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Automobile Dealers

'Automobile Dealers' - 2 News Result(s)
  • पिछले सात सालों में दुपहिया वाहन की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट : फाडा अध्यक्ष मनीष सिंघानिया

    पिछले सात सालों में दुपहिया वाहन की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट : फाडा अध्यक्ष मनीष सिंघानिया

    देश में दुपहिया वाहन की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यह देखा जा रहा है कि 2022-23 में दुपहिया वाहन की बिक्री पिछले कई सालों से लगातार गिरती जा रही है. इस बार में फाडा (Federation of Automobile Dealers Association) के अध्यक्ष मनीष सिंघानिया ने एनडीटीवी बात करते हुए कहा कि 2022-23 में दोपहिया गाड़ियों की बिक्री पिछले 7 साल में सबसे कम रही है. उनका कहना है कि 2019 के मुकाबले 2022-23 में दुपहिया गाड़ियों की बिक्री 19 प्रतिशत से कम रही है. अभी दुपहिया गाड़ियों की बिक्री कोरोनावायरस के पहले वाले स्तर तक नहीं पहुंच पाई है.

  • वाहन डीलरों ने कार कंपनियों से ऊंचे मार्जिन की मांग की

    वाहन बाजार में सुस्ती के बीच डीलर कार कंपनियों से ऊंचे मार्जिन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शोरूम के लिए ऊंचे किराये, बिक्री में गिरावट, ब्याज दरों में बढ़ोतरी तथा ऊंची श्रम लागत की वजह से उनके कारोबार पर दबाव बढ़ रहा है।

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  • पिछले सात सालों में दुपहिया वाहन की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट : फाडा अध्यक्ष मनीष सिंघानिया

    पिछले सात सालों में दुपहिया वाहन की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट : फाडा अध्यक्ष मनीष सिंघानिया

    देश में दुपहिया वाहन की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यह देखा जा रहा है कि 2022-23 में दुपहिया वाहन की बिक्री पिछले कई सालों से लगातार गिरती जा रही है. इस बार में फाडा (Federation of Automobile Dealers Association) के अध्यक्ष मनीष सिंघानिया ने एनडीटीवी बात करते हुए कहा कि 2022-23 में दोपहिया गाड़ियों की बिक्री पिछले 7 साल में सबसे कम रही है. उनका कहना है कि 2019 के मुकाबले 2022-23 में दुपहिया गाड़ियों की बिक्री 19 प्रतिशत से कम रही है. अभी दुपहिया गाड़ियों की बिक्री कोरोनावायरस के पहले वाले स्तर तक नहीं पहुंच पाई है.

  • वाहन डीलरों ने कार कंपनियों से ऊंचे मार्जिन की मांग की

    वाहन बाजार में सुस्ती के बीच डीलर कार कंपनियों से ऊंचे मार्जिन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शोरूम के लिए ऊंचे किराये, बिक्री में गिरावट, ब्याज दरों में बढ़ोतरी तथा ऊंची श्रम लागत की वजह से उनके कारोबार पर दबाव बढ़ रहा है।