबंधकीय विवाद के कारण वकीलों को रिसीवर नियुक्त करने से सिविल वादों का निस्तारण करने में रुचि नहीं ली जा रही. कोर्ट ने कहा कि मथुरा के मंदिरों में वकीलों में रिसीवर बनने की होड़ मची हुई है. कोर्ट ने कहा वेद शास्त्र का ज्ञान रखने वाले श्रद्धालु को मंदिरों का प्रशासन व प्रबंधन सौंपा जाना चाहिए, इससे वकीलों को दूर रखा जाए.
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“लिव इन रिलेशनशिप” जीवन का हिस्सा बन गए हैं और पुलिस अधिकारों की रक्षा के लिए बाध्य हैं : इलाहाबाद हाईकोर्ट
- Friday October 29, 2021
- Reported by: भाषा
अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी इन याचिकाकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने को बाध्य हैं. अदालत ने आदेश दिया कि ऐसी स्थिति में जब याचिकाकर्ता संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर अपनी जान और स्वतंत्रता को किसी तरह के खतरे की शिकायत करें तो पुलिस अधिकारी कानून के तहत अपेक्षित अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे.
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